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पैसे देकर पिंजरे में रहते हैं इस शहर के लोग

Mon, 12 Mar 2018 02:20 PM IST
बीबीसी, हिन्दी
बीबीसी, हिन्दी Updated Mon, 12 Mar 2018 02:20 PM IST
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People living in the cage by paying the money

ऐसे पिंजरे की कल्पना कीजिए जो जिसकी लंबाई दो मीटर और ऊंचाई एक मीटर से कुछ ही अधिक है। सोचिए कि इस पिंजरे में ऐसे ही तीन खाने हैं और अब सोचिए कि यही आपकी रिहाइश है। हॉन्ग कॉन्ग में सस्ते मकानों की भारी कमी के कारण यहां रहने वाले कई लोगों के लिए यह एक सच्चाई बन चुकी है। दरअसल साल 2017 में ऐसे पिंजरेनुमा घरों में रहने वालों की संख्या अपने आप में एक रिकॉर्ड था।

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डेमोग्राफिया नाम की एक कंसल्टेंसी कंपनी का कहना है कि लगातार आठवें साल हॉन्ग कॉन्ग में रहने के लिए दुनिया की सबसे महंगी जगहों की सूची में सबसे ऊपर है। लेकिन अगर आपको लगता है कि इस पिंजरेनुमा घर में रहने की कीमत कुछ भी नहीं देनी पड़ती होगी तो आप गलत हैं। इन नन्हे नैनो घरों का किराया साल में 500 अमेरिकी डॉलर यानी 32 हजार के आस-पास है।
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नए उपाय तलाशने की कोशिश
'नैनोहोग्रेस' कहे जाने वाले इन छोटे घरों के कई प्रकार हैं। कई मजबूत और बढ़िया हैं लेकिन ये बात सच है कि इसमें रहने लायक जगह काफी कम होती है। तेजी से बढ़ती आबादी के लिए घर की व्यवस्था पर शोध करने वाले गोलाकार पाइपों का इस्तेमाल घर बनाने के लिए कर रहे हैं। पाइप के भीतर बनाए जाने वाले इन छोटे घरों को सस्ता और मज़बूत बनाने की कोशिशें हो रही हैं।
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इन्हें ओपॉड कहा जाता है। ओपॉड का एक नमूना बनाने वाले जेम्स लॉ कहते हैं, "हम कम खर्च करके घर में एक बाथरूम, किचन और फर्नीचर लगा सकते हैं।" हालांकि इस तरह के घरों को महंगे मकानों और लोगों के आवास की दिक्कतों का स्थायी समाधान नहीं माना जा रहा। घरों की समस्या केवल हॉन्ग कॉन्ग तक ही सीमित नहीं है। जापान, ऑस्ट्रेलिया, सिंगापुर, ब्रिटेन और न्यूज़ीलैंड में भी मकानों की कीमतें काफी ज़्यादा हैं और वे अधिकतर लोगों की पहुंच से दूर हैं।

कई लोगों के लिए विदेशी लोगों का उनके देश में ज़्यादा संपत्ति खरीदना भी एक समस्या है, जिससे मकानों के दाम बढ़ते हैं और संपत्ति का बाज़ार बिगड़ जाता है। साथ ही स्थानीय लोगों के लिए मकान खरीदना आसान नहीं रह जाता।

इस समस्या से निपटने के लिए न्यूजीलैंड एक ऐसे विधेयक पर काम कर रहा है जिसके तहत विदेशियों के देश में संपत्ति खरीदने पर रोक लगाई जा सके। यहां के प्रधानमंत्री जाकिंदा आर्डर्न के अनुसार इस कारण देश के वे युवा जो अपना पहला घर खरीदना चाहते हैं उन्हें दिक्कत हो रही है।

25 साल पहले न्यूज़ीलैंड की 75 फीसदी जनता के पास अपना खुद का घर था। लेकिन मौजूदा स्थिति में देश के मात्र 64 फीसद लोगों के पास अपना घर है।

लोगों की पहुंच से दूर हैं घर
लंदन एक और ऐसा शहर है जहां एक दशक के भीतर संपत्ति के दाम दोगुना तक बढ़ गए हैं। कई जगहों पर लोगों को गराज में ही अपना घर बनाना पड़ रहा है और कुछ लोग छोटे घरों में रहते हैं या फिर दूसरों के साथ घर शेयर करते हैं।


ब्रिटेन में संपत्ति के कारोबार में लगे हेनरी प्रायर कहते हैं, "कई लोगों को लगता है कि ऐसा विदेशी निवेशकों के कारण हुआ है, लेकिन मेरी राय मानें तो असल में ऐसा नहीं है।" प्रायर कहते हैं, "संपत्ति खरीदने के मामलों में सप्लाई और डिमांड का सिद्धांतों काम नहीं करता बल्कि ये लोन लेने की क्षमता और लोन की सुविधाओं तक पहुंच पर भी निर्भर करता है।"

अधिकतर शहरों में रहने के लिए सस्ते मकानों की कमी है लेकिन हॉन्ग कॉन्ग जैसी स्थिति फिलहाल उन शहरों में नहीं है।

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