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'बेहद खतरनाक शख़्स' अबू कतादा जॉर्डन निर्वासित

Sun, 07 Jul 2013 06:39 PM IST
Updated Sun, 07 Jul 2013 06:39 PM IST
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abu qatada deported jordan

ब्रिटेन से निर्वासन के बाद चरमपंथी उलमा अबू क़तादा जॉर्डन पहुंच गए हैं। वहां उन्हें अदालत में पेश किया गया और उनपर आतंकवाद के मामलों में शामिल होने का आरोप लगाया है।

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ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने खुशी जताई कि आख़िरकार अबू क़तादा को उनके देश वापस भेज दिया गया है।

अबू क़तादा को ब्रिटेन के आरएएफ़ नॉर्थोल्ट हवाई अड्डे से उनके देश वापस भेजा गया। उन्हें 2001 में आतंक के आरोपों में पहली बार गिरफ़्तार किया गया था और आठ साल से ब्रिटेन में उन्हें निर्वासित करने की जद्दोजहद चल रही थी।
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फ़िलिस्तीनी-जॉर्डेनियाई उलमा अबू क़तादा का निर्वासन तब संभव हो पाया, जब ब्रिटेन और जॉर्डन ने एक समझौते पर दस्तख़त किए और इस बात पर एक राय बनी कि यातना देकर हासिल किए गए सबूतों को उनके खिलाफ इस्तेमाल नहीं किया जाएगा।
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'अपील की परतें हटाने की ज़रूरत'
गृह सचिव थेरेसा मे ने कहा है कि उन्हें खुशी है कि उन्हें निर्वासित करने का सरकार का निश्चय ‘दोषमुक्त’ साबित हुआ है। उन्होंने कहा, ‘इस ख़तरनाक आदमी को अब हमारे इलाक़े से बाहर उनके देश में अदालत के सामने पेश होने के लिए भेज दिया गया है।’

थेरेसा मे का कहना था कि वो ऐसे निर्वासन के मामलों की प्रक्रिया को भविष्य में और साफ-सुथरा बनाना चाहती हैं।

‘हमें अपने मानवाधिकार क़ानूनों का ध्यान रखते हुए अपीलों की कई परतों को हटाने की ज़रूरत है, जो उन विदेशी नागरिकों को हासिल हैं जिन्हें हम निर्वासित करना चाहते हैं। इसके लिए हम क़दम उठा रहे हैं - जिनमें नया अप्रवासन क़ानून भी शामिल है।’

बीबीसी संवादताता के मुताबिक अबू क़तादा को ले जाने वाले विमान में उनके साथ जॉर्डन के ही छह और लोग भी थे जिनमें तीन सुरक्षाकर्मी, एक मनोवैज्ञानिक, एक मेडिकल एक्ज़ामिनर और उनका जॉर्डेनियाई वकील शामिल थे।

53 साल के क़तादा को दक्षिण पूर्व लंदन की बेलमार्श जेल में रखा गया था जहां से उन्हें तीन पुलिस वाहनों में आधी रात को हवाई अड्डे पहुंचाया गया।

अबू क़तादा के पिता और भाईयों के साथ जॉर्डन के मारका मिलिट्री एयरपोर्ट गए एक पारिवारिक मित्र ने बीबीसी मध्य पूर्व संवाददाता योलांद नैल को बताया है कि क़तादा को सीधे स्टेट सिक्योरिटी कोर्ट ले जाया गया।

उन पर जॉर्डन के मिलेनियम आयोजन के दौरान अमरीकी और इज़रायली पर्यटकों के ख़िलाफ़ बम हमले करने के आरोप हैं।

जॉर्डन में मुक़दमे की कार्रवाई शुरू
जॉर्डन सरकार के प्रवक्ता ने इस बात की पुष्टि की कि क़तादा के ख़िलाफ़ क़ानूनी प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और मुक़दमा अंतर्राष्ट्रीय मानकों के हिसाब से चलाया जाएगा।

बीबीसी संवाददाता के मुताबिक उलमा को अपने परिवार से मिलने की इजाज़त नहीं मिली है और उन्हें जुवैदा या मुवक़्क़ार जेल में रखा जा सकता है।

