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अनोखी कहानीः दिलों को सिलती हैं ये औरतें

Wed, 08 Apr 2015 02:55 PM IST
Updated Wed, 08 Apr 2015 02:55 PM IST
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bolivian womne knits child heart

परंपरागत सिलाई बुनाई का हुनर दिल की बीमारी के साथ पैदा हुए नवजातों की जिंदगी बचाने में मददगार साबित हो रहा है। बोलीविया की मूल निवासी आयमारा महिलाएं सदियों से ऊन की टोपियां, स्वेटर और कंबलों की सिलाई बुनाई में पारंगत रही हैं।

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अब वे अपने इस हुनर का एक ऐसे हाईटेक मेडिकल उत्पाद पर इस्तेमाल कर रही हैं, जिसे नवजातों में दिल के छेद को बंद करने में उपयोग में लाया जाता है। एक साफ सुथरे कमरे में इस बारीक उपकरण को बुनने वाली डेनिएला मेंडोज़ा कहती हैं, “हम यहां खुश हैं, हम उन लोगों के लिए कुछ ऐसा कर रहे हैं, जिससे वो जी सकें।”
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इस तरह सिले जाते हैं दिल

bolivian womne knits child heart

कार्डियोलॉजिस्ट फ्रांज फ्र्यूडेंथाल द्वारा डिजाइन किया ‘निट ऑक्ल्यूड’ नामक इस उपकरण को बनाने में दो घंटे लगते हैं। दिल की बीमारियों के साथ पैदा हुए नवजात बच्चों को बचाने के लिए उन्होंने ला पाज में अपना क्लीनिक बनाया है और अबतक उन्होंने सैकड़ों बच्चों की ज‌िंदगी बचाई है।

दिल के छेद को बंद करने वाले उपकरण को ऑक्युडर कहते हैं और यह उपकरण एक हैट की तरह दिखता है। अधिकांश स्टैंडर्ड ऑक्युडर को औद्योगिक पैमाने पर बनाया जाता है लेकिन फ्र्यूडेंथान का डिजाइन इतना छोटा और इतना पेचीदा है कि ब़ड़े पैमाने पर इसका उत्पादन बहुत ही व्यावहारिक नहीं है।

बुनकरों का कमाल

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बोलीविया के परम्परागत सिलाई कढ़ाई करने वाले बुनकरों को इसे हाथ से बनाने का जिम्मा सौंपा गया। शुरुआत में दिल की बीमारी से ग्रस्त एक भेड़ पर इसका प्रयोग किया। इसके बाद वे सफलतापूर्वक सैकड़ों बच्चों पर इसका इस्तेमाल कर चुके हैं और अब वो अपनी इस खोज को पूरी दुनिया में पहुंचा रहे हैं। फ्र्यूडेंथाल ने बताया, “सबसे अहम बात है कि हम एक बेहद जटिल समस्या का एक बेहद सरल हल निकालने की कोशिश करते हैं।”

लातिन अमेरिका में बोलीविया सबसे गरीब देश है। यहां बेहतर अस्पतालों और हृदय रोग के ऐसे डॉक्टरों का अभाव है, जो नवजात बच्चों के हृदय रोगों का इलाज़ कर सकें। फ्र्यूडेंथाल का उपकरण, सैन्य उद्योग में इस्तेमाल किए जाने वाले एक सुपर इलास्टिक धातु के एक अकेले तार से बुना जाता है।

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दिल का छेद

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यह धातु होती है- निकिल और टाइटेनियम का मिश्रण। इसका एक खास गुण होता है- अपने पूर्व आकार को फिर से ग्रहण करने का। इसे एक बारीक कैथेटर में लपेटा जा सकता है।

जब यह रक्त धमनियों के सहारे अंदर ले जाया जाता है तो यह लिपटा ही रहता है और यह तभी फ़ैलता है जब यह अपनी सही जगह पहुंच जाता है। अपने पूर्व आकार में आने के बाद यह उस छेद को बंद कर देता है। यह बिना किसी बदलाव की ज़रूरत के वहां बना रहता है।

दिल की बीमारी ठीक करने के लिए परम्परागत हुनर को हाई टेक्नोलॉजी से जोड़ने के लिए फ्र्यूडेंथाल को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तारीफ़ और पुरस्कार मिल चुके हैं। बोलीविया की कुछ मूल जनजातियों में दिल से छेड़छाड़ करने को अपवित्र काम माना जाता है।

पैदाइशी है बीमारी
फ्र्यूडेंथाल के अनुसार, “शल्यक्रिया के लिए दिल को न खोलकर हम उन अधिकांश मरीजों की मर्जी का भी सम्मान कर रहे हैं जो शायद अपने बच्चों का इलाज नहीं कराते।” इस पैदाइशी बीमारी से ग्रस्त रोगी को वजन बढ़ाने में काफी मुश्किल आती है और वो जल्दी थक जाते हैं।

एक स्वस्थ व्यक्ति के मुक़ाबले उनके दिल को शरीर के अन्य हिस्से में खून पहुंचाने के लिए तीन गुना ज्यादा काम करना पड़ता है। इस समस्या को पैटेंट डक्टस आर्टीरियस यानी पीडीए कहा जाता है। जन्म से पहले शिशु मां से ऑक्सीजन लेता है। जन्म के बाद डक्टस आर्टीरियस नामक रक्त नलिका फेफड़े से रक्त निकालने में मदद करती है और अपने आप बंद हो जाती है।

बोलीविया की समस्या

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लेकिन अगर ये स्वाभाविक रूप से बंद नहीं होती है तो दिल में रक्त का अनियमित बहाव होने लगता है। इसके कारण रोगी में सांस की दिक्कत और वृद्धि न होने के लक्षण दिखने लगते हैं।

हालांकि यह समस्या अगर मामूली होती है तो ये लक्षण भी नहीं दिखते। ला पाज समुद्र तल से 4,000 मीटर ऊपर है और इतनी ऊंचाई पर ऑक्सीजन की वैसे भी कमी होती है। फ्र्यूडेंथाल कहते हैं कि अन्य देशों के मुक़ाबले यहां यह समस्या दस गुना ज्यादा है।

सर्वाधिक है बाल मृत्यु दर
तीन साल पहले छह साल की सिंथिया का ऑपरेशन हुआ था। ऑपरेशन के पहले स्वस्थ रक्त डक्टस के रास्ते बाहर निकल जाता था, लेकिन फ्र्यूडेंथाल के उपकरण से इसे बंद किया गया।

सिंथिया की मां विक्टोरिया हिलारी याद करते कहती हैं, “वो थोड़ी दूर तक भी नहीं चल पाती थी। वो हमेशा कहती थी कि मैं थक गई हूं। रोते समय उसका चेहरा जामुनी रंग का हो जाता था और वो लगभग बेहोश सी हो जाती थी।” वो कहती हैं, “इस तरह मुझे पता चला कि उसे कोई बीमारी है लेकिन मैं नहीं जानती थी कि क्या किया जाए।” विक्टोरिया के मुताबिक, “अब वो दौड़ सकती है और उसने स्कूल में शारीरिक शिक्षा भी पास कर ली है।” पूरी दुनिया में, बोलीविया में बच्चों की मृत्यु दर सबसे अधिक है।

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