आखिर पांच बच्चों को गुफा से कैसे निकाला गया, कोच के साथ क्यों गए थे 12 बच्चे
थाईलैंड की गुफा में फंसे हुए बच्चे और उनके कोच तो निकालने के लिए बचावकर्मी काफी समय से कोशिशों में जुटे हुए थे। उनके भरसक प्रयत्नों के बाद अभी तक पांच बच्चों को गुफा से निकाला जा चुका है। वहीं अन्य लोगों को बचाने के लिए अभी भी बचाव कार्य चल रहा है। लेकिन क्या आप ये बात जानते हैं कि आखिर ये सभी लोग इस गुफा में क्यों गए थे? साथ ही इन बच्चों को किस प्रकार इस गुफा से निकाला गया।
एक सवाल सबके मन में उठा है कि शनिवार, 23 जून को फुटबॉल कोच और ये 12 बच्चे उस मौत की गुफा में गए क्यों थे?
बीबीसी थाई रिपोर्ट के अनुसार 23 जून को स्थानीय समय दिन में 10 बजे यह टीम फुटबॉल की प्रैक्टिस के लिए पहुंची थी। 10:42 बजे कोच ने फुटबॉल प्रैक्टिस का फेसबुक पर एक वीडियो पोस्ट किया। शाम में करीब तीन बजे टैम-लोंग- खुनाम नांगनोन नेशनल पार्क के कर्मियों ने देखा कि 12 साइकिलें गुफा के प्रवेश द्वार पर खड़ी हैं। इसी के बाद इन्हें खोजने का अभियान शुरू हुआ। इन बच्चों में से एक लड़के के माता-पिता ने नेशनल पार्क के कर्मियों को बताया कि उनका बेटे से संपर्क नहीं हो पा रहा है।
शनिवार रात को आधिकारिक रूप से माएसई पुलिस ने इन बच्चों के गायब होने की बात कही और 24 जून, रविवार को दोपहर में एक बजे के आसपास शुरुआती खोज अभियान शुरू हुआ। हालांकि कुछ स्थानीय रिपोर्टरों का कहना है कि गुफा में ये फुटबॉल प्रैक्टिस के बाद एक सरप्राइज पार्टी में गए थे। इसी टीम के एक खिलाड़ी का नाम गेम है। 23 जून को वो गुफा में नहीं गया था। उसने कासोद अखबार से कहा कि टीम इससे पहले भी तीन बार उस गुफा में जा चुकी है, लेकिन ऐसा बारिश के मौसम में कभी नहीं हुआ।
उसने उस अखबार से कहा, ''हम लोग गुफा में जाने से पहले तैयारी करते थे। हम लोग के पास टॉर्च होते थे। हम लोग इस बात को सुनिश्चित करते थे कि सभी वहां जाने के लिए फिट तो हैं।'' गेम ने कहा कि वो उस दिन टीम का हिस्सा इसलिए नहीं बन पाया, क्योंकि तबीयत ठीक नहीं थी। गेम ने कहा, ''हमलोग ट्रेनिंग के लिए गुफा में जाते थे या फिर किसी टीम सदस्य के बर्थडे के मौके पर। ये किसी बर्थडे प्लान का हिस्सा लग रहा है।'' इसी हफ्ते गुफा से एक चिट्ठी आई थी। फुटबॉल कोच एकापोल ने अपनी दादी को निराश नहीं होने के लिए आश्वस्त किया था। इसके साथ ही उन्होंने बच्चों के माता-पिता से माफी भी मांगी थी।
आखिर गुफा में लोग फंसे कैसे?
गुफा में टीम के पहुंचने के बाद से ही मूसलाधार बारिश शुरू हो गई थी। जंगल के बाढ़ के पानी से गुफा का प्रवेश द्वार बंद हो गया। इसके बाद कोच के साथ सारे बच्चे गुफा में लगातार फंसते गए। गुफा का जल स्तर लगातार बढ़ता गया। टैम लोंग गुफा 10,316 लंबी है और यह थाईलैंड की चौथी सबसे बड़ी गुफा है। बीबीसी को दिए इंटरव्यू में ब्रिटिश केव रेस्क्यू काउंसिल के बिल वाइट हाउस ने कहा कि गोताखोरों ने आंशिक रूप से बाढ़ ग्रस्त और संकरे गलियारे में 15,00 मीटर जाकर पता लगाया था।
सात जुलाई को डेलीन्यूज वेबसाइट की रिपोर्ट में कहा गया है कि एक खोज अभियान बच्चों को ऊपर से निकालने पर काम कर रहा है।बीबीसी थाई की रिपोर्ट के अनुसार मुख्य कोच का कहना है कि ये लड़के थाईलैंड की पेशेवर फुटबॉल टीम का हिस्सा बनना चाहते हैं।
बच्चों को निकाला कैसे गया?
