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जन्मदिन विशेष : 'सद्दाम हुसैन ने अपने 26 लीटर खून से लिखवाई थी कुरान'
amarujala.com- Submitted by: आनंद
Updated Fri, 28 Apr 2017 02:44 PM IST
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सद्दाम हुसैन को बड़े-बड़े महल बनाने के अलावा बड़ी-बड़ी मस्जिदें बनवाने का भी शौक था। एक इसी तरह की मस्जिद उन्होंने मध्य बगदाद में बनवाई थी जिसे ' उम्म अल मारीक' नाम दिया गया था। इसको खास तौर से 2001 में सद्दाम हुसैन की सालगिरह के लिए बनवाया गया था।
खास बात ये थी कि इसकी मीनारें स्कड मिसाइल की शक्ल की थीं। ये वही मिसाइलें थीं जिन्हें सद्दाम हुसैन ने खाड़ी युद्ध के दौरान इसराइल पर दगवाया था। 'ऑपरेशन डेसर्ट स्टॉर्म' जो 43 दिनों तक चला था, की याद दिलाने के लिए इन मीनारों की ऊँचाई 43 मीटर रखी गई थी।
सद्दाम हुसैन की जीवनी लिखने वाले कॉन कफलिन लिखते हैं, "सद्दाम की बनवाई एक मस्जिद में सद्दाम के खून से लिखी गई एक कुरान रखी हुई है। उसके सभी 605 पन्नों को लोगों को दिखाने के लिए एक शीशे के केस में रखा गया है। मस्जिद के मौलवी का कहना है कि इसके लिए सद्दाम ने सीन सालों तक अपना 26 लीटर खून दिया था।"
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खास बात ये थी कि इसकी मीनारें स्कड मिसाइल की शक्ल की थीं। ये वही मिसाइलें थीं जिन्हें सद्दाम हुसैन ने खाड़ी युद्ध के दौरान इसराइल पर दगवाया था। 'ऑपरेशन डेसर्ट स्टॉर्म' जो 43 दिनों तक चला था, की याद दिलाने के लिए इन मीनारों की ऊँचाई 43 मीटर रखी गई थी।
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सद्दाम हुसैन की जीवनी लिखने वाले कॉन कफलिन लिखते हैं, "सद्दाम की बनवाई एक मस्जिद में सद्दाम के खून से लिखी गई एक कुरान रखी हुई है। उसके सभी 605 पन्नों को लोगों को दिखाने के लिए एक शीशे के केस में रखा गया है। मस्जिद के मौलवी का कहना है कि इसके लिए सद्दाम ने सीन सालों तक अपना 26 लीटर खून दिया था।"
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सद्दाम को स्लिप डिस्क की बीमारी थी
सद्दाम पर एक और किताब, 'सद्दाम हुसैन, द पॉलिटिक्स ऑफ रेवें' लिखने वाले सैद अबूरिश का मानना है कि सद्दाम की बड़ी-बड़ी इमारतें और मस्जिदें बनाने की वजह तिकरित में बिताया उनका बचपन था, जहाँ उनके परिवार के लिए उनके लिए एक जूता तक खरीदने के लिए भी पैसे नहीं होते थे।
दिलचस्प बात ये है कि सद्दाम अपने जिस भी महल में सोते थे, उन्हें सिर्फ कुछ घंटों की ही नींद लेनी होती थी। वो अक्सर सुबह तीन बजे तैरने के लिए उठ जाया करते थे। इराक जैसे रेगिस्तानी मुल्क में पहले पानी धन और ताकत का प्रतीक हुआ करता था और आज भी है। इसलिए सद्दाम के हर महल में फव्वारों और स्वीमिंग पूल की भरमार रहती थी।
कफलिन लिखते हैं कि सद्दाम को स्लिप डिस्क की बीमारी थी। उनके डाक्टरों ने उन्हें सलाह दी थी कि इसका सबसे अच्छा इलाज है कि वो खूब चहलकदमी और तैराकी करें। सद्दाम हुसैन के सारे स्वीमिंग पूलों की बहुत बारीकी से देखभाल की जाती थी। उनका तापमान नियंत्रित किया जाता था और ये भी सुनिश्चित किया जाता था कि पानी में जहर तो नहीं मिला दिया गया है।
दिलचस्प बात ये है कि सद्दाम अपने जिस भी महल में सोते थे, उन्हें सिर्फ कुछ घंटों की ही नींद लेनी होती थी। वो अक्सर सुबह तीन बजे तैरने के लिए उठ जाया करते थे। इराक जैसे रेगिस्तानी मुल्क में पहले पानी धन और ताकत का प्रतीक हुआ करता था और आज भी है। इसलिए सद्दाम के हर महल में फव्वारों और स्वीमिंग पूल की भरमार रहती थी।
