सीरिया हमले में अमेरिका के साथ है ऑस्ट्रेलिया, फिर भी इस वजह से है डरा हुआ
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ऑस्ट्रेलिया सीरिया संकट पर अमेरिका के साथ है। वो सीरिया में बशर अल-असद और रूस की भूमिका का विरोध कर रहा है। हालांकि अमेरिका, फ्रांस और ब्रिटेन ने सीरिया पर कथित रासायनिक हमले के खिलाफ मिसाइल दागी तो ऑस्ट्रेलिया सबसे ज्यादा डरा हुआ था। अगर सीरिया पर कोई भी तबाही मचाने लायक हमला हुआ तो ऑस्ट्रेलिया भी संकट की चपेट में आ जाएगा। ऑस्ट्रेलिया बुरी तरह से ऊर्जा संकट में फंस जाएगा और उसकी अर्थव्यवस्था थम सी जाएगी। कहा जा रहा है कि शीत युद्ध के बाद पहली बार सीरिया को लेकर रूस और पश्चिमी ताकतों में टकराव की स्थिति बन रही है।
द ऑस्ट्रेलियन अखबार का कहना है कि सीरिया युद्ध का मैदान बना तो ऑस्ट्रेलिया में 43 दिनों के बाद तेल खत्म हो जाएगा। द ऑस्ट्रेलियन से रिटायर्ड वाइस-मार्शल जॉन ब्लैकबर्न ने कहा कि सीरिया में किसी भी तरह की जंग से ऑस्ट्रेलिया की ऊर्जा सुरक्षा खतरे में पड़ जाएगी। उन्होंने कहा कि ऑस्ट्रेलिया अपनी जरूरत के तेलों के लिए पूरी तरह से मध्य-पूर्व पर निर्भर है। ब्लैकबर्न ने द ऑस्ट्रेलियन से कहा, ''हम लोग परिवहन ईंधन का 91 फीसदी हिस्सा सीरिया के रास्ते लाते हैं और ऑस्ट्रेलिया में कोई सरकारी स्टोर नहीं है। हमारे पास कोई प्लान बी नहीं है। जाहिर है सीरिया में जंग हुई तो हमारी इंडस्ट्री और अर्थव्यवस्था ठप पड़ जाएंगी।''
ब्लैकबर्न ने कहा कि ऑस्ट्रेलिया की ऊर्जा नीति को लेकर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी भी चेतावनी दे चुकी है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी का भी कहना है कि ऑस्ट्रेलिया के पास ऊर्जा संकट का सामना करने के लिए कोई प्लान बी नहीं है। ब्लैकबर्न का कहना है कि दो हफ्ते के भीतर ही ऑस्ट्रेलिया में तेल संकट का असर दिखने लगेगा। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के सदस्य देशों में ऑस्ट्रेलिया वैसा देश है जिसके पास सुरक्षित तेल सबसे कम है। कहा जा रहा है कि ऑस्ट्रेलिया के पास कम से कम 90 दिनों के लिए सुरक्षित ऊर्जा होनी चाहिए जबकि है 41 दिनों के लिए ही।
पिछले महीने ही ऑस्ट्रेलिया की संसदीय समिति ने राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए इसे खतरा करार दिया था। यहां तक कि ऑस्ट्रेलिया में नई ऊर्जा नीति की मांग की जा रही है। सामरिक विशेषज्ञों का कहना है कि सीरिया में युद्ध असर तेल की वैश्विक आपूर्ति पर पड़ेगा। खाड़ी के देशों से दुनिया भर में होने वाली तेल आपूर्ति प्रभावित होंगी। ऑस्ट्रेलिया में तेल खाड़ी के देशों से चीन, जापान, कोरिया और सिंगापुर से रिफाइन होकर पहुंचता है। ब्लैकबर्न का कहना है कि सीरिया में युद्ध हुआ तो डीजल और पेट्रोल दो हफ्ते में खत्म हो जाएंगे।