दुनिया में कम हो रही है गरीबों की आबादी, जानिए कैसे?
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विश्व बैंक ने कहा है कि 2015 के अंत तक दुनिया में अति गरीबों की आबादी घटकर 10 फीसद से भी कम रह जाएगी। विश्व बैंक ने अति गरीबी मापने के नए पैमाने के आधार पर यह संभावना जताई है। पहले प्रतिदिन 1.25 डॉलर (लगभग 75 रुपए) से कम कमाने वालों को अति गरीब माना जाता था। अब इस पैमाने को बदलकर 1.90 डॉलर प्रतिदिन कर दिया गया है।
विश्व बैंक ने अनुमान लगाया है कि 2012 में दुनिया में अति गरीबों की आबादी 12.8 फीसद थी, वह 2015 के अंत तक घटकर 9.6 फीसद रह जाएगी। रिपोर्ट में कहा गया है कि सब सहारा अफ्रीका में गरीबों की बढ़ती आबादी अभी भी बड़ी चिंता का विषय है।
विकासशील देशों को योगदान
रिपोर्ट में कहा गया है कि सब सहारा अफ्रीका में 2012 में अति गरीबों की आबादी 42.6 फीसद थी, जो 2015 के अंत तक घटकर 35.2 फीसद रह जाएगी। यह पूरी दुनिया में गरीबों की संख्या का आधा है। विश्व बैंक के अध्यक्ष जिम योंग किम ने कहा, ''हम मानव इतिहास की पहली पीढ़ी हैं, जो कि अति गरीबी को ख़त्म कर सकते हैं।''
बैंक का कहना है कि विकासशील देशों की मजबूत विकास दर और शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा पर किए गए निवेश की वजह से आंकड़ों में गिरावट आई है। जिम योंग किम ने चिंता जताते हुए कहा है कि आर्थिक मंदी, शेयर बाजार में उथल-पुथल, बेरोजगारी और जलवायु परिर्वतन का बुरा असर गरीबी में सुधार पर पड़ सकता है।