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मिस्र: मुर्सी की हिरासत जारी रखने की तैयारी
बीबीसी
Updated Sat, 27 Jul 2013 08:37 AM IST
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मिस्र के अधिकारियों ने अपदस्थ राष्ट्रपति मोहम्मद मुर्सी की नजरबंदी जारी रखने का आदेश दिया है। यह फैसला तकनीकी रूप से विश्वासघात के अपराघ के आधार पर किया गया है। देश अभी भी उनके समर्थक और विरोधी गुटों के प्रदर्शनों से जूझ रहा है।
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मुर्सी पर 2011 में होस्नी मुबारक के खिलाफ बगावत के दौरान फिलीस्तीनी इस्लामिक आंदोलन हमास के साथ मिलकर जेलों पर हमला करने और लोगों को आज़ाद कराने का आरोप है।
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इस महीने की शुरुआत में अपदस्थ किए जाने के बाद से मोहम्मद मुर्सी को सार्वजनिक रूप से नहीं देखा गया है।
दोनों पक्षों के बीच शक्ति प्रदर्शन की जोर आज़माइश के मद्देनज़र राजधानी काहिरा को सैनिकों, टैंक और हथियारबंद वाहनों ने घेरकर रखा है।
सेना की चेतावनी
इस बीच मिस्र की सेना ने शुक्रवार को होने वाली रैली के दौरान हिंसा की स्थिति में बल प्रयोग की चेतावनी दी है।
सेना प्रमुख जनरल अब्दुल फतन अल-सीसी लोगों से अपील की है कि वे सड़कों से हट जाएं। मोहम्मद मुर्सी के समर्थक भी प्रदर्शन के लिए डटे हुए हैं।
अभियोजन पक्ष का आरोप है कि उन्हें फिलिस्तीनी चरमपंथी समूह हमास के साथ कथित संबंधों के चलते हिरासत में लिया गया है।
सरकारी समाचार एजेंसी मीना ने बताया है कि 2001 में पुलिस स्टेशनों और जेलों पर हमले के लिए हमास के साथ संबंधों के आरोप पर मुर्सी से पूछताछ की जा रही है। उन पर लगे आरोपों में एक जेल को आग लगाना, कैदियों को भगाने में मदद करना और पूर्वनियोजित योजना के मुताबिक अधिकारियों, सैनिकों और कैदियों की हत्या शामिल है।
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मुर्सी की मुस्लिम ब्रदरहुड ने कहा है कि जेल को तोड़ने का काम स्थानीय निवासियों ने किया था न कि विदेशियों ने।
जारी रहेगी हिरासत
मिस्र में लोकतांत्रिक ढंग से चुने गए पहले नेता मुर्सी के खिलाफ विशाल विरोध प्रदर्शन के बाद सेना ने उन्हें नजरबंद कर लिया था। तब से सेना ने उन्हें किसी अज्ञात स्थान पर रखा हुआ है।
मीना ने शुक्रवार को उन पर आरोपों की घोषणा करते हुए बताया कि शुरुआत में 15 दिन की न्यायिक हिरासक का आदेश दिया गया था।
काहिरा में बीबीसी के जिम म्यूर ने बताया कि यह बयान मुर्सी की हिरासत को जारी रखने के लिए कानूनी आधार मुहैया कराता है, जबकि संयुक्त राष्ट्र और पश्चिमी ताकतों ने नजरबंद राष्ट्रपति को रिहा करने या उन पर सही आरोप लगाने की अपील की है।