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चीन में चाय का बुलावा मतलब थाने में खातिरदारी
Updated Sun, 20 Jan 2013 02:30 PM IST
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जब आपको कोई चाय पीने का न्योता देता है, तो इसका सीधा सरल सा मतलब होता है कि कोई आपको बतौर मेहमान इज्ज़त से अपने घर मेहमान नवाज़ी के लिए बुला रहा है।
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लेकिन चीन में ‘चाय पिलाने’ का मतलब थोड़ा अलग है। चीन में अगर आपको चाय के लिए बुलाया जाता है तो मेहमान नवाज़ी होती है लेकिन थोड़ी ‘सरकारी किस्म’ की। किस्सा थोड़ा पेचीदा है और इसे समझने के लिए आपको विस्तार से आगे की ख़बर पढ़नी पढ़ेगी।
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हुआ दरअसल यूँ कि ताइवान की कलाकार यी नेंगजिंग ने कुछ दिन पहले एक चीनी सोशल नेटवर्किंग साइट पर संदेश लिखा, “अब मुझे चाय पीने के लिए जाना है। उम्मीद है कि चाय अच्छी होगी।”
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उन्हें फॉलो करने वाले 60 लाख लोग समझ गए कि ज़रूर वे किसी मुश्किल में हैं। इस पोस्ट के बाद यी इंटरनेट पर शांत हो गई। उन्होंने चीन के अखबार सदर्न वीकली के समर्थन में जो पोस्ट डाले थे वो भी हटा दिए गए।
दरअसल चीन में चाय पर बुलाने का मतलब होता है पुलिस का बुलावा- पूछताछ के लिए।
यी नेंगजिंग को चाय पर बुलाने से पहले उन्होंने द सर्दन वीकली नाम के चीनी अखबार के समर्थन में सोशल नेटवर्किंग साइट पर लिखा था कि ये वही चीनी अखबार है जिसके कर्मचारी सेंशरशिप के विरोध में हड़ताल पर चले गए थे। चीन में ऐसा कम ही होता है।
यी ने लिखा था, “आपका गुस्सा मुझे एहसास दिलाता है कि मैं सही हूँ, लीपा-पोती की आपकी कोशिशें मुझे एहसास दिलाती हैं कि मैं न्याय के साथ हूँ। तुम्हारा पागलपन मुझे सामान्य होने का एहसास दिलाता है। मरने-मारने की तुम्हारी नीति मुझे एहसास दिलाती है कि मैं ज़िंदा हूँ।” बस इसके बाद यी को चाय पीने का न्योता आ गया।
यी अकेली ऐसी हाई प्रोफाइल हस्ती नहीं हैं जिन्हें ‘चाय के लिए बुलाया’ गया है। गूगल के पूर्व उप सीईओ ने इंटरनेट पर लिखा था, “चाय बेहद कड़वी थी।”
पुलिस पिलाती है चाय
इसी तरह रियल एस्टेट गुरु रेन जचियांग ने लिखा था, “आधी रात के बाद मेरे पास कॉल आया, चाय का बुलावा था।” इन सबने चीनी अखबार द सदर्न वीकली के पक्ष में आवाज़ उठाई थी।
चीन में जब ‘चाय का बुलावा’ आता है तो समझिए पुलिस ने पूछताछ के लिए बुलाया है- कभी वो फोन पर बुलाते हैं तो कभी खुद ही दरवाज़े पर दस्तक दे देते हैं।
चाय का न्योता चीन में हर उस व्यक्ति को मिल सकता है जिसके किसी मुद्दे पर अलग विचार हैं, अगर आप इंटरनेट पर बोल्ड किस्म के पोस्ट डालते हैं या बागी हैं।
पूछताछ आमतौर पर कई घंटों तक चलती है- इस दौरान चाय मिले न मिले इसकी कोई गारंटी नहीं होती। सुरक्षा अधिकारी आपसे आपकी गतिविधियों के बारे में पूछते हैं और आगाह करते हैं कि आप अपनी हरकतों से बाज़ आ जाएँ वरना नतीजे भुगतने होंगे।
लेकिन सोचने वाली बात ये है कि चाय पीने की सदियों पुरानी परंपरा के इतने अलग मायने कैसे हो गए। सही जवाब किसी को मालूम नहीं है। थिएनमन चौराहे पर 1989 की घटनाओं के बाद कई बुद्धिजीवियों को चाय पीने का न्योता मिला था।
लेकिन इंटरनेट आने के बाद ‘चाय पीलाने’ पर ज़्यादा बात होने लगी क्योंकि लोग ज़्यादतियों के बारे में सोशल मीडिया साइटों पर खुल कर बात करने लगे।
चाय पीलाने के अलग-अलग तरीके
‘चाय पीलाने’ और लोगों को परेशान करने के कई तरीके होते हैं। प्रोफेसर शू योयू और हुआ ज़ी के मुताबिक एक तरीका ये है कि सुरक्षा अधिकारी व्यक्ति के घर के बाहर खड़े रहते हैं और अगर वो व्यक्ति बाहर जाता है तो उसका पीछा करते हैं।
या फिर व्यक्ति को नज़रबंद कर दिया जाता है और कभी कभी वो ऑनलाइन भी नहीं हो सकता। कभी-कभी अज्ञात लोग किसी व्यक्ति को पकड़ कर ले जाते हैं, उन्हें प्रताड़ित करते हैं और धमाकते हैं।
चीन में बाग़ियों की खातिरदारी करने का एक तरीका और है। बताया जाता है कि प्रमुख सम्मेलनों या अहम दौरों से पहले बागियों को बीजिंग के बाहर ‘छुट्टियों’ के लिए आमंत्रित किया जाता है।
ये सब सरकारी खर्चे पर होता है।बजट करीब 70 अरब पाउंड। मकसद- ‘स्थायित्व और सौहार्द’ बना रहे।