चीन से वापस लौटने के बाद सनकी तानाशाह किम जोंग मिसाइल टेस्ट करेगा या नहीं?
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एक- दूसरे को जंग की धमकी देने वाले अमेरिका और उत्तर कोरिया के रिश्तों में सकारात्मक बदलाव आने की संभवना है। बता दें कि पिछले दिनों संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंध के बावजूद उत्तर कोरिया लगातार मिसाइल परीक्षण कर दुनिया के लिए सिरदर्द बन गया था। लेकिन हाल ही में चीनी मीडिया से खबर आई थी कि उत्तर कोरियाई तानाशाह ने परमाणु परीक्षणों को खत्म करने का संकल्प लिया।
बता दें कि उत्तर कोरियाई तानाशाह किम जोंग उन अपनी पत्नी री सोल जू के साथ चार दिवसीय यात्रा पर चीन पहुंचे हैं। उत्तर कोरियाई मीडिया ने परमाणु हथियारों को 'न्याय की एक विशाल तलवार' करार दिया है और कहा है कि किम की जिनपिंग से हुई वार्ता में परमाणु हथियारों के परीक्षण को रोकने की बात शामिल नहीं की गई है। लेकिन खबरें यह भी हैं कि किम जोंग उत्तर कोरिया वापस लौटने के बाद मिसाइल परीक्षण कार्यक्रम पर लगाम लगा सकते हैं।
किम जोंग उन के लिए पूरी तरह से परमाणु हथियारों को छोड़ने का मतलब एक सत्तावादी नेता के लिए नाटकीय तब्दीली है, जिसने न केवल अपने परमाणु हथियार पर सुरक्षा की है, बल्कि अपने शासनकाल में परमाणु शक्ति को एक महत्वपूर्ण अंग मानते हुए हथियारों का सार्वजनिक रूप से परीक्षण किया है। मालूम हो कि दक्षिण कोरियाई दूतों ने इस महीने के शुरू में प्योंगयांग में किम से मुलाकात की थी, जिसके बाद किम ने कहा था कि वह परमाणु मुक्त के लिए प्रतिबंध है।
इस दौरान किम जोंग उन ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से जल्द से जल्द मिलने की इच्छा भी जाहिर कर चुके हैं। जिसके बाद अब दोनों नेताओं के बीच मई में मुलाकात हो सकती है। किम ने यह भी कहा कि उत्तर कोरिया संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ बातचीत करने और दोनों देशों की एक शिखर बैठक के लिए तैयार है।
बता दें कि ऐसा पहली बार है जब तानाशाह किम जोंग-उन सत्ता हासिल करने के बाद किसी देश के दौरे पर है। किम का यह दौरा रविवार को शुरू हुआ जो बुधवार तक चलेगा। बीजिंग में एक विशेष ट्रेन के आने और गेस्टहाउस में असामान्य रूप से भारी सुरक्षा बल के चलते माना जा रहा है कि दोनों देशों में कुछ गोपनीय मसलों पर चर्चा हुई है।
चूंकि दोनों देश एक-दूसरे के मित्र देश हैं और चीन-उत्तर कोरियाई सीमा पर भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती देखी गई इसलिए विशेषज्ञ मान रहे हैं कि रविवार व सोमवार को उत्तर कोरियाई नेता बीजिंग में मौजूद थे। मीडिया ने भी इस आशय की जानकारी दी है। हालांकि चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हुआ चुंयिंग ने उसे इन खबरों के बारे में कोई जानकारी नहीं है।
उत्तर कोरियाई दूतावासों के अधिकारी भी इस यात्रा को लेकर कुछ बोलने को तैयार नहीं हैं। लेकिन मंगलवार की दोपहर को मोटरसाइकल एस्कॉर्ट का एक काफिला बीजिंग के मुख्य रेलवे स्टेशन की दिशा में जाता पाया गया।
माना जा रहा है कि इस ट्रेन में उत्तर कोरियाई नेता के खास प्रतिनिधि भी अपने नेता का एजेंडा लेकर बीजिंग यात्रा पर आ सकते हैं। जो भी हो लेकिन यह यात्रा बेहद छोटी रही। इस बीच उत्तर कोरिया और बीजिंग के बीच यात्रा के दौरान कई प्रतिबंध भी लगाए गए। जापान की एनटीवी ने बताया कि हरी और पीले रंग रंग की ट्रेनें एक साथ देखी गईं जो किम के पिता की चीन यात्रा के समय चलाई जाती थीं।
हमेशा से गोपनीय रही है उ. कोरियाई नेताओं की चीन यात्रा
इतिहास पर गौर करें तो उत्तर कोरियाई नेता की चीन और अपने पड़ोसी देशों की यात्रा हमेशा गोपनीय रही है। किम के दिवंगत पिता किम जोंग-इल गुपचुप तरीके से चीन की यात्रा करते थे। चीन लंबे समय से उत्तर कोरिया का सहयोगी रहा है लेकिन चीन द्वारा संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंधों को लागू करने के बाद से दोनों देशों के रिश्तों में तनाव पैदा हो गया है। अमेरिका के दबाव के बाद चीन ने उत्तर कोरिया को तेल और कोयला जैसी जरूरी चीजों की आपूर्ति रोक दी थी।