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इसराइल फलस्तीन शांतिवार्ता से पहले अशांति

Mon, 12 Aug 2013 08:08 AM IST
Updated Mon, 12 Aug 2013 08:08 AM IST
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jewish settlement homes in israel

इसराइल की सरकार ने फ़लस्तीनी नियंत्रण वाले इलाके की यहूदी बस्तियों में करीब 1200 नए घरों के निर्माण को मंजूरी दे दी है।

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निर्माण मंत्री उरी एरियल का कहना है कि ये घर पश्चिमी किनारे और पूर्वी येरुशलम के इलाके में बनाए जाएंगे जिससे कि इसराइली नागरिकों की जरूरतें पूरी हो सकें।

इसराइल ने ये फैसला उस समय किया है जबकि तीन दिन बाद ही फ़लस्तीन के साथ येरुशलम में शांति वार्ता होने वाली है।

बस्तियों के निर्माण के मुद्दे पर ही दोनों देशों के बीच सितंबर 2010 में सीधी बातचीत टूट गई थी।

फ़लस्तीनियों को बातचीत को तैयार करने के लिए इसराइल ने सौ से ज्यादा फ़लस्तीनी कैदियों की रिहाई को मंज़ूरी दे दी है। इन कैदियों में से कुछ को 13 अगस्त को रिहा किया जाना है।
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यरुशलम में मौजूद बीबीसी संवाददाता केविन कोनोली का कहना है कि ऐन बातचीत के मौके पर बस्तियों के निर्माण की घोषणा सरकार का समर्थन कर रहे दक्षिणपंथी सदस्यों को खुश करने की कोशिश हो सकती है जो कि फ़लस्तीनी कैदियों की रिहाई का विरोध कर रहे थे।
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साल 1967 में इसराइल ने पश्चिमी किनारे और पूर्वी यरुशलम पर कब्जा किया था और उसके बाद से वहां 100 से भी ज्यादा बस्तियों का निर्माण हो चुका है जिनमें करीब पांच लाख यहूदी रहते हैं।

विवाद की वजह

गज़ा पट्टी समेत इन इलाकों में फ़लस्तीनी खुद बसना चाहते हैं।

इसराइल के निर्माण मंत्री एरियल के मुताबिक पूर्वी यरुशलम में 793 और पश्चिमी किनारे पर 394 अपार्टमेंट्स बनाए जाएंगे।

इसराइल के आवास मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने बीबीसी को बताया कि घरों का निर्माण एक या दो साल में शुरू किया जाएगा और जल्द ही उनके लिए टेंडर मँगाए जाएंगे।

एरियल ने एक बयान में कहा, “दुनिया में कोई ऐसा देश नहीं है जो किसी दूसरे देश से ये अनुमति ले कि उसे कहां घर बनाना चाहिए और कहां नहीं।”

फ़लस्तीन के राष्ट्रपति महमूद अब्बास ने इससे पहले कहा था कि जब तक इसराइल बस्तियों के निर्माण को नहीं रोकता, तब तक बातचीत दोबारा नहीं शुरू होगी, लेकिन अमेरिकी विदेश मंत्री जॉन केरी की मध्यस्थता के बाद वो थोड़ा नरम पड़ गए थे।

अंतरराष्ट्रीय कानून के मुताबिक बस्तियों का निर्माण ग़ैर क़ानूनी है, भले ही इसराइल इसे लेकर विवाद करता है।

फलस्तीनी प्रतिनिधियों ने इसराइल पर आरोप लगाया है कि वो शांति प्रक्रिया को बाधा पहुंचाना चाहता है। लेकिन इसराइल सरकार के एक प्रवक्ता मार्क रेगेव ने बीबीसी से बातचीत में इन आरोपों को खारिज किया।

उन्होंने कहा, "हम लोग उन्हीं इलाकों में निर्माण कर रहे हैं जो कि इसराइली सीमा के भीतर हैं। हम यरुशलम के आस-पास रह रहे यहूदियों की बात कर रहे हैं। जैसा कि मैंने कहा कि हर शांति योजना में ये लोग इसराइल का ही हिस्सा होते हैं। फिर इसमें समस्या क्या है?"


वहीं पीएलओ की कार्यकारी परिषद की सदस्य हनान अशरावी ने इसराइल की इस घोषणा की निंदा की है।

बीबीसी के साथ बातचीत में उन्होंने कहा, “हमें लगता है कि इसराइल जानबूझकर अमेरिका और बाकी दुनिया को ये संदेश देना चाहता है कि किसी भी तरह की वार्ता की कोशिश का कोई मतलब नहीं है। वो ये बताना चाहता है कि हम और अधिक ज़मीन हथियाने जा रहे हैं, और बस्तियां बनाने जा रहे हैं और दो राष्ट्र संबंधी समझौते को खारिज कर रहे हैं।”

उनका कहना था कि ये एक खतरनाक राजनीति और यदि इस पर लगाम नहीं लगाया गया तो इसके भयंकर परिणाम हो सकते हैं।

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