कफलिन लिखते हैं कि सद्दाम को स्लिप डिस्क की बीमारी थी। उनके डाक्टरों ने उन्हें सलाह दी थी कि इसका सबसे अच्छा इलाज है कि वो खूब चहलकदमी और तैराकी करें। सद्दाम हुसैन के सारे स्वीमिंग पूलों की बहुत बारीकी से देखभाल की जाती थी। उनका तापमान नियंत्रित किया जाता था और ये भी सुनिश्चित किया जाता था कि पानी में जहर तो नहीं मिला दिया गया है।
सद्दाम के महलों की संख्या 20 के करीब थी
Saddam Hussein
सद्दाम पर एक और किताब लिखने वाले अमाजिया बरम लिखते हैं, "ये देखते हुए कि सद्दाम के शासन के कई दुश्मनों को थेलियम के जहर से मारा गया था, सद्दाम को अंदर ही अंदर इस बात का डर सताता था कि कहीं उन्हें भी कोई जहर दे कर न मार दे। हफ्ते में दो बार उनके बगदाद के महल में ताजी मछली, केकड़े, झींगे और बकरे और मुर्गे के गोश्त की खेप भिजवाई जाती थी।"
वो आगे लिखते हैं, "राष्ट्पति के महल में जाने से पहले परमाणु वैज्ञानिक उनका परीक्षण कर इस बात की जाँच करते थे कि कहीं इनमें रेडियेशन या जहर तो नहीं है।'' किताब में लिखा है, ''सद्दाम के महलों की संख्या 20 के करीब थी। उनमें कर्मचारी हर समय मौजूद रहते थे और सभी महलों में तीन वक्त का खाना बना करता था, चाहे उनमें सद्दाम रह रहे हों या नहीं।"
सद्दाम की कमजोरी थी कि वो हमेशा बहुत अच्छा दिखना चाहते थे। इसलिए बाद में उन्होंने परंपरागत जैतूनी रंग की सैनिक वर्दी पहनना छोड़ कर सूट पहनना शुरू कर दिया था। ऐसा उन्होंने तत्कालीन संयुक्त राष्ट्र महासचिव कोफी अन्नान की सलाह पर किया था जिनका मानना था कि सूट पहनने से विश्व नेता के रूप में उनकी छवि बेहतर होगी।
वो आगे लिखते हैं, "राष्ट्पति के महल में जाने से पहले परमाणु वैज्ञानिक उनका परीक्षण कर इस बात की जाँच करते थे कि कहीं इनमें रेडियेशन या जहर तो नहीं है।'' किताब में लिखा है, ''सद्दाम के महलों की संख्या 20 के करीब थी। उनमें कर्मचारी हर समय मौजूद रहते थे और सभी महलों में तीन वक्त का खाना बना करता था, चाहे उनमें सद्दाम रह रहे हों या नहीं।"
सद्दाम की कमजोरी थी कि वो हमेशा बहुत अच्छा दिखना चाहते थे। इसलिए बाद में उन्होंने परंपरागत जैतूनी रंग की सैनिक वर्दी पहनना छोड़ कर सूट पहनना शुरू कर दिया था। ऐसा उन्होंने तत्कालीन संयुक्त राष्ट्र महासचिव कोफी अन्नान की सलाह पर किया था जिनका मानना था कि सूट पहनने से विश्व नेता के रूप में उनकी छवि बेहतर होगी।
'द डे ऑफ द जैकाल' उनकी पसंदीदा फिल्म थी
Saddam Hussein
सद्दाम हमेशा अपने बालों में खिजाब लगाते थे और लोगों के सामने पढ़ने वाला चश्मा लगा कर कभी सामने नहीं आते थे। जब वो भाषण देते थे तो उनके सामने कागज पर बड़े बड़े शब्द लिखे होते थे- एक पन्ने पर सिर्फ दो या तीन लाइनें। सद्दाम इस बाद का भी ख्याल रखते थे कि चलते समय कुछ कदमों से ज्यादा उनकी फिल्म न उतारी जाए। कॉन कफलिन लिखते हैं कि 'सद्दाम दिन में कई बार छोटी छोटी झपकियाँ ले लिया करते थे।
कई बार तो ऐसा होता था कि वो बीच बैठक से उठ कर बगल वाले कमरे में चले जाते थे और एक छोटी नींद ले कर आधे घंटे बाद तरोताजा निकलते थे।' सद्दाम को टेलीविजन देखने का भी शौक था और वो ज्यादातर सीएनएन, बीबीसी और अलजजीरा देखा करते थे। उन्हें रोमांचक अंग्रेजी थ्रिलर्स देखने का भी शौक था और अंग्रेजी फिल्म 'द डे ऑफ द जैकाल' उनकी पसंदीदा फिल्म थी।
सन 2002 का शुरुआत में सद्दाम ने कैबिनेट बैठक के दौरान अपने एक मंत्री को अपनी घड़ी देखते हुए देख लिया। जब बैठक समाप्त हो गई तो उन्होंने उस मंत्री को रुकने के लिए कहा। उन्होंने उनसे पूछा, 'क्या आपको बहुत जल्दी है?' जब उस मंत्री ने कहा कि ऐसी बात नहीं है तो सद्दाम ने उन्हें डांटते हुए कहा कि ऐसा कर आपने मेरा अपमान किया है।
