रफाल निर्माण कंपनी ने राहुल गांधी के आरोपों पर सफाई दी, कहा- रिलायंस का सिर्फ 10 फीसदी शेयर है
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फ्रांस के तीन दिनों के दौरे में रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने रफाल निर्माण कपंनी दसो एविएशन का भी दौरा किया। उनके दौरे के बाद अब कंपनी के साईओ एरिक ट्रैपर का बयान आया है। जिसमें उन्होंने कांग्रेस के आरोपों पर सफाई देते हुए कहा है कि भारत के साथ 36 रफाल विमान सौदे के लिए उन्होंने 100 से ज्यादा भारतीय कंपनियों से बात की थी। इनमें से 30 कंपनियों के साथ साझेदारी की गई। रिलायंस कंपनी भी इन्हीं कंपनियों में से एक है। उसका शेयर महज 10 फीसदी है। साथ ही इस कंपनी को चुनने के लिए भारत सरकार की ओर से उनपर कोई दबाव नहीं बनाया गया था।
बता दें कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने आरोप लगाया था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस डील में अनिल अंबानी की कंपनी को 30 हजार करोड़ रुपये का लाभ पहुंचाया है। राहुल गांधी ने ये आरोप फ्रेंच मैग्जीन के उस दावे के बाद सामने आए जिसमें कहा गया था कि भारत सरकार ने सिर्फ रिलायंस का ही नाम भेजा था।
रक्षा मंत्री के फ्रांस दौरे पर भी राहुल गांधी ने सवाल उठाए थे, इस पर सफाई देते हुए रक्षा मंत्री ने कहा, 'दसो कंपनी ने फ्रांस आने के लिए आमंत्रित किया था, क्योंकि हम खरीदार हैं।' उन्होंने पेरिस में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में ये बात कही। उन्होंने आगे कहा कि दसो ने उन्हें रफाल की प्रोग्रेस देखने के लिए बुलाया था और सरकार को इस बारे में नहीं पता था कि फ्रांस की कंपनी ने अंबानी की कंपनी रिलायंस को चुना है। उन्होंने वहां फ्रांस की रक्षा मंत्री फ्लोरेंस से भी मुलाकात की।
सीतारमण ने कहा कि सरकार की ओर से ये बात स्पष्ट है कि उन्होंने 36 रफाल एयरक्राफ्ट का सौदा किया है। उन्होंने यह भी कहा कि यह दो सरकारों के बीच का सौदा है और इसमें किसी व्यक्ति की कंपनी का जिक्र नहीं है। इस मामले में भाजपा नेता और केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने भी कहा है कि कांग्रेस राफेल मामले पर झूठ फैला रही है। साथ ही उन्होंने कांग्रेस के कई झूठ भी गिनाए।
सीमापार आतंकवाद का मुद्दा उठाया
रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने सीमापार आतंकवाद का मुद्दा उठाते हुए पाकिस्तान को आड़े हाथ लिया। इंस्टीट्यूट ऑफ स्ट्रेटजिक रिसर्च के कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि पड़ोसी देश का आतंकियों को मदद देना और वहां आतंकी ढांचे की मौजूदगी लगातार भारत के धैर्य की परीक्षा ले रहे हैं। हम इससे निपटने को लेकर बड़े संयम से काम कर रहे हैं।
रक्षा मंत्री ने कहा कि विदेशी आतंकी संगठनों में युवाओं की भर्ती के साथ ही आतंकियों को हथियारों की आपूर्ति और वित्तीय मदद रोकने को लेकर कड़े कदम उठाए जाने की आवश्यकता है। अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के मौजूदा माहौल को निरंतर अस्थिरता और बढ़ती हिंसा के प्रयासों के साथ अनिश्चितता के तौर पर वर्णित किया जा सकता है। आतंकवाद की स्थायी खतरा भारत के साथ-साथ अफगानिस्तान में भी तेजी से बढ़ रहा है। ज्यादा स्पष्ट तौर पर कहें तो, यह सीमापार आतंकवाद का नतीजा है, जो सुरक्षा के लिए प्राथमिक खतरा है।
फ्रांस के साथ रक्षा सहयोग बढ़ाने पर जोर : ‘भारत-फ्रांस रक्षा सहयोग’ विषय पर व्याख्यान में रक्षा मंत्री ने कहा कि उनका दौरा यह पुष्टि करता है कि फ्रांस के साथ रणनीतिक साझेदारी भारत प्रतिबद्ध है, खासतौर से रक्षा सहयोग के क्षेत्र में। भारत में रक्षा उद्योग के नए ढांचे के तहत दोनों देश संयुक्त विनिर्माण और प्रौद्योगिकी संचालित साझेदारी के ढांचे के भीतर हमारी रक्षा आवश्यकताओं को पूरा करने की उम्मीद कर रहे हैं।