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बढ़ रहीं नजदीकियां: फिर एकीकरण की ओर बढ़ रहे हैं रूस और बेलारुस?

Fri, 05 Nov 2021 06:46 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, मास्को
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, मास्को Published by: Harendra Chaudhary Updated Fri, 05 Nov 2021 06:46 PM IST
सार

रूस और बेलारुस दोनों सोवियत संघ का हिस्सा थे। सोवियत संघ के बिखराव के कई देशों के साथ रूस के संबंध बिगड़ गए। लेकिन बेलारुस उन देशों में है, जिनके साथ रूस के संबंध आज भी मजबूत हैं। पश्चिमी देशों में बेलारुस को रूस के प्रभाव क्षेत्र के रूप में ही देखा जाता है...

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Russia and Belarus moving towards reunification again
रूस और बेलारूस का झंडा - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

रूस और बेलारुस के राष्ट्रपति ने अपने साझा संघीय सैन्य सिद्धांत के संशोधित दस्तावेज पर दस्तखत किए हैं। साथ ही उन्होंने कई ऐसे अन्य दस्तावेजों पर भी हस्ताक्षर किए हैं, जिनका मकसद दोनों देशों को करीब लाना है। रूसी मीडिया में इन कागजात को ‘एकीकरण दस्तावेज’ कहा गया है। साथ ही इन्हें दोनों देशों के रिश्तों के बीच एक मील पत्थर भी बताया गया है।

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गुरुवार को रूस और बेलारुस की सर्वोच्च राज्य परिषद की बैठक के दौरान इन दस्तावेजों पर दस्तखत किए गए। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और बेलारुस के राष्ट्रपति अलेक्सांद्र लुकाशेंकों वीडियो लिंक के जरिए इस बैठक में उपस्थित हुए। उन्होंने दस्तावेजों पर दस्तखत की प्रक्रिया पूरी की।
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रूस और बेलारुस दोनों सोवियत संघ का हिस्सा थे। सोवियत संघ के बिखराव के कई देशों के साथ रूस के संबंध बिगड़ गए। लेकिन बेलारुस उन देशों में है, जिनके साथ रूस के संबंध आज भी मजबूत हैं। पश्चिमी देशों में बेलारुस को रूस के प्रभाव क्षेत्र के रूप में ही देखा जाता है।
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राज्य परिषद के सचिव दिमित्री मेन्जेत्सेव ने रूस की वेबसाइट रशियाटुडे.कॉम से कहा कि नए सैन्य सिद्धांत का मकसद दोनों देशों की रक्षा नीति को और अधिक सुसंगत बनाना है। इसका मकसद यह है कि दोनों देशों के रक्षा मंत्रालय समयबद्ध ढंग से साझा रक्षा उद्देश्यों को अपना सकें। सैन्य सिद्धांत में संशोधन करने का एलान पिछले महीने ही हुआ था।

तब रूस के रक्षा मंत्री सर्गेई शोइगू ने कहा था कि दस्तावेज को संशोधित किया जा रहा है, ताकि दोनों देश रक्षा मामलों में अपने कदमों के बीच बेहतर तालमेल कायम कर सकेँ। उन्होंने कहा था कि ऐसा तालमेल सिर्फ सैनिक क्षेत्र में ही नहीं होगा। बल्कि पश्चिमी देशों की तरफ से जो आर्थिक और राजनीतिक दबाव डाले जाते हैं, उनका भी मिल कर मुकाबला किया जाएगा।

मास्को से प्रकाशित अखबार द मास्को टाइम्स के मुताबिक यूरोपियन यूनियन ने हाल में लुकाशेंको पर आरोप लगाया था कि उनकी सरकार जानबूझ कर शरणार्थियों को यूरोप भेज रही है। ऐसा वह यूरोपियन यूनियन के प्रतिबंधों का जवाब देने के लिए कर रही है। पिछले साल बेलारुस में राष्ट्रपति चुनाव के बाद लुकाशेंको के विरोधियों ने धांधली का आरोप लगाया था। उसके बाद ईयू ने बेलारुस पर प्रतिबंध लगा दिए थे।

लुकाशेंको लगभग 30 साल से बेलारुस के राष्ट्रपति हैं। उधर रूस की सत्ता 20 साल से पुतिन के हाथों में रही है। दोनों देशों ने 1999 में दोनों देशों क बीच निकट सहयोग और एकीकरण का समझौता किया था। उस समझौते में ये आशा जताई गई थी कि भविष्य में दोनों की संयुक्त संसद, मंत्रिमंडल और अदालतें होंगी। उससे व्यवहार में दोनों देशों का एकीकरण हो जाएगा। लेकिन ये योजनाएं सफल नहीं हो सकीं।


अब पुतिन और लुकाशेंको ने सहयोग और एकीकरण के 20 कार्यक्रमों से जुड़े दस्तावेजों पर दस्तखत किए हैं। अब एकीकरण के लिए जो कार्यक्रम तय किए हैं, उनमें ज्यादातर आर्थिक क्षेत्र में हैं। इसके तहत दोनों देश साझा गैस और कच्चे तेल का बाजार बनाने और परमाणु ऊर्जा का साझा कार्यक्रम अपनाने की ओर बढ़ेंगे।

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