{"_id":"6186bfedde167a4b581c1bde","slug":"real-face-of-pakistan-exposed-six-terrorists-of-jamaat-ud-dawa-acquitted-from-court-all-related-to-hafiz-saeed","type":"story","status":"publish","title_hn":"पाक का असली चेहरा उजागर: जमात उद दावा के छह आतंकी कोर्ट से बरी, हाफिद सईद से जुड़े हैं सभी","category":{"title":"World","title_hn":"दुनिया","slug":"world"}}
पाक का असली चेहरा उजागर: जमात उद दावा के छह आतंकी कोर्ट से बरी, हाफिद सईद से जुड़े हैं सभी
Sat, 06 Nov 2021 11:26 PM IST
सुरेंद्र जोशी
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: सुरेंद्र जोशी
Updated Sat, 06 Nov 2021 11:26 PM IST
सार
आतंकी सरगना सईद के अगुआई वाला जमात-उद-दावा प्रतिबंधित लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) का नया रूप है। लश्कर ने ही 2008 के मुंबई हमले को अंजाम दिया था। हमले में छह अमेरिकियों सहित 166 लोग मारे गए थे।
विज्ञापन
हाफिज सईद
- फोटो : ANI
विस्तार
आतंकवाद को प्रश्रय नहीं देने व आतंकियों पर नकेल कसने के पाकिस्तान सरकार के दावे एक बार फिर झूठे साबित हो गए। लाहौर हाईकोर्ट ने मुंबई हमले के मास्टर माइंड हाफिद सईद के छह गुर्गों को आतंकी वित्त पोषण के आरोपों से बरी कर दिया। इन्हें टेरर फंडिंग को लेकर निचली कोर्ट ने दोषी ठहराया था।
विज्ञापन
आतंकी हाफिज सईद के संगठन जमात-उल-दवा (जेयूडी) से जुड़े छह नेताओं को आतंक के वित्त पोषण (टेरर फंडिंग) के मामले में लाहौर हाई कोर्ट ने शनिवार को रिहा कर दिया। जेयूडी असल में लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) का मुखौटा संगठन है। 2008 में एलईटी ने ही मुंबई में हमला किया था, जिसमें 160 लोगों की जान गई थी।
विज्ञापन
निचली अदालत ने दी थी नौ वर्ष कैद की सजा
पाकिस्तानी समाचार पत्र डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक निचली अदालत ने प्रोफेसर मलिक जफर इकबाल, याह्या मुजाहिद, नसरुल्ला, समीउल्लाह और उमर बहादुर को नौ साल कैद की सजा सुनाई थी, जबकि हाफिज अब्दुल रहमान मक्की को छह महीने की जेल की सजा सुनाई गई थी। सभी ने लाहौर हाईकोर्ट में फैसले के खिलाफ अपील की जिस पर मुख्य न्यायाधीश मुहम्मद अमीर भट्टी और न्यायमूर्ति तारिक सलीम शेख की खंडपीठ ने सुनवाई की। अपीलकर्ताओं के वकील ने तर्क दिया कि अभियोजन पक्ष अपीलकर्ताओं के खिलाफ संदेह से परे आरोप साबित करने में विफल रहा है, इसके साथ ही निचली अदालत ने उन सबूतों को ठीक से नहीं देखा जिसकी वजह से अन्याय हुआ है।
विज्ञापन
हाई कोर्ट ने अभियोजन को दोष साबित करने में माना नाकाम
आरोपियों के वकील ने तर्क दिया कि उनके मुवक्किल अल-अनफाल ट्रस्ट के सदस्य थे, जिसका एलईटी के साथ कोई संबंध नहीं था, साथ ही इस बात का कोई सबूत नहीं है, जिससे साबित हो सके कि अपीलकर्ता लश्कर या अन्य ऐसे संगठन के उद्देश्यों का समर्थन करने वाली गतिविधियों में लिप्त हों। इसके अलावा अपीलकर्ता 2000 के दशक के मध्य में ही ट्रस्ट से अलग हो गए थे।
हालांकि, अभियोजक ने अपील का विरोध करते हुए तर्क दिया कि ट्रस्ट एलईटी के मुखौटे के तौर पर काम कर रहा था, जिसके कारण सरकार ने 2019 में इसे प्रतिबंधित किया। इसके अलावा अपीलकर्ता ट्रस्ट के कट्टर कार्यकर्ता थे। हालांकि, हाई कोर्ट ने अपील को स्वीकार करते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष के मुख्य गवाह का बयान विश्वसनीय नहीं है और कोई ठोस सबूत भी नहीं है। पीठ ने कहा कि यह न्याय का सामान्य सिद्धांत है कि अभियोजन आरोपी को सजा दिलाने के लिए संदेह से परे दोष साबित करे। अपीलकर्ताओं को केवल इस कारण से दोषी नहीं ठहराया जा सकता है कि लश्कर या ट्रस्ट पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।
कमजोर पड़ी गवाही
अभियोजन की तरफ से इंस्पेक्टर मुहम्मद खालिद को गवाह बनया गया था, जिसने स्वीकार किया कि स्थानीय पुलिस स्टेशन को कभी भी अपीलकर्ताओं के खिलाफ कोई शिकायत नहीं मिली और जांच के दौरान भी किसी ने कुछ ऐसा नहीं बताया जो आरोपों को सिद्ध कर सके।
इस बीच, जेयूडी प्रमुख हाफिज मुहम्मद सईद और कई अन्य नेताओं को आतंकवाद के वित्तपोषण के आरोप में आतंकवाद विरोधी विभाग (सीटीडी) की तरफ से दर्ज दर्जनों प्राथमिकी में दोषी ठहराया गया है। डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, सीटीडी ने जमात-उद-दावा नेताओं के खिलाफ विभिन्न शहरों में 41 प्राथमिकी दर्ज की हैं।