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कंगारुओं की बढ़ती आबादी से परेशान ऑस्ट्रेलिया, लोगों से कहा खूब खाओ इनका मांस

Tue, 12 Sep 2017 09:38 PM IST
बीबीसी, हिंदी
बीबीसी, हिंदी Updated Tue, 12 Sep 2017 09:38 PM IST
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australian specialist told to eat more kangaroo as population hits double
कंगारू

ऑस्ट्रेलिया की पहचान कंगारू अब वहां के स्‍थानीय लोगों के लिए सिरदर्द बनते जा रहे हैं। इनकी बढ़ती आबादी से परेशान जमीन मालिकों और पर्यावरणविदों ने एक नया रास्ता निकाला है। अब लोगों से अपील की जा रही है कि वो जंगली कंगारुओं का मांस ज्यादा से ज्यादा मात्रा में खायें।

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सरकारी आंकड़ों के मुताबिक साल 2016 में ऑस्ट्रेलिया में करीब साढ़े चार करोड़ कंगारू थे जो कि वहां की इंसानी आबादी से दोगुनी संख्या है। साल 2010 में देश में कंगारुओं की संख्या लगभग दो करोड़ 70 लाख थी।
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कंगारुओं की तेजी से बढ़ रही संख्या के पीछे बारिश बड़ी वजह है। दरअसल अच्छी बारिश की वजह से कंगारुओं के लिए प्रचुर मात्रा में उपलब्ध भोजन है। लेकिन विशेषज्ञों को ये डर भी है कि यदि गर्मियों में सूखा पड़ा तो लाखों कंगारू भूखे मर सकते हैं।
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उल्लेखनीय है कि ऑस्ट्रेलिया में कंगारुओं को मारने वालों पर कानून सख्त कार्रवाई करता है। हर प्रांत में कंगारुओं को मारने की संख्या निर्धारित है। कंगारुओं को मारने के लिए लाइसेंस भी जारी किया जाता है। यहां हर साल कंगारुओं को मारा जाता है और ये विवाद भी पैदा होता है कि कंगारुओं को मारने से पर्यावरण पर कोई असर होता भी है या नहीं।

बड़ी तादाद में मारे जाने वाले कंगारुओं की खाल का निर्यात कर दिया जाता है। लेकिन इन कंगारुओं का मांस आमतौर पर बर्बाद हो जाता है क्योंकि इसकी मांग बहुत कम है। कंगारू ऑस्ट्रेलिया का राष्ट्रीय पशु है इसलिए इसके मांस को खाने के लेकर लोग आशंकित भी रहते हैं। मांस समर्थकों का कहना है कि कंगारू के मांस में फैट कम होता है और ये अन्य जानवरों की तरह मीथेन गैस भी कम उत्सर्जित करते हैं इसलिए इन्हें पालना पर्यावरण के लिए अधिक लाभकारी है। 

एडिलेड यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर डेविड पैटन ने एबीसी से कहा, "लोगों को पर्यावरण की रक्षा करने और मृत पशुओं को सड़ने से बचाने के लिए कंगारुओं को मारे जाने का समर्थन करने की जरूरत है।"


पैटन कहते हैं, "बड़ी तादाद में उपलब्ध होना कंगारू की गलती नहीं है वजह शायद ये है कि हम ही उन्हें मारने के प्रति अनिच्छुक हैं। यदि उन्हें जल्द ही नहीं हटाया गया तो ये नुकसानदेह हो सकता है।" उन्होंने कहा कि यदि हम इन जानवरों को मार रहे हैं तो हमें ये भी सोचना चाहिए कि हम उनका इस्तेमाल कैसे कर रहे हैं।

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