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क्या प्रतिबंधों का हुआ है उलटा असर?: रूस की मुद्रा हुई और मजबूत, साथ ही ट्रेड सरप्लस में हुई बढ़ोतरी

Sat, 14 May 2022 04:38 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, मास्को
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, मास्को Published by: Harendra Chaudhary Updated Sat, 14 May 2022 04:38 PM IST
सार

द इकोनॉमिस्ट ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि रूस ने अब व्यापार के बारे में हर महीने आंकड़े जारी करना रोक दिया है। लेकिन उससे व्यापार कर रहे देशों के आंकड़ों से संकेत मिला है कि रूस का व्यापार लाभ तेजी से बढ़ रहा है...

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Russia has saved the ruble from collapse by adopting a policy of capital control
रूबल - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

रूस पर लगाए गए पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों का क्या उलटा असर हो रहा है? ये सवाल पश्चिमी मीडिया के दो ताजा निष्कर्षों से उठा है। अमेरिकी मीडिया संस्थान ब्लूमबर्ग ने अपने आकलन के आधार पर कहा है कि रूसी मुद्रा रुबल इस साल अब तक दुनिया में सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाली मुद्रा साबित हुई है। उधर लंदन की मशहूर पत्रिका द इकोनॉमिस्ट ने एक अध्ययन के आधार पर कहा है कि रूस में इस साल रिकॉर्ड व्यापार मुनाफा होगा।

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ब्लूमबर्ग के मुताबिक रूस ने पूंजी नियंत्रण की नीति अपना कर रुबल को ढहने से बचा लिया है। इस साल के आरंभ में अमेरिकी डॉलर की तुलना में रुबल का जो भाव था, इस बुधवार को उसकी कीमत उससे 11 फीसदी अधिक थी। दुनिया के किसी अन्य देश की मुद्रा की कीमत इस वर्ष इतनी नहीं बढ़ी है। 31 देशों की मुद्राओं के आकलन के आधार पर ब्लूमबर्ग ने ये निष्कर्ष निकाला है।

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‘अमित्र देशों’ से भुगतान सिर्फ रुबल में

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में ध्यान दिलाया गया है कि जब रूस ने यूक्रेन पर हमला किया और पश्चिमी देशों ने उस पर सख्त प्रतिबंध लगा दिए, तब रुबल की कीमत धड़ाम से गिरी। लेकिन उसके बाद रूसी सेंट्रल बैंक ने ब्याज दर में भारी बढ़ोतरी की और पूंजी नियंत्रण संबंधी सख्त कदम उठाए। इससे रुबल की कीमत संभली। उधर रूस सरकार ने फैसला किया कि एक अप्रैल से वह अपने तेल और गैस निर्यात के बदले ‘अमित्र देशों’ से भुगतान सिर्फ रुबल में स्वीकार करेगी। इससे रुबल को काफी बल मिला। रूस ने उन देशों को ‘अमित्र’ घोषित किया है, जिन्होंने उस पर प्रतिबंध लगाए हैं।

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द इकोनॉमिस्ट ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि रूस ने अब व्यापार के बारे में हर महीने आंकड़े जारी करना रोक दिया है। लेकिन उससे व्यापार कर रहे देशों के आंकड़ों से संकेत मिला है कि रूस का व्यापार लाभ तेजी से बढ़ रहा है। इस रिपोर्ट के मुताबिक पिछले नौ मई को चीन ने बताया कि रूस को उसके निर्यात में लगभग 25 फीसदी की गिरावट आई है। लेकिन रूस से आयात 56 प्रतिशत बढ़ा है।

इसी तरह मार्च में रूस को जर्मनी के निर्यात में 62 फीसदी की गिरावट आई। जबकि रूस से वहां आयात सिर्फ तीन फीसदी घटा। द इकोनॉमिस्ट की रिपोर्ट में बताया गया है कि रूस के सबसे बड़े आठ व्यापार सहभागियों के मामले में ऐसा ही रुझान देखा गया है। उनके मुताबिक रूस को हुए निर्यात में जहां 44 फीसदी गिरावट आई है, वहीं रूस से होने वाला आयात आठ प्रतिशत बढ़ा है।

पश्चिमी कंपनियों ने रूस को निर्यात रोका

बैंकरों की संस्था इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल फाइनेंस (आईआईएफ) से जुड़ी विशेषज्ञ एलिना रिबाकोवा के मुताबिक प्रतिबंध लगने के कारण पश्चिमी कंपनियों ने रूस को निर्यात रोक दिया। जबकि रूसी तेल, गैस और अन्य महत्त्वपूर्ण खनिज पदार्थों पर निर्भर कंपनियों ने आयात जारी रखा है। आईआईएफ का अनुमान है कि अगर आने वाले महीनों में यही ट्रेंड जारी रहा, तो इस वर्ष रूस का ट्रेड सरप्लस रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच जाएगा।



यह भी रूसी मुद्रा को मिल रही मजबूती का एक कारण है। विश्लेषकों के मुताबिक प्रतिबंधों का शुरुआती असर यह है कि पश्चिमी देशों में महंगाई और आर्थिक समस्याएं बढ़ी हैं, जबकि रूसी अर्थव्यवस्था के कई संकेतक इससे मजबूत हुए हैं।

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