भारत में भी जल्द महंगा होगा पेट्रोल-डीजल, जानिए क्यों?
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सउदी अरब और बहरीन ने डीजल, केरोसिन और पेट्रोल के दामों में बढ़ोतरी करने का फैसला किया है। सउदी अरब पेट्रोल के दामों में 50 फीसदी तक बढ़ोतरी करेगा, जो मंगलवार से लागू भी हो जाएगा। सउदी का इस साल का बजट घाटा 98 अरब डॉलर तक जा पहुंचा है। वहीं बहरीन का फैसला अगले महीने से लागू होगा।
खाड़ी देशों के कई और तेल उत्पादक देश तेल की कीमतों में बढ़ोतरी करने पर विचार कर रहे हैं। इसका सीधा असर भारत जैसे तेल आयातक देश पर भी पड़ेगा।। भारत इन दो प्रमुख देशों से सबसे ज्यादा कच्चे तेल का आयात करता है।
अप्रैल से अगस्त, 2015 के आंकड़ो के मुताबिक अभी भारत सबसे ज्यादा ईरान से कच्चे तेल का आयात कर रहा है। वहीं उसके बाद नंबर आता है सउदी अरब का। रॉयटर्स की खबर के मुताबिक सितंबर माह में सउदी अरब से भारत प्रतिदिन 6,40,300 बैरल कच्चे तेल का आयात करता है। एक बैरल में 159 लीटर कच्चा तेल आता है।
इतनी बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का आयात करने में भारत को भी आने वाले समय में प्रतिदिन बढ़ी हुई कीमत के हिसाब से ही भुगतान करना पड़ेगा। इसका अप्रत्यक्ष असर भारत के लोगों पर ही पड़ेगा।
भारत ने कच्चे तेल का आयात 30 फीसदी तक घटाया
थॉमसन रॉयटर्स ऑयल विश्लेषक के मुताबिक सउदी अरब से भारत ने कच्चे तेल का आयात 30 फीसदी तक घटाया है। फिर भी अभी दूसरा सबसे बड़ा कच्चे तेल का निर्यातक देश होने के चलते भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर फर्क पड़ सकता है।
29 दिसंबर, 2015 तक कच्चे तेल की कीमत अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर करीब 36.81 डॉलर है। सउदी अरब की तरफ से 50 फीसदी तक की बढ़ोतरी के बाद अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में अचानक ही बढ़ोतरी हो सकती है। इसका असर भारत में भी पड़ सकता है।
सरकारी मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, ये दोनों खाड़ी देश अपने यहां तेल पर सब्सिडी में कटौती करेंगे। सउदी अरब ने तेल के दामों में बढ़ोतरी का यह फैसला अपने पेट्रोलियम उत्पादों, बिजली और पानी में दी जा रही सब्सिडी में कटौती करने के बाद लिया है।