पाक में हिंदू लड़की के जबरन धर्म परिवर्तन और निकाह के खिलाफ ब्रिटेन में प्रदर्शन
पाकिस्तानी मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और ब्रिटेन में रह रहे भारतीय समुदाय के लोगों ने ब्रिटेन में पाकिस्तानी उच्च आयोग के सामने प्रदर्शन किया।
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ब्रिटेन में मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और भारतीय प्रवासियों ने ‘जस्टिस फॉर महक कुमारी’ अभियान के तहत पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों पर होने वाले अत्याचारों के खिलाफ पाकिस्तानी दूतावास के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। हिंदू लड़की महक का पाकिस्तान में अपहरण कर जबरन धर्म परिवर्तन कर दिया गया था।
प्रदर्शनकारियों ने कहा, पाकिस्तान में अल्पसंख्यक सुरक्षित नहीं हैं। वहां अल्पसंख्यक समुदाय की लड़कियों को अगवा कर जबरन धर्म परिवर्तन कराकर उन्हें इस्लाम कबूलने के लिए मजबूर किया जाता है और उनकी शादी किसी मुस्लिम से कर दी जाती है।
पाकिस्तान में मानवाधिकारों को आए दिन ताक पर रख ऐसी घटनाएं होती हैं। लोगों ने कहा, पाकिस्तान दूतावास अल्पसंख्यकों के खिलाफ हो रही बर्बरता का जवाब दे। इस दौरान शर्म करो पाकिस्तान के नारे लगाए गए और मांग रखी कि पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान देश में बाल शोषण के इस सबसे बड़े रूप के खिलाफ कार्रवाई करें।
गिलगित-बाल्टिस्तान में मानव अधिकारों को कुचला गया : पीओके के नेता
पाकिस्तान ने कश्मीर को लेकर झूठ बोलने के लिए लगभग हर अंतरराष्ट्रीय मंच का इस्तेमाल किया है। साथ ही कश्मीरी मानवाधिकारों के रक्षक होने के कई दावे भी किए हैं। लेकिन, खुद अपने कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) के गिलगित-बाल्टिस्तान में जारी मानवाधिकार उल्लंघनों को छिपाने की कोशिश करता रहा।
यहां रहने वाले लोगों के मानवाधिकारों को लगातार पाकिस्तानी शासन द्वारा रौंदा गया है। अब जम्मू कश्मीर नेशनल अवामी पार्टी के चेयरमैन सरदार लियाकत हयात ने कश्मीर मुद्दे से निपटने में पाकिस्तान के दोहरे चरित्र पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा, इससे ज्यादा दुर्भाग्यपूर्ण और क्या हो सकता है कि पाकिस्तान कश्मीर को खुद में जोड़ने की बात ऐसे वक्त कर रहा है जब बलूचिस्तान, सिंध और खैबर पख्तूनख्वा में भी वह मानवाधिकारों के उल्लंघन को रोकने में विफल हो रहा है।
पाकिस्तानी नेता संसद और विधानसभाओं में कश्मीर को लेकर बयान दे रहे हैं। हमने सांसदों और विधायकों को इतना बेशर्म नहीं देखा। पीओके में भूमि और संसाधनों को धमकी के जरिये लूटा गया है। वहां के लोगों को ही मौलिक अधिकारों से वंचित कर दिया। पाकिस्तान की राजनीति में दखल रखने वाले सेना के अधिकारियों ने पीओके के लोगों के साथ गुलामों जैसा व्यवहार किया है।