{"_id":"29a0104db4b8ac9e865a16007f638a58","slug":"credit-card-details-stolen-in-korea","type":"story","status":"publish","title_hn":"देश की आधी आबादी का क्रेडिट कार्ड्स ब्योरा चोरी","category":{"title":"Rest of World","title_hn":"बाकी दुनिया","slug":"rest-of-world"}}
देश की आधी आबादी का क्रेडिट कार्ड्स ब्योरा चोरी
Updated Tue, 21 Jan 2014 01:57 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
दक्षिण कोरिया में हैरान करने वाला एक मामला सामने आया है जहां देश की लगभग आधी आबादी के क्रेडिट कार्ड्स का ब्योरा चुराकर मार्केटिंग कंपनियों को बेच दिया गया।
विज्ञापन
क्रेडिट कार्ड्स का ब्योरा, कोरिया क्रेडिट ब्यूरो कंपनी के लिए काम करने वाले एक कम्प्यूटर कॉन्ट्रैक्टर ने चुराया। ये कंपनी क्रेडिट कार्ड्स के 'स्कोर' तैयार करती है।
विज्ञापन
कंपनी के इस कर्मचारी ने दक्षिण कोरिया के दो करोड़ लोगों के क्रेडिट कार्ड्स के ब्योरे के अलावा उनके नाम और 'सोशल-सिक्योरिटी नंबर' जैसी अहम जानकारियां कॉपी कर ली थीं।
विज्ञापन
ये चोरी कितनी बड़ी है, इसका अंदाज़ा तब लगा जब कंपनी की सम्बद्ध ब्रांच से इस कारगुज़ारी को अंजाम देने वाले कम्प्यूटर कॉन्ट्रैक्टर को गिरफ़्तार किया गया।
कार्ड्स का ब्योरा कथित रूप से ख़रीदने वाली मार्केटिंग कंपनियों के प्रबंधकों को भी गिरफ़्तार किया गया है।
असुरक्षित डेटा
शुरुआती रिपोर्टों से संकेत मिलता है कि कम्प्यूटर कॉन्ट्रैक्टर ने कोरिया क्रेडिट ब्यूरो कंपनी के रास्ते क्रेडिट कार्ड्स के ब्योरे में सेंध लगाई और पूरी जानकारी को एक यूएसबी स्टिक में कॉपी कर लिया।
इस अब बात की पड़ताल की जा रही है कि इस तरह की तीन अन्य प्रमुख कंपनियों में डेटा चोरी को रोकने के लिए सुरक्षा के क्या इंतज़ाम किए गए हैं।
कार्ड्स का ब्योरा चोरी होने से क्या असर पड़ा, यह जानने के लिए भी एक कार्यबल बनाया गया है।
नुक़सान की भरपाई
कोरिया के राष्ट्रीय वित्तीय नियामक- वित्तीय सेवाएं आयोग ने एक बयान में कहा है, ''इस दुर्घटना की वजह से उपभोक्ताओं को हुए किसी भी तरह के वित्तीय नुक़सान की भरपाई यही क्रेडिट कार्ड कंपनियां करेंगी।''
वित्तीय सेवाएं आयोग के एक अन्य अधिकारी का कहना है कि इस तरह जानकारी चुराना आसान है और इस बारे में तब तक पता नहीं चलता है जब तक कि जांचकर्ता इन कंपनियों को चोरी के बारे में नहीं बताते।
दक्षिण कोरिया में अपनी तरह का पहला मामला नहीं है। साल 2012 में भी दो हैकर्स को अस्सी लाख से अधिक लोगों की जानकारी चुराने पर गिरफ़्तार किया गया था।
इससे पहले साल 2011 में भी सोशल नेटवर्क कायवर्ल्ड पर भी हमला हुआ था और तब 3।5 करोड़ लोगों का ब्योरा चुराया गया था।