इस अभियान को थाईलैंड के 40 और 50 विदेशी गोताखोरों ने अंजाम दिया। इनके लिए यह बेहद चुनौती भरा अभियान था। ये वहां तक रस्सियों के सहारे पानी में चलते हुए तैरते हुए और चढ़ते हुए पहुंचे। गोताखोरों के चेहरे पूरी तरह से नकाब से ढंके हुए थे। ये उन बच्चों को निकालने पहुंचे थे जिन्हें नहीं पता है कि गुफा के पानी से कैसे निकलना होता है। हर एक बच्चे पर दो गोताखोर थे। इन्हीं गोताखोरों के पास एयर सप्लाई भी थी। गोताखोरों के लिए उस गुफा के आधे रास्ते तक ही पहुंचना काफी चुनौती भरा था।
यहां तक हवा टैंक को ले जाना काफी मुश्किल काम था। इन गोताखोरों ने चेंबर थ्री नाम से एक बेस बनाया था, जहां बच्चों को गुफा के प्रवेश द्वार से निकालकर लाया जा रहा था। सुरक्षित निकाले गए बच्चों को चियांग राय हॉस्पिटल में भर्ती किया गया है। शुक्रवार को थाई नेवी के एक गोताखोर की अभियान के दौरान ही मौत हो गई थी। इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि यह अभियान कितना मुश्किल है। समन गुनान मौके पर एयर टैंक मुहैया कराकर लौट रहे थे तभी उन्होंने ऑक्सीजन की कमी के कारण दम तोड़ दिया। गुनान के एक सहकर्मी ने कहा कि उनके साथी का समर्पण बेकार नहीं जाएगा।
राहत-बचावकर्मी गुफा तक कैसे पहुंचे?
गुफा में फंसे बच्चे उसके प्रवेश द्वारा से चार किलोमीटर पीछे हैं। सभी बच्चों की उम्र 11 से 17 साल के बीच है जो वाइल्ड बोर्स फुटबॉल क्लब से जुडे हैं। अपने कोच के साथ एक ट्रेनिंक ट्रिप के दौरान ये बच्चे यहां फंस गए थे। इसे पता करने में नौ दिनों का वक्त लग गया था कि ये फंसे कहां हैं। थाईलैंड के अधिकारियों का मानना था कि बच्चों के इस समूह को बारिश के मौसम तक गुफा में ही रुकना पड़ सकता है। इसका मतलब यह हुआ कि महीनों के वक्त लग सकते हैं।
राहत-बचाव कर्मी गुफा में ड्रिल करने पर भी विचार कर रहे हैं। इसके साथ ही गुफा तक पहुंचने के लिए दूसरे रास्तों की तलाश जारी है।
लगातार बारिश के कारण यह साफ हो गया है आने वाले दिन और चुनौतीपूर्ण होंगे ।राहत-बचावकर्मी गुफा से पंप के जरिए पानी निकालने का भी काम कर रहे हैं ताकि वहां जलस्तर नहीं बढ़े।
गुफा को लेकर मिथ
थाईलैंड में गुफा को लेकर कई तरह की मान्यताएं हैं। एक लोकप्रिय मान्यता उसके नाम को लेकर है। इस गुफा का 'नाम टैम लोंग- खुन नम नांग नोन' है। इसका मतलब हुआ पर्वत पर सो रही एक महिला की गुफा जो एक नदी का उद्गम स्थल है। कहानी यह है कि चियांग रूंग शहर की एक राजकुमारी एक घुड़सवार से गर्भवती हो गई थीं।
दोनों अपनी जिंदगी को लेकर डरे हुए थे, इसलिए दक्षिणी हिस्से में चले गए। दोनों जब वो पर्वतीय इलाके में पहुंचे तो पति ने राजकुमारी से कहा कि वो कुछ खाने के लिए लाने जा रहा और तब तक वो आराम कर लें। हालांकि इसी दौरान राजकुमारी के पिता ने उसके पति की हत्या दी। राजकुमारी ने अपने पति का कई दिनों तक इंतजार किया। जब उन्हें लगा कि अब वो नहीं आएगा तो राजकुमारी ने बालों में लगाने की पिन से खुदकुशी कर ली। राजकुमारी का खून पहाड़ से नीचे गिरा और उसी से एक नदी निकली।