आईएस का खात्मा करने के लिए महिलाओं ने उठाए हथियार
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दुनिया के खूंखार आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (आईएस) का खात्मा करने के लिए अब महिलाओं ने हथियार उठा लिए हैं। महिलाओं की यह ब्रिगेड हर वक्त आईएस को धूल चटाने को बेताब रहती है। इस ब्रिगेड में वे महिलाएं शामिल हैं, जिनको दो साल पहले आईएस ने बंधक बनाकर सेक्स स्लेव की तरह इस्तेमाल किया। दरअसल, दो साल पहले आईएस ने इराक के सिनजार माउंटेन के आसपास रहने वाले अल्पसंख्यक यजीदी समुदाय के लोगों पर हमला कर दिया था। यजीदी समुदाय के पुरुषों का कत्लेआम कर दिया और उनके बच्चे एवं महिलाओं को बंधक बना लिया।
आईएस ने इन हजारों महिलाओं और बच्चों को सेक्स स्लेव की तरह इस्तेमाल किया। इसके बाद कुर्दिस्तान की पेशमर्गा ने बंधक महिलाओं को आईएस के चंगुल से निकालने में अहम भूमिका निभाई। इस कुर्दिश सेना में महिला गुरिल्ला भी शामिल रहीं।
सब कुछ गंवाने के बाद भी बचाई गई ये पीड़ित महिलाएं हिम्मत नहीं हारीं और गुरिल्ला महिलाओं का अनुसरण किया। फिर आगे चलकर अपनी ब्रिगेड तैयार करना शुरू कर दिया। इस ब्रिगेड का नाम ‘वुमेन्स प्रोटेक्शन यूनिट-शेंगल’ रखा है।
आईएस के चंगुल से निकलने को अपनाया जंगल का रास्ता
बंधक महिलाओं ने आतंकी संगठन से चंगुल से छूटकर वीरान जंगलों के रास्ते भागकर किसी तरह खुद को बचाया। आईएस के चंगुल से निकलने के लिए पहाड़ी और जंगली रास्तों को चुना।
इस बीच उनके पैर में न जूते थे और न ही पेट भरने के लिए खाना। इसके बाद बेहद कठिन हालात में जूझती रहीं। इसके बाद अंतरराष्ट्रीय मदद भी मिली, तो वह बेहद कम थी।
जिस इराकी कुर्दिस्तान की पेशमर्गा सेना ने सुरक्षा का वादा किया, उसने भी समय गुजरने के साथ इन महिलाओं को इन्हीं की हालत में छोड़ दिया। दुनिया की ओर से सुरक्षा और सम्मान नहीं मिलने पर इन महिलाओं ने खुद ही अपनी रक्षा का रास्ता खोज निकाला। अब इनको अपनी सुरक्षा की नहीं, बल्कि दूसरी महिलाओं की सुरक्षा की चिंता है।