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इराक संकटः साथ आए अमेरिका और ईरान

Thu, 03 Jul 2014 01:54 PM IST
Updated Thu, 03 Jul 2014 01:54 PM IST
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america and iran come together on iraq crisis

इराक में सेना और इस्लामी चरमपंथी संगठन इस्लामिक स्टेट इन इराक ऐंड अल-शाम या आईएसआईएस के बीच जारी भीषण संघर्ष के बीच इराक के सहयोग के लिए आखिरकार अमेरिका और ईरान साथ आ गए हैं।

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लंदन स्थित इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रैटेजिक स्टडीज के जोसेफ डेम्प्सी ने इराकी अधिकारियों की ओर से जारी विमानों के वीडियो को ध्यान से देखा है।

उन्होंने मीडिया को बताया कि उनके अनुसार इस्तेमाल हुए विमानों में से कुछ एक सुखोई सू-25 'फ्रॉगफुट' हैं और वे ईरानी हैं। अमेरिका पहले ही मदद के लिए इराक में अपने विमान भेज चुका है।
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इधर इराक के प्रधानमंत्री नूरी अल मलिकी ने चेतावनी दी है कि आईएसआईएस की ओर से 'इस्लामी राज्य' की घोषणा पूरे क्षेत्र के लिए खतरा है। आईएसआईएस ने इराक और सीरिया के अपने कब्जे वाले इलाके में इस्लामी राज्य का ऐलान किया है।

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प्रधानमंत्री नूरी अल मलिकी का बयान

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इराक के प्रधानमंत्री नूरी अल मलिकी ने कहा कि वह सुन्नी कबीले के उन लडाकों को भी माफ करने के लिए तैयार हैं जो संघर्ष में चरमपंथियों के साथ रहे, बशर्ते वे किसी खून-खराबे में शामिल न रहे हों।

कुर्द के स्वायत्त क्षेत्र को पूरी तरह अपने कब्जे में लेने के कुर्द नेताओं के कदम की भी उन्होंने आलोचना की। इराक के प्रधानमंत्री ने कहा कि किसी को इलाके में घट रहे ताजा घटनाक्रम का फायदा उठाने का अधिकार नहीं है।

इस बीच कुर्द नेता मसूद बरजानी ने इराक के वरिष्ठ शिया धार्मिक नेता अयातुल्लाह सिस्तानी से अपील की है कि वह मलिकी के तीसरे कार्यकाल के लिए समर्थन न करें।

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