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तुर्की: सड़कों पर फिर उतरे प्रदर्शनकारी

Mon, 03 Jun 2013 07:52 AM IST
Updated Mon, 03 Jun 2013 07:52 AM IST
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protest in turkey

तुर्की में तकसीम चौक के पुनर्विकास का विरोध कर रहे प्रदर्शनकारी सैकड़ों की संख्या में एक बार फिर इस्तांबुल और अंकारा की सड़कों पर उतर आए हैं।

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पिछले दो दिनों में वहां 1700 लोगों की गिरफ़्तारी हो चुकी है।

तुर्की के प्रधानमंत्री रिजेप तैयप एर्दोगन ने प्रदर्शनकारियों के इस विरोध की निंदा करते हुए इसे अलोकतांत्रिक क़दम क़रार दिया है।

एर्दोगन ने सरकार के निरंकुश और इस्लामी होने की आलोचना को भी ख़ारिज कर दिया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि उनके नेतृत्व में देश की आर्थिक हालत में सुधार आया है।
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उन्होंने प्रदर्शनकारियों पर आरोप लगाते हुए कहा कि वे लोकतंत्र को कमज़ोर कर रहे हैं।

सरकार का विरोध

सैकड़ों की संख्या में इस्तांबुल के तकसीम चौक पर जमा हुए इन लोगों ने शांतिपूर्ण तरीक़े से झंडे़ लहराएं लेकिन ख़बरों के अनुसार पुलिस ने अंकारा में किज़िले चौक पर प्रदर्शन कर रहे लोगों पर आंसु गैस का इस्तेमाल किया।
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तकसीम चौक के नज़दीक एक पार्क के पुनर्विकास को लेकर लोगों ने विरोध प्रदर्शन शुरु किया था लेकिन फिर ये सरकार विरोधी आंदोलन में बदल गया।

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि सरकार से कई लोग तंग आ चुके है। इन लोगों का मानना है कि सरकार दिन ब दिन निरंकुश बनती जा रही है और वो आधिकारिक तौर पर एक धर्मनिरपेक्ष देश पर कट्टरवादी इस्लामी मुल्य थोंपना चाहती है।

पिछले हफ़्ते सरकार ने जल्दबाज़ी में शराब की ब्रिकी और विज्ञापन पर रोक लगाने संबंधी एक विधेयक पारित किया था। विश्लेषकों का कहना है कि सरकार के इस क़दम ने धर्मनिरपेक्ष ताक़तों की चिंताएं बढ़ा दी हैं।

एर्दोगन ने इस विवादास्पद विधेयक के बचाव में पीने वाले लोगों को 'शराबी' कहा था जिससे लोगों ने अपमानित महसूस किया था।

प्रधानमंत्री ने अपने विपक्षियों पर आरोप लगाया है कि वे पार्क के मुद्दे पर लोगों के ग़ुस्से का इस्तेमाल तनाव बढ़ाने के लिए कर रहे हैं।

रविवार की सुबह इस्तांबुल की सड़कों पर हिंसा की कुछ छिट पुट घटनाएं हुईं थीं लेकिन दोपहर के समय तक माहौल शांत हो गया था और हज़ारों प्रदर्शनकारी लोगों से शांति बनाए रखने की अपील कर रहे थे।

'लोग तंग आ चुके हैं'

यहां तक की वहां तैनात पुलिस बल की संख्या भी कोई ख़ास ज़्यादा नहीं थी।

अकिन नाम के एक प्रदर्शनकारी का कहना था, ''हमलोग यहां से नहीं हटेंगे और आख़िर तक एक जुट होकर रहेंगे। अब इस सरकार को जाना ही होगा। इस दमनकारी सरकार से हमलोग तंग आ चुके हैं जो कि लगातार हमलोगों को दबाने पर लगी है।''


रविवार को राजधानी अंकारा के किज़िले चौक पर भी एक हज़ार से ज़्यादा लोग जमा हुए थे जिन्हें तितर-बितर करने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े थे और पानी की बौछारें करनी पड़ी थीं।

रविवार को ही राष्ट्रीय टेलीविज़न पर एक साक्षात्कार के दौरान एर्दोगन ने कहा कि ताज़ा विरोध प्रदर्शन विपक्षी रिपब्लिकन पीपुल्स पार्टी के उकसाने पर किए जा रहे हैं और इसमें हिस्सा लेने वाले लोग दर असल प्रजातंत्र की जड़ों को कमज़ोर कर रहे हैं।

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