Benjamin Netanyahu: संघर्ष में बढ़त से घरेलू सियासत में नेतन्याहू मजबूत, हमास के हमले के बाद घट रहा था जनाधार
एक दिन पहले बमबर्षक विमानों से ईरान के परमाणु ठिकाने तबाह करने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का आभार जताते समय नेतन्याहू अपनी मुस्कान छिपा नहीं पाए। ताजा घटनाक्रम को इस्राइल में अगले साल होने वाले चुनावों के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
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इस्राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के जीवन में 7 अक्तूबर, 2023 की तारीख किसी काली छाया से कम नहीं है। उस दिन इस्राइल पर हमास के हमले ने न केवल नेतन्याहू को बुरी तरह हताश-निराश दिखाया, बल्कि राष्ट्रीय आपातकाल की स्थिति ने घरेलू राजनीति में उनका जन-समर्थन भी व्यापक स्तर पर घटा दिया। लेकिन अब ईरान के साथ संघर्ष में मिली बढ़त ने उन्हें आत्मविश्वास से भर दिया है। इस्राइल-ईरान जंग हालांकि अभी किसी निर्णायक नतीजे पर नहीं पहुंची है। लेकिन माना जा रहा है कि अमेरिका के समर्थन के साथ इस्राइल ने अपनी स्थिति मजबूत कर ली है। यह नेतन्याहू के चेहरे पर झलकते आत्मविश्वास से भी साफ जाहिर होता है।
एक दिन पहले बमबर्षक विमानों से ईरान के परमाणु ठिकाने तबाह करने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का आभार जताते समय नेतन्याहू अपनी मुस्कान छिपा नहीं पाए। ताजा घटनाक्रम को इस्राइल में अगले साल होने वाले चुनावों के लिहाज से अहम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस संघर्ष में सफलता नेतन्याहू (75) के लिए एक लंबे सियासी करियर फिर से संवारने का मौका साबित हो सकती है, जो राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय दोनों मोर्चों पर कई संकटों में घिरे हैं। घरेलू राजनीति में उनकी लोकप्रियता घटी है तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उन्हें युद्ध अपराध के आरोपों में गिरफ्तारी वारंट का सामना करना पड़ रहा है। अरब देश उनके कड़े आलोचक हैं और करीब दो साल से जारी क्षेत्रीय संघर्ष के कारण गाजा और पश्चिम एशिया में अन्य जगहों पर हजारों मौतों के लिए उन्हें युद्धोन्मादी के तौर पर जिम्मेदार ठहाराय जाता है।
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फीनिक्स की तरह फिर उठ खड़े होंगे
अनुभवी इस्राइल पत्रकार और नेतन्याहू की जीवनी लिखने वाले मजाल मुआलेम कहते हैं कि कि उन्होंने साबित कर दिया है कि वह फीनिक्स पक्षी की तरह हैं जो राख के ढेर से भी उठ खड़ा होता है। उनकी सफलता एक बार फिर उन्हें इस्राइली राजनीति का जादूगर साबित कर देगी।
आम लोगों ने ली राहत की सांस
नेतन्याहू घरेलू मोर्चे पर अपनी नजरें हमेशा टिकाए रहते हैं और ईरान पर हमलों ने इस लिहाज से उन्हें बढ़त की स्थिति में ला दिया है। तमाम इस्राइली ईरान के परमाणु कार्यक्रम को अपने देश के लिए खतरा मानते रहे हैं और अब अमेरिका की खुली भागीदारी से राहत महसूस कर हैं।
- नेतन्याहू के पूर्व सहयोगी अवीव बुशिंस्की ने कहा कि नेतन्याहू के बारे में यह राय बन गई थी कि वह कहते बहुत कुछ हैं लेकिन करते कुछ नहीं, लेकिन अब उन्होंने खुद को सफल साबित किया है।
हमास का हमला काला धब्बा
nहमास की तरफ से 7 अक्तूबर 2023 को किए गए हमले में करीब 1200 इस्राइली मारे गए थे और ढाई सौ से ज्यादा लोगों को बंधक बना लिया गया था। इस घटना के बाद नेतन्याहू के नेतृत्व पर सवालिया निशान उठने लगे थे। कई लोगों का मानना था कि इसके लिए सीधे तौर पर नेतन्याहू की नीतियां जिम्मेदार हैं, जिसकी वजह से ही हमास कई वर्षों तक गाजा में अपना वर्चस्व बनाए रखने और हथियारों के बलबूते खुद को ताकतवर बनाने में कामयाब हो पाया।
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राजनीतिक साख बढ़ाना इतना आसान भी नहीं
इस्राइल में अगले वर्ष चुनाव होने हैं और ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या ईरान के साथ जंग के जरिये नेतन्याहू अपनी सियासी साख फिर से बढ़ा पाएंगे। कम से कम ताजा सर्वेक्षण तो ऐसे संकेत नहीं देते हैं। पिछले सप्ताह लिए गए सर्वेक्षणों से पता चला है कि अगर आज चुनाव होते हैं तो गठबंधन सरकार बनाने के लिए नेतन्याहू को कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ सकता है।
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