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जापान : मुसीबत बना रेडियोधर्मी पानी, समुद्र में डालने को लेकर पसोपेश में सरकार
Wed, 14 Aug 2019 05:23 AM IST
Avdhesh Kumar
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
Published by: Avdhesh Kumar
Updated Wed, 14 Aug 2019 05:23 AM IST
सार
- मातसुमोतो ने इस रेडियोधर्मी पानी पर फैसले लिए कोई समय सीमा तय करने से मना कर दिया है
- फुकुशिमा संयंत्र ने एक हजार टैंकों में 10 लाख लीटर से ज्यादा पानी जमा कर रखा है
- क्या किया जाए यह बड़ा सवाल बना हुआ है
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
वर्ष 2011 में आई सुनामी के दौरान फुकुशिमा के दाईची परमाणु संयंत्र के पिघल चुके तीन रिएक्टरों के रेडियोधर्मिता वाले पानी को लेकर जापान में मुसीबत बनी हुई है। संयंत्र का संचालन करने वाली कंपनी ‘टेपको’ ने कह दिया है कि उसके पास अब और रेडियोधर्मी पानी को रखने की जगह नहीं बची है जबकि सरकार इस पसोपेश में है कि वह क्या करे?
जापान सरकार के पास इस रेडियोधर्मी पानी के निस्तारण का एक विकल्प इसे प्रशांत महासागर में छोड़ने का है। लेकिन इस पर यहां रहने वाले मछुआरों ने विरोध शुरू कर दिया है क्योंकि रेडियोधर्मी पानी से उनका मछली पालन और खेती प्रभावित हो जाएगी। फुकुशिमा संयंत्र ने एक हजार टैंकों में 10 लाख लीटर से ज्यादा पानी जमा कर रखा है।
संयंत्र को संचालित करने वाली टोक्यो इलेक्ट्रिक पावर कंपनी का कहना है कि वह और ज्यादा टैंक बनाएगी ताकि 13 लाख 70 हजार लीटर पानी जमा हो सके। लेकिन कंपनी के पास 2022 तक इतना पानी जमा हो जाएगा जिसका बाद में क्या किया जाए यह बड़ा सवाल बना हुआ है। कंपनी का कहना है कि उसके पास अब और रेडियोधर्मी पानी रखने की जगह नहीं है। ऐसे में वह सरकार और लोगों पर समस्या के समाधान के लिए दबाव बना रही है।
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जापान सरकार के पास इस रेडियोधर्मी पानी के निस्तारण का एक विकल्प इसे प्रशांत महासागर में छोड़ने का है। लेकिन इस पर यहां रहने वाले मछुआरों ने विरोध शुरू कर दिया है क्योंकि रेडियोधर्मी पानी से उनका मछली पालन और खेती प्रभावित हो जाएगी। फुकुशिमा संयंत्र ने एक हजार टैंकों में 10 लाख लीटर से ज्यादा पानी जमा कर रखा है।
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संयंत्र को संचालित करने वाली टोक्यो इलेक्ट्रिक पावर कंपनी का कहना है कि वह और ज्यादा टैंक बनाएगी ताकि 13 लाख 70 हजार लीटर पानी जमा हो सके। लेकिन कंपनी के पास 2022 तक इतना पानी जमा हो जाएगा जिसका बाद में क्या किया जाए यह बड़ा सवाल बना हुआ है। कंपनी का कहना है कि उसके पास अब और रेडियोधर्मी पानी रखने की जगह नहीं है। ऐसे में वह सरकार और लोगों पर समस्या के समाधान के लिए दबाव बना रही है।
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बड़े टैंकों में रखा जाता है पानी
आठ साल पहले सूनामी के बाद रिएक्टर से रेडियोधर्मी पानी रिसकर संयंत्र के पास भूजल व बारिश के पानी में मिल गया है। हालांकि इस पानी को साफ किया जाता है लेकिन फिर भी यह रेडियोधर्मी होता है इसलिए इसे बड़े बड़े टैंकों में जमा करके रखा जाता है। परमाणु विशेषज्ञ और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा आयोग के सदस्य मानते हैं कि पानी को समुद्र में फेंकना ही एक व्यवहारिक विकल्प बचा है।
समय सीमा तय करने से इनकार
टेपको प्रवक्ता जुनिशी मातसुमोतो के मुताबिक प्लांट को बंद करने के बाद निकलने वाले जहरीले पदार्थों को इसी परिसर में रखा जाना चाहिए क्योंकि लंबे समय तक भंडारण से रेडियोधर्मिता धीरे धीरे खत्म हो जाती है। लेकिन इससे प्लांट को बंद करने के काम में बाधा आएगी। मातसुमोतो ने इस रेडियोधर्मी पानी पर फैसले लिए कोई समय सीमा तय करने से मना कर दिया है।
समय सीमा तय करने से इनकार
टेपको प्रवक्ता जुनिशी मातसुमोतो के मुताबिक प्लांट को बंद करने के बाद निकलने वाले जहरीले पदार्थों को इसी परिसर में रखा जाना चाहिए क्योंकि लंबे समय तक भंडारण से रेडियोधर्मिता धीरे धीरे खत्म हो जाती है। लेकिन इससे प्लांट को बंद करने के काम में बाधा आएगी। मातसुमोतो ने इस रेडियोधर्मी पानी पर फैसले लिए कोई समय सीमा तय करने से मना कर दिया है।