थेरेसा मे ने कहा है कि वो भी अबू क़तादा को निर्वासित करने पर हुए क़रीब एक अरब 55 लाख रुपए खर्च और समय को लेकर ‘उतनी ही निराश हैं जितनी जनता।’ मगर जनता शायद इसके इस परिणाम से खुश ही होगी।

‘बेहद ख़तरनाक शख़्स’
अबू क़तादा का असल नाम ओमर ऑथमैन है और उन्हें 1994 में ब्रिटेन ने शरण दी थी। ब्रिटेन आने से कुछ पहले अबू क़तादा पाकिस्तान में अफ़ग़ानिस्तान सीमा पर रहे थे। मगर ब्रिटिश सिक्योरिटी सर्विस को बाद में पता चला कि उनके आतंकवादी गतिविधियों से संबंध रहे हैं।

चरमपंथी उलमा अबू क़तादा को अल क़ायदा संबंधी गतिविधियों के तहत ब्रिटेन की अदालत ने ‘बेहद ख़तरनाक शख़्स’ और ‘ब्रिटेन की अहम हस्ती’ क़रार दिया था।

कहा जाता है कि आतंकवादी गतिविधियों में शामिल होने के चलते गिरफ़्तार बॉम्बर रिचार्ड रीड और ज़कारियास मौसाई दोनों क़तादा से धार्मिक सलाह-मश्विरा लिया करते थे। उलमा के कुछ भाषण जर्मनी के शहर हैम्बर्ग के एक फ़्लैट में भी मिले थे जिसमें 9/11 के हमले में शामिल कुछ लोगों ने इस्तेमाल किया था।

क़तादा ने 2005 के ब्रिटेन के उस फ़ैसले के ख़िलाफ़ लड़ने का फ़ैसला किया था जिसमें उसे मुक़दमे का सामना करने के लिए जॉर्डन निर्वासित करने की बात कही गई थी। इसके बाद आठ साल लंबी क़ानूनी लड़ाई चली। यह विवाद इस साल मई तक चला जब उलमा ने जॉर्डन और ब्रिटेन के बीच नए समझौते के तहत ये जाना कि मुक़दमे के दौरान उनके अधिकारों की अनदेखी नहीं होगी।

साल 2007 में स्पेशल इमीग्रेशन अपील कमीशन में अबू क़तादा की हार को ब्रिटिश सरकार की जीत की तरह देखा गया जब कहा गया कि आतंकवादी गतिविधियों में शामिल विदेशियों पर ब्रिटेन में मुक़दमा नहीं चलाया जा सकता।

मगर अबू क़तादा ने बड़ी अदालत में अपील की और कहा था कि यातनाओं के ज़रिए उनसे इकट्ठे किए गए सबूतों को उनके ख़िलाफ़ इस्तेमाल किया जा सकता है। जॉर्डन और ब्रिटेन में हुए समझौते के बाद उलमा ने अपनी अपील वापस ले ली और इसके बाद उनके निर्वासन का रास्ता साफ़ हो सका।

शुरुआती सालों में अबू क़तादा ने लंदन के फोर्थ फेदर्स कम्यूनिटी सेंटर में भाषण दिए और अपने घर पर लोगों के साथ बैठकें कीं। क़तादा मुस्लिम धरती पर इस्लामी सरकारों के गठन की वकालत करते थे।

उनका कहना था कि इस्लामी क़ानून विदेशियों के ख़िलाफ़ हथियार उठाने की सलाह देता है क्योंकि वो मुसलमानों के दुश्मन हैं। नतीजा यह हुआ कि हथियारबंद इस्लामिस्ट ग्रुपों ने नागरिकों पर हमले के लिए उनकी सलाह का सहारा लेना शुरू कर दिया।


वर्ष 1997 तक उनके विचार कठोर होते चले गए। 2001 में उलमा क़तादा ने फिदायीन हमलों को जायज़ ठहराना शुरू कर दिया था। एक स्पेनिश जज बल्तासार गारज़ों ने क़तादा को ‘ब्रिटेन में मुजाहिदीन का धार्मिक गुरु’ क़रार दिया। इसके बाद सिक्योरिटी सर्विस और पुलिस ने अबू क़तादा को ख़तरा मानना शुरू किया।

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