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Laos: लाओस में राजनाथ सिंह ने बताया दक्षिण चीन सागर में आचार संहिता पर भारत का पक्ष, भगवान बुद्ध का जिक्र किया

Thu, 21 Nov 2024 11:58 AM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वियनतियाने
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वियनतियाने Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Thu, 21 Nov 2024 11:58 AM IST
सार

रक्षा मंत्री ने कहा, "शांतिपूर्ण वार्ता को लेकर भारत की प्रतिबद्धता रही है। सीमा विवाद, व्यापार समझौते जैसी वैश्विक चुनौतियों को लेकर हमारे दृष्टिकोण में स्पष्ट है।" उन्होंने कहा, "खुली वार्ता से विश्वास बढ़ता है और स्थायी साझेदारी की नींव पड़ती है।"

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Rajnath Singh attends Regional Security Meeting in Laos clarifies India Position on South China Sea Model Code
राजनाथ सिंह। - फोटो : PTI

विस्तार

भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को लाओस में क्षेत्रीय सुरक्षा बैठक में हिस्सा लिया। यहां उन्होंने सीमा विवाद, व्यापार समझौतों समेत कई मुद्दों आसियान देशों को अहम संदेश दिए। राजनाथ ने कहा कि शांतिपूर्ण वार्ता के लिए सीमा विवाद सुलझाना भारत की प्रतिबद्धता रही है। इस दौरान उन्होंने बौद्ध धर्म का जिक्र करते हुए कहा कि भारत ने हमेशा जटिल वैश्विक मुद्दों को हल करने के लिए बातचीत की वकालत की है।
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रक्षा मंत्री ने कहा, "शांतिपूर्ण वार्ता को लेकर भारत की प्रतिबद्धता रही है। सीमा विवाद, व्यापार समझौते जैसी वैश्विक चुनौतियों को लेकर हमारे दृष्टिकोण में स्पष्ट है।" उन्होंने कहा, "खुली वार्ता से विश्वास बढ़ता है और स्थायी साझेदारी की नींव पड़ती है।"
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बिना नाम लिए चीन को संदेश देते हुए राजनाथ सिंह ने कहा, "भारत का मानना है कि वैश्विक समस्याओं का दीर्घकालिक हल तभी निकाला जा सकता है, जब देश एक-दूसरे के विचारों का सम्मान करें। उन्होंने कहा कि दुनिया में ध्रुवीकरण बढ़ता जा रहा है, इसलिए समय आ गया है कि शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के भगवान बुद्ध के सिद्धांतों को और ज्यादा गहराई से अपनाया जाए।
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दक्षिण चीन सागर के लिए प्रस्तावित आचार संहिता पर राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति को बढ़ावा देने के लिए नौवहन, उड़ान की स्वतंत्रता और अंतरराष्ट्रीय कानून के पालन के पक्ष में है। उन्होंने कहा कि भारत ऐसी आचार संहिता देखना चाहेगा, जिससे अलग-अलग देशों के हित पर उल्टा असर न पड़े। रक्षा मंत्री ने जोर देते हुए कहा कि कोई भी आचार संहिता पूरी तरह से अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप होनी चाहिए। उन्होंने कहा, ‘‘यह संहिता अंतराष्ट्रीय कानून खास तौर पर संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून 1982 का पालन करती हो।’’

आसियान देशों की अहम बैठक में भारत को मिला है न्योता
बता दें कि आसियान (एसोसिएशन ऑफ साउथ ईस्ट एशियन नेशन्स) देशों की यह बैठक चीन के साथ उनके दक्षिण चीन सागर में जारी विवादों के बीच हो रही है। इसे लेकर आसियान में शामिल देश लाओस में चीन से सीधी बात कर रहे हैं। हालांकि, इस बैठक में आसियान के बाहर के जिन देशों को बुलाया गया है, उनमें भारत, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण कोरिया और जापान शामिल हैं। 


दक्षिण चीन सागर को लेकर आसियान में शामिल फिलीपींस के अलावा वियतनाम, मलयेशिया, ब्रुनेई के चीन से विवाद हैं। इन्हीं मुद्दों को उठाने के लिए आसियान के अन्य सदस्य देश- इंडोनेशिया, थाईलैंड, म्यांमार, सिंगापुर, लाओस और कंबोडिया साथ आए हैं और बैठक कर रहे हैं।
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