कफलिन लिखते हैं, "सद्दाम ने आदेश दिया कि उन मंत्री को उसी कमरे में दो दिनों तक कैद रखा जाए। वो मंत्री बैठक कक्ष में दो दिनों तक कैद रहा और उसे लगता रहा कि उसे कभी भी बाहर ले जाकर गोली मारी जा सकती है।
कई बार तो ऐसा होता था कि वो बीच बैठक से उठ कर बगल वाले कमरे में चले जाते थे और एक छोटी नींद ले कर आधे घंटे बाद तरोताजा निकलते थे।' सद्दाम को टेलीविजन देखने का भी शौक था और वो ज्यादातर सीएनएन, बीबीसी और अलजजीरा देखा करते थे। उन्हें रोमांचक अंग्रेजी थ्रिलर्स देखने का भी शौक था और अंग्रेजी फिल्म 'द डे ऑफ द जैकाल' उनकी पसंदीदा फिल्म थी।
सन 2002 का शुरुआत में सद्दाम ने कैबिनेट बैठक के दौरान अपने एक मंत्री को अपनी घड़ी देखते हुए देख लिया। जब बैठक समाप्त हो गई तो उन्होंने उस मंत्री को रुकने के लिए कहा। उन्होंने उनसे पूछा, 'क्या आपको बहुत जल्दी है?' जब उस मंत्री ने कहा कि ऐसी बात नहीं है तो सद्दाम ने उन्हें डांटते हुए कहा कि ऐसा कर आपने मेरा अपमान किया है।
कफलिन लिखते हैं, "सद्दाम ने आदेश दिया कि उन मंत्री को उसी कमरे में दो दिनों तक कैद रखा जाए। वो मंत्री बैठक कक्ष में दो दिनों तक कैद रहा और उसे लगता रहा कि उसे कभी भी बाहर ले जाकर गोली मारी जा सकती है।
1988 के आसपास सद्दाम को बहुत बड़े पारिवारिक संकट से गुजरना पड़ा
आखिर में सद्दाम ने उनके प्राण तो बख्श दिए लेकिन उन्हें अपने पद से हाथ धोना पड़ा।" सद्दाम के लिए उनके विरोधियों से ज्यादा उनका खुद का परिवार परेशानी का कारण था और उसमें बहुत बड़ी भूमिका थी उनकी अपनी पत्नी साजिदा के प्रति बेवफाई की। 1988 के आसपास सद्दाम को बहुत बड़े पारिवारिक संकट से गुजरना पड़ा जब उनके इराकी एयरवेज के महानिदेशक की पत्नी समीरा शाहबंदर से संबंध हो गए।
समीरा लंबी थी, हसीन थीं और उनके सुनहरे रंग के बाल भी थे और सबसे बड़ी बात ये थी कि वो शादीशुदा थीं। सैद अबूरिश लिखते हैं, "कई सालों तक राष्ट्रपति महल में काम करने वाले एक अधिकारी ने मुझे बताया था कि सद्दाम को शादीशुदा औरतों से संबंध बनाना खासतौर से पसंद था। ये उनके पतियों को जलील करने का उनका अपना तरीका हुआ करता था।" सद्दाम की इस तरह की रंगरेलियों का इंतेजाम उनका अंगरक्षक कामेल हना जेनजेन किया करता था।
जेनजेन बीस सालों तक सद्दाम का निजी अंगरक्षक था। दिलचस्प बात ये थी कि जेनजेन सद्दाम के रसोइए का बेटा था। उसके बहुत सारे कामों में एक काम सद्दाम को दिए जाने वाले भोजन को खा कर देखना भी था कि उसमें कहीं जहर तो नहीं मिलाया गया था। सद्दाम का मानना था कि उनका रसोइया उनके खाने में इसलिए कभी जहर नहीं मिलाएगा क्योंकि उसके खुद के बेटे को उसे पहले चखना होता था।
समीरा लंबी थी, हसीन थीं और उनके सुनहरे रंग के बाल भी थे और सबसे बड़ी बात ये थी कि वो शादीशुदा थीं। सैद अबूरिश लिखते हैं, "कई सालों तक राष्ट्रपति महल में काम करने वाले एक अधिकारी ने मुझे बताया था कि सद्दाम को शादीशुदा औरतों से संबंध बनाना खासतौर से पसंद था। ये उनके पतियों को जलील करने का उनका अपना तरीका हुआ करता था।" सद्दाम की इस तरह की रंगरेलियों का इंतेजाम उनका अंगरक्षक कामेल हना जेनजेन किया करता था।
जेनजेन बीस सालों तक सद्दाम का निजी अंगरक्षक था। दिलचस्प बात ये थी कि जेनजेन सद्दाम के रसोइए का बेटा था। उसके बहुत सारे कामों में एक काम सद्दाम को दिए जाने वाले भोजन को खा कर देखना भी था कि उसमें कहीं जहर तो नहीं मिलाया गया था। सद्दाम का मानना था कि उनका रसोइया उनके खाने में इसलिए कभी जहर नहीं मिलाएगा क्योंकि उसके खुद के बेटे को उसे पहले चखना होता था।