ईरानी कमांडर सुलेमानी के जनाजे में जुटी भारी भीड़, 'अमेरिका की मौत हो' के लगे नारे

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Published by: Priyesh Mishra Updated Sat, 04 Jan 2020 01:49 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : social media
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इराक में शनिवार को ईरानी कमांडर कासिम सुलेमानी और इराकी अर्द्धसैन्य बल के उप प्रमुख अबु महदी अल मुहंदिस के अंतिम संस्कार के लिए निकाले गये जुलूस में हजारों लोग शामिल हुए, जो अमेरिका की मौत हो नारा लगाते हुये चल रहे थे। दोनों की शुक्रवार को अमेरिकी हवाई हमले में मौत हो गई।
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ग्रीन जोन सरकार और राजनयिक परिसर की तरफ जाने से पहले, बगदाद के काजिमिया में जुलूस निकाली गई, जहाँ होने वाले राजकीय अंतिम संस्कार में कई शीर्ष गणमान्य लोग भाग लेने वाले हैं।

कौन थे अमेरिकी हमले में मारे गए जनरल कासिम सुलेमानी
अमेरिका के हवाई हमले में ईरान के जनरल कासिम सुलेमानी की मौत ने दोनों देशों के बीच तनाव का नया अध्याय खोल दिया है। मजबूत अमेरिका के खिलाफ ईरान की बदले की बात कहना ये बताता है कि जनरल सुलेमानी उसके लिए कितने अहम थे। साथ ही अमेरिका का रुख भी बता रहा है कि जनरल सुलेमानी को खत्म करना उसके लिए क्यों जरूरी था। आइए जानते हैं कौन थे जनरल सुलेमानी और वह ईरान के लिए कितने महत्वपूर्ण थे।

अमेरिका के कट्टर प्रतिद्वंद्वी ईरान के लिए जनरल कासिम सुलेमानी बेहद महत्वपूर्ण थे। पश्चिम एशिया के सभी अभियानों को वही अंजाम दिया करते थे। जनरल सुलेमानी को अपने देश और देश के बाहर एक महत्वपूर्ण हस्ती का दर्जा मिला हुआ था। सीरिया और इराक युद्ध में उनकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती थी। 

मिडिल ईस्ट में बढ़ाया ईरान का प्रभाव 
मिडिल ईस्ट में ईरानी प्रभाव बढ़ाने में उनकी बड़ी भूमिका रही। इसके चलते अमेरिका के समर्थक देशों सऊदी अरब और इस्राइल को ईरान का मुकाबला करने में दिक्कते आने लगीं। इससे पहले भी उन्हें मारने की कई कोशिशें हुईं, लेकिन वह हर बार बच निकले। 20 सालों के दौरान पश्चिम, इस्राइल और अरब देशों की खुफिया एजेंसियां उनके पीछे पड़ी रहीं।

अमेरिका के लिए सिरदर्द थे सुलेमानी
इराक में सुलेमानी की काफी अहम भूमिका थी। इस्लामिक स्टेट के आतंक से बगदाद को बचाने के लिए उनके नेतृत्व में ईरान समर्थित फोर्स का गठन हुआ था। जिसका नाम पॉपुलर मोबिलाइजेशन फोर्स था। जनरल सुलेमानी अमेरिका के बहुत पुराने दुश्मन थे। 1980 के दशक में ईरान और इराक के बीच हुई खूनी जंग में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका थी। इस युद्ध में अमेरिका ने इराक के तानाशाह सद्दाम हुसैन का साथ दिया था। 

 

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