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तुर्की में हिंसक झड़पें, जमे प्रदर्शनकारी
बीबीसी
Updated Sat, 01 Jun 2013 10:13 PM IST
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तुर्की के इस्तांबुल में तकसीम चौक के पुनर्विकास को लेकर हिंसक झड़पों के दो दिन बाद चौक से पुलिस को हटा लिया गया है और शहर के इस मुख्य चौक पर प्रदर्शनकारियों का कब्ज़ा हो गया है।
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इससे पहले शनिवार को प्रधानमंत्री रेकेप ताईप एर्दोगन ने पुनर्विकास के संपल्प को दोहराते हुए लोगों से प्रदर्शन तुरंत ख़त्म करने को कहा था।
हालांकि प्रधानमंत्री ने वादा किया था कि कई सालों के इस सबसे बड़े प्रदर्शन में पुलिस द्वारा शक्ति के ज़्यादा इस्तेमाल शिकायतों की जांच करवाई जाएगी।
कई देशों ने आंदोलन से निपटने के सरकार की तरीके पर चिंता ज़ाहिर की थी।
इस्तांबुल के तकसीम चौक के पुनर्विकास को लेकर लोग सड़कों पर उतर आए थे लेकिन प्रधानमंत्री का कहना था कि यह काम जारी रहेगा।
कई युवा प्रदर्शनकारियों ने सरकार पर निरंकुश होने और देश का इस्लामीकरण करने का आरोप लगाया था।
आंसू गैस-पानी की बौछारें
एर्दोगन की सरकार 2002 से तुर्की में सत्ता पर काबिज़ है और लोगों का कहना है कि यह दिन-ब-दिन अधिनायकवादी होती जा रही है।
सत्ताधारी एके पार्टी की राजनीतिक जड़ें इस्लाम में हैं लेकिन एर्दोगन कहते रहे हैं कि वह तुर्की की धर्मनिरपेक्षता के समर्थक हैं।
निर्यातकों के संघ को संबोधित करते हुए एर्दोगन ने कहा, “हम बैरक (ओटोमन काल के सैन्य बैरक) बनाएंगे। लोगों और संपत्ति की सुरक्षा के लिए कानून-व्यवस्था कायम की जाएगी।”
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उन्होंने शॉपिंग मॉल को लेकर कुछ नहीं कहा लेकिन प्रदर्शनकारियों को डर है कि चौक में शॉपिंग मॉल भी बनाया जाएगा।
एर्दोगन ने कहा, “पुलिस वहां (तकसीम चौक) में कल भी थी। आज भी रहेगी और कल भी क्योंकि तकसीम चौक ऐसी जगह नहीं है जहां अतिवादी आजादी से घूमते रहें।”
प्रधानमंत्री ने प्रदर्शनकारियों से कहा, “मतपेटी के बाहर की जा रही सभी चीज़ें अलोकतांत्रिक हैं।”
पार्क के पुनर्विकास के खिलाफ़ धरना शुक्रवार को पुलिस के आंसू गैस का इस्तेमाल करने के बाद भड़क गया था। करीब एक दर्जन लोगों को अस्पताल में भर्ती करवाया गया और 60 से ज़्यादा लोगों को हिरासत में लिया गया।
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शनिवार को सैकड़ों प्रदर्शनकारी मुख्य चौक की ओर बढ़े। पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए आंसू गैस छोड़ी और कुछ प्रदर्शनकारियों ने पत्थर फेंके।
तकसीम चौक में एकत्र प्रदर्शनकारी “फ़ासीवाद के खिलाफ़ एक हो जाओ” और “इस्तीफ़ा दो सरकार” जैसे नारे लगा रहे थे। यहां पुलिस ने उन पर आंसू गैस के गोले फेंके और पानी की बौछारें मारीं। बेसिकाटस ज़िले में भी झड़पों की ख़बर है।
निंदा
इस्तांबुल निवासी लिली ने बीबीसी वर्ल्ड सर्विस को कहा कि पुलिस ने रात को हेलीकॉप्टर से आंसू गैस के गोले गिराए हैं।
इस्तांबुल में एक महिला प्रदर्शनकारी ने समाचार एजेंसी फ्रांसे-प्रेसे को कहा, “वह इस देश को इस्लामिक देश बना देना चाहते हैं। प्रजातंत्र का आदर करने का नाटक करते हुए वह अपने विचार हम पर थोपना चाहते हैं।”
इस्तांबुल में बीबीसी संवाददाता लुइस ग्रीनवुड के अनुसार अंताल्या जैसी दूर-दराज की जगहों से भी पुलिस को बुलाया जा रहा है ताकि हिंसा पर काबू पाया जा सके।
अंकारा में शनिवार को सैकड़ों प्रदर्शनकारी एक पार्क में एकत्र हुए। कई लोग हाल ही में लागू प्रतिबंध के विरोध में शराब पी रहे थे।
तुर्की सरकार ने रात को दस बजे से सुबह छह बजे तक शराब की बिक्री और उपभोग पर प्रतिबंध लगा दिया है।
यह लोग सरकार विरोधी नारे लगा रहे थे और संसद की ओर जाने की कोशिश कर रहे थे लेकिन पुलिस ने उन्हें तितर-बितर कर दिया।
टि्वटर पर लोगों ने तुर्की में विरोधों को लेकर ठीक से मीडिया कवरेज न होने पर नाराज़गी ज़ाहिर की है। अमेरिका ने तुर्की द्वारा प्रदर्शनकारियों से बर्ताव पर चिंता जताई है और एमनेस्टी इंटरनेशनल ने पुलिस के रवैये की निंदा की है।