तेल निर्यातक देशों के समूह से अलग होगा कतर, 60 साल से था समूह का सदस्य
कतर करीब 60 वर्षों तक आर्गेनाइजेशन ऑफ दि पेट्रोलियम एक्सपोर्टिंग कंट्रीज (ओपीईसी) का सदस्य रहने के बाद अब अगले महीने से समूह से बाहर होने का निर्णय लिया है। घोषणा के मुताबिक तेल संपन्न कतर पहली जनवरी, 2019 में ओपीईसी से बाहर हो जाएगा।
कतर अब नेचुरल गैस के उत्पादन पर ज्यादा जोर देगा। फिलहाल कतर में सालाना नैचुरल गैस का उत्पादन 77 मिलियन टन होता है, जिसे आने वाले दिनों में बढ़ा कर 110 मिलियन किए जाने की योजना है। बता दें कि कतर लिक्विफाइड नेचुरल गैस (एलएनजी) का सबसे पड़ा सप्लायर है। दुनियाभर के करीब 30 फीसदी एलएनजी का उत्पादन यहीं होता है।
आइए जानते हैं ओपेक के तेल उत्पादन और उससे जुड़ी बातें
आखिर ऐसा क्या हुआ कि कतर ने ये कदम उठाया
पहले जानने की कोशिश करते हैं कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि कतर को यह कदम उठाना पड़ा। सऊदी अरब के दबदबे के बीच 1961 में इस समूह में शामिल हुए कतर ने ओपेक से बाहर निकलने का कदम अप्रत्याशित है। आखिर ऐसा क्या हुआ कि कतर 60 साल तक समूह का सदस्य रहने के बाद अचानक उसे यह कदम उठाना पड़ा। जानकार बताते हैं कि कतर पर सऊदी अरब के साथ बिगड़े रिश्ते का असर पड़ रहा था।
कतर के ओपेक छोड़ने का बड़ा कारण सऊदी अरब की अगुवाई में कुछ खाड़ी देशों द्वारा उससे दूरी बना लेना तो है ही, लेकिन उसका यह फैसला कुछ और भी इशारा कर रहा है।
लगातार तेल उत्पादन और कीमत निर्धारण के साथ-साथ दुनियाभर के देशों का स्वच्छ ईंधन की तरफ आकर्षण को देखते हुए कतर ने आखिर इससे निकलने का फैसला लिया। ओपेक ने पिछले वर्ष करीब 44 फीसदी का ही उत्पादन किया।