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Report: तालिबान का पाकिस्तान सरकार को फरमान, टीटीपी के साथ शांति वार्ता आगे बढ़ाएं
Sat, 22 Jul 2023 03:33 PM IST
देव कश्यप
पीटीआई, इस्लामाबाद।
पीटीआई, इस्लामाबाद।
Published by: देव कश्यप
Updated Sat, 22 Jul 2023 03:33 PM IST
सार
पाकिस्तान ने इस सप्ताह अपने विशेष दूत को तीन दिवसीय यात्रा पर काबुल भेजा ताकि यह स्पष्ट संदेश दिया जा सके कि अफगानिस्तान की तालिबान के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार को देश में कई बड़े आतंकवादी हमलों के लिए दोषी टीटीपी के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई करनी होगी।
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सांकेतिक तस्वीर।
- फोटो : पीटीआई
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विस्तार
अफगान तालिबान ने पाकिस्तान सरकार से प्रतिबंधित आतंकवादी समूह तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के साथ बातचीत का एक और दौर शुरू करने के लिए कहा है। काबुल में एक शीर्ष नेता ने इस्लामाबाद से कहा कि उसे युद्ध के बजाय शांति को प्राथमिकता देनी चाहिए। शनिवार को एक मीडिया रिपोर्ट में यह बात सामने आई है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान की तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के खिलाफ कार्रवाई के नवीनतम प्रयास काबुल की सहमित के बिना आगे नहीं बढ़ सकते।
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पाकिस्तान ने इस सप्ताह अपने विशेष दूत को तीन दिवसीय यात्रा पर काबुल भेजा ताकि यह स्पष्ट संदेश दिया जा सके कि अफगानिस्तान की तालिबान के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार को देश में कई बड़े आतंकवादी हमलों के लिए दोषी टीटीपी के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई करनी होगी। राजदूत असद दुर्रानी ने अपनी यात्रा के दौरान अफगानिस्तान के कार्यवाहक प्रधानमंत्री मौलवी अब्दुल कबीर, कार्यवाहक विदेश मंत्री मावलवी अमीर खान मुत्ताकी और अन्य अधिकारियों से मुलाकात की।
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मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, लेकिन अफगान तालिबान ने कई बैठकों के बाद उनसे कहा कि पाकिस्तान को बल प्रयोग के बजाय शांति का रास्ता अपनाना चाहिए। बंद दरवाजे की बातचीत से परिचित आधिकारिक सूत्रों ने मीडिया को बताया कि अफगान तालिबान नेतृत्व को स्पष्ट शब्दों में बताया गया था कि टीटीपी के आमने- सामने आने से पाकिस्तान का धैर्य कमजोर हो रहा है।
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इस मुद्दे पर विदेश कार्यालय की प्रवक्ता मुमताज जहरा बलूच ने भी इस सप्ताह अपने साप्ताहिक समाचार ब्रीफिंग में कहा, आतंकवाद का मुद्दा...पाकिस्तान के लिए गंभीर चिंता का मुद्दा है। और हमने कई मौकों पर और पाकिस्तान और अफगान अंतरिम अधिकारियों के बीच होने वाली हर महत्वपूर्ण बातचीत में अफगान अधिकारियों के साथ इस मुद्दे को उठाया है। जब उनसे पूछा गया कि क्या राजदूत दुर्रानी ने अफगान अधिकारियों के साथ सीमा पार आतंकवाद का मुद्दा उठाया है, तो उन्होंने कहा कि हमने अफगान की धरती से पैदा होने वाले आतंकवाद के खतरे पर चर्चा की है।
लेकिन टीटीपी के खिलाफ कार्रवाई पर पाकिस्तान की जिद के बावजूद अफगान तालिबान सरकार उस रास्ते पर चलने को तैयार नहीं है। रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि अफगान के उप प्रधानमंत्री ने पाकिस्तानी दूत को बल प्रयोग के बजाय शांति का मार्ग अपनाने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट है कि अफगान तालिबान को टीटीपी के खिलाफ कार्रवाई करने में कोई दिलचस्पी नहीं है। काबुल ने एक बार फिर पाकिस्तान से टीटीपी के साथ शांति वार्ता शुरू करने के लिए कहा।
टीटीपी द्वारा हमले तेज करने और पहले दौर की बातचीत का फायदा उठाने के बाद पाकिस्तान ने शांति प्रक्रिया छोड़ दी है। नागरिक और सैन्य नेतृत्व ने फैसला किया कि पाकिस्तान अब टीटीपी के साथ बातचीत नहीं करेगा। अगर किसी भी स्तर पर यदि बातचीत की आवश्यकता होती है, तो वह केवल टीटीपी के आत्मसमर्पण करने के बाद ही हो सकती है। पाकिस्तान ने काबुल में तालिबान सरकार पर युद्धग्रस्त देश में प्रतिबंधित टीटीपी आतंकवादियों की मौजूदगी को सहन करने का आरोप लगाया है। 2021 में अफगान तालिबान के सत्ता में आने के बाद से पाकिस्तान में टीटीपी हमलों में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि अफगान के कार्यवाहक प्रधानमंत्री कबीर ने दुर्रानी से पूछा कि क्या पाकिस्तान को युद्ध के बजाय शांति को प्राथमिकता देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान में युद्धों के कड़वे अनुभव के कारण वह पाकिस्तान को इसके बजाय बातचीत का रास्ता अपनाने की सलाह देंगे। कबीर ने कहा कि वह पाकिस्तान में शांति को अफगानिस्तान के हित में देखते हैं और वहां हिंसा के कृत्यों को अफगानिस्तान के लिए नुकसान मानते हैं और एक मुस्लिम देश होने के नाते अफगानिस्तान पाकिस्तान में लड़ाई और अशांति नहीं चाहता है।
उन्होंने पाकिस्तानी दूत को आश्वासन दिया कि अफगान तालिबान सरकार की अन्य देशों के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करने की नीति है। उन्होंने दावा किया कि अफगानिस्तान अपनी धरती का इस्तेमाल पाकिस्तान समेत किसी अन्य देश के खिलाफ नहीं होने देगा।