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एशियाई धर्म सम्मेलन में महिला अधिकार और शरीयत पर बहस, इस्लाम में महिलाओं को बताया नजरअंदाज ताकतें

Thu, 21 Jun 2018 06:50 PM IST
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Updated Thu, 21 Jun 2018 06:50 PM IST
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discussion on women's rights and shariat in Asian religion conference

जर्मन विदेश मंत्रालय ने विभिन्न देशों के एशियाई धार्मिक प्रतिनिधियों को आमंत्रित करते हुए एक धर्म सम्मेलन का आयोजन किया। दुनिया के अलग-अलग धर्मों के नुमाइंदों को एक-दूसरे के संपर्क में लाने और महिला अधिकारों पर चर्चा करने के मकसद से आयोजित इस सम्मेलन में शरीयत को लेकर भी बहस हुई। इस दौरान अंतरराष्ट्रीय इस्लामिक यूनिवर्सिटी की वाइस चांसलर सलेहा कमरुद्दीन ने कहा कि इस्लामी समाजों में महिलाएं नजरअंदाज ताकतें हैं, उन्हें अधिक सामाजिक जिम्मेदारी उठानी चाहिए।

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इस सम्मेलन में एशियाई देशों के करीब 70 धार्मिक प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। इस तीन दिनी धर्म सम्मेलन का विषय धार्मिक पंथों शांति की जिम्मेदारी रहा जिसमें भारत से पारसी और हिंदू, कंबोडिया के बौद्ध, जापान के शिंतोइस्ट और हिजाब पहले इंडोनेशिया के मुस्लिम भी शामिल थे। इनके अलावा यहूदी रब्बी, प्रोटेस्टेंट पादरी और कुछ शोधकर्ता भी इसमें शामिल रहे। चर्चा में एक तरफ कैथोलिक और दूसरी तरफ मुसलमानों के समूह शामिल हुए।
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इस दौरान मिंडानाओ द्वीप के कोताबातो आर्कबिशपरी प्रमुख कार्डिनाल ओरलांडो ने कट्टरपंथी मुस्लिमों द्वारा ईसाईयों पर होने वाले हमलों के प्रति चिंता जाहिर की। सम्मेलन में कैथोलिक चर्चों पर हमलों और आईएस के खिलाफ संघर्ष के नाम पर कई इलाकों को तहस-नहस करने का मुद्दा भी उठाया गया। 
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मलयेशिया स्थित इंटरनेशनल इस्लामिक यूनिवर्सिटी की वाइस चांसलर सलेहा कमरुद्दीन ने माना कि इस्लाम में महिलाएं नजरअंदाज हैं और उन्हें अपनी ताकत सामाजिक भूमिका में निभानी चाहिए। उन्होंने इस्लामी कानून शरीयत का जिक्र किया जो पश्चिमी उदारवाद से मेल नहीं खाता है। उन्होंने कहा कि शरीयत का मिथक उसकी आत्मा को नुकसान पहुंचाए बिना तोड़ा जाना चाहिए।


अब निगाहें एशिया की तरफ हैं

जर्मनी के विदेश राज्य मंत्री मिखाइल रोथ ने एशियाई धर्म सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए कहा कि हमारा मकसद एकजुटता और शांति की स्थापना व सेवा करना है। उन्होंने कहा कि अब निगाहें एशिया की तरफ हैं और जर्मनी के राजनयिकों का मकसद है धर्म प्रतिनिधियों को एक-दूसरे से वार्ता के लिए प्रेरित करना और उन्हें जोड़ना। 


आधुनिक समाज के योग्य नहीं हैं खास कायदे-कानून

अंतरराष्ट्रीय इस्लामी यूनिवर्सिटी की वाइस चांसलर के शरीयत कानून का जिक्र करने के बाद जर्मनी के विदेश राज्य मंत्री रोथ ने कहा कि हमें ऐसे संकेत छोड़ना होंगे जो बताएं कि कुछ खास कायदे-कानून आधुनिक समाज के योग्य नहीं हैं। इस पर सहमति की जरूरत है। वर्तमान में ऐसा लगता है जैसे दुनिया में दो कानून हैं, एक व्यक्तिगत और दूसरा धार्मिक। इसमें बदलाव जरूरी है।
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