चार साल में तीसरा दौरा: नेपाल पहुंचे पीएम मोदी, सबसे पहले जाएंगे जानकी मंदिर
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नेपाल के जनकपुर पहुंच चुके हैं। चार वर्ष के शासन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी की यह तीसरी नेपाल यात्रा है। जनकपुर के विमान स्थल पर नेपाल के रक्षामंत्री ईश्वर पोखरेल और प्रदेश नंबर-दो के मुख्यमंत्री लालबाबू राउत ने प्रधानमंत्री का स्वागत किया।
जनकपुर एयरपोर्ट से मोदी सीधे जानकी मंदिर जाएंगे। मंदिर में उनका स्वागत नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली करेंगे। जानकी मंदिर के गर्भगृह में जाकर प्रधानमंत्री करीब 45 मिनट पूजा-अर्चना करेंगे। मोदी के जनकपुर में रहने के दौरान एयरपोर्ट और आकाश में किसी भी विमान को उड़ान भरने की अनुमति नहीं होगी।
इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नेपाल के पीएम केपी ओली संयुक्त रूप से रामायण सर्किट का उद्घाटन करेंगे और अयोध्या-जनकपुर बस सेवा का शुभारंभ भी करेंगे। संयुक्त उद्घाटन के बाद मोदी नागरिक अभिनंदन ग्रहण करने के साथ ही दो नंबर प्रदेश की जनता को संबोधित भी करेंगे। दो नंबर प्रदेश सरकार के अनुसार अभिनंदन स्थल में एक लाख से अधिक लोगों की सहभागिता रहेगी। जनकपुर के जनसभा में सहभागी होने के बाद मोदी काठमांडू जाएंगे।
सहयोग परियोजना की घोषणा की संभावना
बीरगंज स्थित भारतीय महावाणिज्य दूतावास बीसी प्रधान के अनुसार भारत नेपाल के साथ रेल, पानी और कृषि क्षेत्र के माध्यम से जुड़ना चाहता है। कुछ जगहों में इन परियोजनाओं की घोषणा भी हो सकती है। नेपाल के प्रधानमंत्री ओली के हालिया भारत दौरे में हुए समझौते और घोषणा के कार्यान्वयन के विषय में भी मोदी की इस यात्रा के दौरान विचार विमर्श होगा।
अटल बिहारी वाजपेयी भी जनकपुर पहुंचे थे
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने भी विपक्षी दल के नेता रहते वक्त 26 साल पहले जनकपुर पहुंच कर जानकी मंदिर के दर्शन किए थे। वाजपेयी ने एक रात जनकपुर में ही बिताई थी और स्थानीय लोगों को संबोधित भी किया था।
‘पड़ोसी पहले’ की नीति को दर्शाती यात्रा
पीएम मोदी ने अपनी दो दिवसीय नेपाल यात्रा को अपनी सरकार की पड़ोसी पहले की नीति के प्रति प्रतिबद्ध्ता के रूप में परिभाषित किया है। उन्होंने कहा कि 'हिमालयी राज्य नए युग में प्रवेश कर चुका है। भारत उसका मजबूत साथी बना रहेगा। यह भारत और व्यक्तिगत रूप से मेरी प्राथमिकता को दिखाता है कि हम अपने दशकों पुराने और करीबी मित्र नेपाल से जुड़े रहना चाहते हैं। उच्च स्तरीय और नियमित संपर्क हमारी सरकार की ‘पड़ोसी पहले’ की प्राथमिकता को दिखाते हैं।'