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भारत-बांग्लादेश के बीच प्रत्यपर्ण संधि

बीबीसी हिंदी Updated Tue, 29 Jan 2013 01:31 AM IST
india and bangladesh sign extradition treaty
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भारत और बांग्लादेश ने सोमवार को प्रत्यर्पण संधि पर हस्ताक्षर कर दिए जिससे उल्फ़ा के तथाकथित महासचिव अनूप चेटिया और अन्य वांछित अपराधियों को भारत लाना आसान हो जाएगा। भारतीय गृहमंत्री सुशीलकुमार शिंदे और बांग्लादेश के गृहमंत्री मोहिउद्दीन खान आलमगीर ने ढाका में द्विपक्षीय वार्ता के अंत में एक संशोधित वीज़ा समझौते पर भी हस्ताक्षर किए जिसके अंतर्गत वीज़ा प्रणाली में कई वर्गों में छूट दी गई है।
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सुशीलकुमार शिंदे ने एक संयुक्त पत्रकार सम्मेलन को बताया, 'इन समझौतों से दोंनो देशों के बीच सुरक्षा के क्षेत्र में रिश्तों में सुधार होगा और लोगों के बीच संपर्क बढ़ेगा।'


शिंदे ने ये भी कहा, 'हम इस संधि के लिए शुक्रगुज़ार हैं क्योंकि इससे हमें भारतीय चरमपंथी गुटों से निपटने में मदद मिलेगी। दोंनो पक्षों ने ऐसे तत्वों के खिलाफ़ कार्रवाई करने पर प्रतिबद्धता जताई है जिससे दोंनो देशों को नुक्सान हो।'

प्रत्यर्पण की राह आसान
भारत लंबे समय से अलगाववादी संगठन उल्फ़ा के नेता अनूप चेटिया के प्रत्यर्पण की मांग करता रहा है जो 1997 से ढाका की एक जेल में कैद हैं। चेटिया को बिना वैध काग़ज़ातों के बांग्लादेश में घुसने के लिए गिरफ़्तार किया गया था।

उधर बांग्लादेश के गृहमंत्री ने एक बार फिर भारत से 'शेख मुजीबुर रहमान के हत्यारों को तुरंत ढूंढ कर गिरफ़्तार कर बांग्लादेश को सौंपने पर ज़ोर दिया।' जवाब में शिंदे ने कहा कि भारत इस मामले में बांग्लादेश की यथासंभव मदद करेगा।

माना जाता है कि शेख मुजीबुर रहमान के दो हत्यारे-रिटायर्ड कैप्टन अब्दुल माजेद और रिटायर्ड रिसालदार मोस्लेहुद्दीन भारत में छुपे हुए हैं और बांग्लादेश, भारत से इन दोंनो को गिरफ़्तार कर उसे सौंपने में मदद मांगता रहा है।

इससे पहले बांग्लादेश के कैबिनट सचिव मोहम्मद मोशर्रफ़ हुसैन भूइयां ने कहा था कि प्रत्यर्पण संधि से दोषी और मुक़दमे का सामना कर रहे लोगों का आदान-प्रदान हो पाएगा।

लेकिन उन्होंने ये भी साफ़ किया कि ये संधि उन लोगों पर लागू नहीं होगी जिनपर राजनीतिक अपराध के आरोप हैं और इसके तहत सिर्फ़ वही लोग आएंगे जिन पर हत्या और अन्य गंभीर अपराधों के आरोप हैं।

संशोधित वीज़ा प्रणाली

संशोधित वीज़ा प्रणाली के बाद दोंनो देशों के बीच व्यापारिक वीज़ा पांच साल के लिए मान्य हो जाएगा। फ़िलहाल ये सिर्फ़ एक वर्ष के लिए मान्य है। इसके अलावा इसके तहत छात्रों, बीमार व्यक्तियों, 65 साल से बड़ी उम्र के नागरिक और 12 साल के कम उम्र के बच्चों पर यात्रा प्रतिबंधों को हटाने का भी प्रस्ताव है।

भारत के गृहमंत्री सुशीलकुमार शिंदे सोमवार को ढाका पहुंचे। इससे पहले दिसंबर 2012 में बांग्लादेश के गृहमंत्री की नई दिल्ली यात्रा के दौरान दोंनो पड़ोसी देश प्रत्यर्पण संधि और वीज़ा प्रणाली को और उदार बनाने पर सहमत हो गए थे।

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