UNSC में अमेरिका को बड़ा झटका: ईरान के समर्थन में खुलकर आए रूस-चीन, होर्मुज को खोलने के प्रस्ताव पर किया वीटो
पश्चिम एशिया जारी जंग के बीच संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने का प्रस्ताव पारित नहीं हो पाया। इससे अमेरिका व अन्य देशों के प्रयासों को झटका लगा है। चीन और रूस ने इस प्रस्ताव के खिलाफ वीटो किया। पढ़िए रिपोर्ट-
विस्तार
प्रस्ताव के पक्ष-विपक्ष में कितने वोट पड़े?
सुरक्षा परिषद के 15 में से 11 देशों ने प्रस्ताव के पक्ष में वोट दिया। पाकिस्तान और कोलंबिया ने मतदान से दूरी बनाई। जरूरी नौ वोट मिल गए थे। फिर भी प्रस्ताव पारित नहीं हो पाया। रूस और चीन स्थायी सदस्य हैं। उनके पास वीटो शक्ति है। इसी का इस्तेमाल कर प्रस्ताव को रोक दिया गया। शुरुआत में प्रस्ताव में अनुच्छेद 7 शामिल था। इससे सदस्य देशों को होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने के लिए बल प्रयोग की अनुमति मिल सकती थी। रूस और चीन इसका विरोध कर रहे थे। इसी वजह से लंबे समय तक बातचीत चली। प्रस्ताव की भाषा बदली गई। अंत में जो प्रस्ताव लाया गया, उसमें केवल देशों से रक्षात्मक तरीके से सहयोग करने की बात कही गई। बल प्रयोग की बात हटा दी गई थी।
ये भी पढ़ें: ईरान पर US के ताबड़तोड़ हमले, जवाब में तेहरान ने उतारे 510 किमी प्रति घंटा की रफ्तार वाले सुसाइड ड्रोन
बहरीन को उम्मीद थी कि रूस और चीन कम से कम मतदान से दूरी बनाएंगे। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। सुरक्षा परिषद इस मुद्दे पर बंटी हुई नजर आई। रूस और चीन ने वीटो कर साफ कर दिया कि वे ईरान के साथ खड़े हैं। दोनों देशों का कहना है कि प्रस्ताव में ईरान की बहुत कड़ी आलोचना की गई थी।
बहरीन ने यूएनएससी में क्या कहा?
बहरीन के विदेश मंत्री अब्दुल्लतीफ बिन राशिद अल जयानी ने यूएनएससी में कहा कि ईरान को होर्मुजल जलडमरूमध्य बंद करने का कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा, यह प्रस्ताव खाड़ी क्षेत्र के इस अहम जलमार्ग के गंभीर हालात को देखते हुए लाया गया है। दुनिया के तेल और गैस का करीब एक-पांचवां हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है।
#WATCH | UN Security Council fails to adopt a Bahrain-backed resolution on the Strait of Hormuz. China and Russia, permanent members, vetoed the draft.
— ANI (@ANI) April 7, 2026
(Video Source: UN News) pic.twitter.com/w8PHZOznD5
उन्होंने कहा कि खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) के देश वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का बड़ा स्रोत हैं। इसलिए हॉर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा पूरी दुनिया की जिम्मेदारी है। अल जयानी ने साफ कहा, ईरान को इस जलमार्ग को बंद करने का कोई अधिकार नहीं है। न ही वह दुनिया के लोगों को जरूरी ऊर्जा संसाधनों से वंचित कर सकता है।