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जापान: स्मार्टफोन के कचरे से बना राकेट अंतरिक्ष में ले गया सैटेलाइट
एजेंसी, टोक्यो
Updated Sun, 04 Feb 2018 04:35 AM IST
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जापान ने शनिवार को दुनिया के सबसे छोटे और हल्के राकेट से सैटेलाइट को सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में पहुंचा दिया। यह राकेट घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरणों और स्मार्टफोन के पार्ट्स से बनाया गया है। इसका मकसद अंतरिक्ष में सस्ते में सैटेलाइट पहुंचाने की तकनीक विकसित करना है क्योंकि दुनिया भर मेें माइक्रो सैटेलाइट की मांग बढ़ रही है। दिया।
यह राकेट एसएस-520 शृंखला का नंबर पांच व्हीकल है। यह खंभे जितना बड़ा है। इसकी लंबाई दस मीटर और व्यास 50 सेंटीमीटर है। जापान एयरोस्पेस एक्सप्लोरेशन एजेंसी के मुताबिक सैटेलाइट दोपहर दो बजे लांच हुआ और पैलोड को सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में पहुंचाने में कामयाब रहा। यूनिवर्सिटी ऑफ टोक्यो की ओर से विकसित की गई इस सैटेलाइट का वजन सिर्फ छह किलोग्राम था और यह धरती की सतह की तस्वीरें खींचेगी।
असफल प्रक्षेपण के बाद 40 से ज्यादा सुधार
जापानी स्पेस एजेंसी ने बताया कि पिछले साल इस राकेट का प्रक्षेपण असफल हो गया था। पिछले साल 15 जनवरी को उड़ान के कुछ देर बाद ही संचार में समस्या के चलते मिशन को रोकना पड़ा। जांच में पाया गया कि उड़ान के समय हुए वाइब्रेेशन के चलते शार्ट सर्किट हो गया, जिससे डाटा ट्रांसमीटर को मिलने वाली ऊर्जा बंद हो गई। 40 से ज्यादा सुधार कर नए राकेट को बेहतर बनाया गया।
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यह राकेट एसएस-520 शृंखला का नंबर पांच व्हीकल है। यह खंभे जितना बड़ा है। इसकी लंबाई दस मीटर और व्यास 50 सेंटीमीटर है। जापान एयरोस्पेस एक्सप्लोरेशन एजेंसी के मुताबिक सैटेलाइट दोपहर दो बजे लांच हुआ और पैलोड को सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में पहुंचाने में कामयाब रहा। यूनिवर्सिटी ऑफ टोक्यो की ओर से विकसित की गई इस सैटेलाइट का वजन सिर्फ छह किलोग्राम था और यह धरती की सतह की तस्वीरें खींचेगी।
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असफल प्रक्षेपण के बाद 40 से ज्यादा सुधार
जापानी स्पेस एजेंसी ने बताया कि पिछले साल इस राकेट का प्रक्षेपण असफल हो गया था। पिछले साल 15 जनवरी को उड़ान के कुछ देर बाद ही संचार में समस्या के चलते मिशन को रोकना पड़ा। जांच में पाया गया कि उड़ान के समय हुए वाइब्रेेशन के चलते शार्ट सर्किट हो गया, जिससे डाटा ट्रांसमीटर को मिलने वाली ऊर्जा बंद हो गई। 40 से ज्यादा सुधार कर नए राकेट को बेहतर बनाया गया।
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