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अमेरिका में निजी अस्पतालों की लूट: मरीजों को थमा रहे असल खर्च का पांच गुना तक बिल

Tue, 15 Jun 2021 04:19 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन Published by: Harendra Chaudhary Updated Tue, 15 Jun 2021 04:19 PM IST
सार

विश्लेषकों का कहना है कि जिस समय अमेरिका में हेल्थ केयर फॉर ऑल की मांग जनता के स्तर पर जोर पकड़ रही है, जेएचयू की रिपोर्ट से प्राइवेट सेक्टर आधारित वर्तमान चिकित्सा व्यवस्था और भी ज्यादा कठघरे में खड़ी होगी। हालांकि अस्पतालों का दावा है कि जेएचयू ने जिस तरह लागत और बिल की तुलना की है, वह तरीका गुमराह करने वाला है...

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Private hospitals in US charging up to five times the actual cost from patients
अस्पताल - फोटो : PTI (फाइल फोटो)

विस्तार

अमेरिका में प्राइवेट अस्पताल किस तरह मरीजों को लूटते हैं, इसका खुलासा अब एक अध्ययन से हुआ है। जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी (जेएचयू) के इस अध्ययन में अमेरिका में कमाई के लिहाज से 100 टॉप अस्पतालों को शामिल किया गया। 2018 से 2020 के मध्य तक के इन अस्पतालों के तमाम बिल के अध्ययन से सामने आया कि इनमें से ज्यादातर अस्पताल अपनी असल लागत से पांच गुना ज्यादा बिल मरीजों को थमा देते हैं। अध्ययन रिपोर्ट के मुताबिक इनमें से ज्यादातर बड़ी संख्या में प्राइवेट अस्पतालों ने उन मरीजों पर मुकदमा कर दिया, जो पूरा बिल चुकाने में असमर्थ थे।

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अध्ययनकर्ताओं का कहना है कि पूरे अमेरिका में ऐसे मुकदमे बहुत आम हैं। इस अध्ययन से जुड़े अनुसंधानकर्ता मार्टी मेकेरी ने वेबसाइट एक्सियोस.कॉम से कहा- ‘जिन अस्पतालों ने ऐसे तरीके आजमाए हैं, उनकी वजह से मेडिकल प्रोफेशन में लोगों का भरोसा खत्म हो जाने का खतरा पैदा हो गया है।’ अध्ययनकर्ताओं ने बताया है कि प्राइवेट अस्पतालों में इलाज कराने का खर्च लगातार बढ़ रहा है। कई मामलों में यह उससे कई गुना ज्यादा होता है, जितने के लिए अमेरिका सरकार की मेडिकेयर योजना के तहत भुगतान किया जाता है।
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अध्ययन रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले साल महामारी के वर्ष में भी अस्पतालों ने ऊंचे बिल वसूलने की रवायत जारी रखी। हालांकि उसके पहले के दो वर्षों की तुलना में 2020 में मरीजों पर मुकदमे कम संख्या में ठोके गए। लेकिन अभी यह साफ नहीं है कि क्या इसका कारण महामारी के कारण बरती गई उदारती थी।
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अध्ययन रिपोर्ट के मुताबिक कुछ सबसे ज्यादा कमाई वाले अस्पतालों ने अपने यहां इलाज कराने की ऊंची फीस तय कर रखी है। यह फीस इलाज पर असल में आने वाली लागत से दस गुना तक ज्यादा होती है। अमेरिका में अस्पतालों को अपनी फीस और चिकित्सा संबंधी तमाम शुल्क खुद तय करने का अधिकार मिला हुआ है। अध्ययन रिपोर्ट के मुताबिक जिन लोगों ने मेडिकल बीमा करा रखा है, उनकी तरफ से बीमा कंपनी अस्पतालों से सौदेबाजी कर लेती है। इस कारण उन्हें व्यवहार में बिल अपेक्षाकृत कम चुकाना पड़ता है। लेकिन जिनके पास बीमा पॉलिसी नहीं है, उन पर ऐसी फीस दर का बहुत बुरा असर होता है। साथ ही इससे कुल मिला कर इलाज की दरें दूसरी जगहों पर भी महंगी हो जाती हैं।

इस अध्ययन में जेएचयू के अनुसंधानकर्ताओं ने कमाई के लिहाज से 100 टॉप अस्पतालों के 2018 के तमाम बिलों की लागत से तुलना की। उन्होंने पाया कि उनमें से 57 अस्पतालों ने वास्तविक लागत से पांच गुना से भी अधिक रकम मरीजों से वसूली। नौ अस्पताल ऐसे थे, जिन्होंने दस गुना ज्यादा बिल मरीजों को थमाया। सबसे ज्यादा कमाई अस्पताल ने तो 13 गुना ज्यादा रकम वसूली। अध्ययनकर्ताओं ने ध्यान दिलाया है कि जिन 57 अस्पतालों ने पांच गुना से ज्यादा बिल थमाए, उनमें 34 ऐसे हैं, जो खुद को नॉन प्रोफिट कहते हैं। यानी जिनका दावा है कि उनका मकसद मुनाफा कमाना नहीं है।


विश्लेषकों का कहना है कि जिस समय अमेरिका में हेल्थ केयर फॉर ऑल (सबके लिए मुफ्त इलाज) की मांग जनता के स्तर पर जोर पकड़ रही है, जेएचयू की रिपोर्ट से प्राइवेट सेक्टर आधारित वर्तमान चिकित्सा व्यवस्था और भी ज्यादा कठघरे में खड़ी होगी। हालांकि अस्पतालों का दावा है कि जेएचयू ने जिस तरह लागत और बिल की तुलना की है, वह तरीका गुमराह करने वाला है। जेएचयू की रिपोर्ट जारी होने के बाद अमेरिकन हॉस्पिटल एसोसिएशन के प्रवक्ता ने मीडिया से दावा किया कि अस्पताल और हेल्थ सिस्टम कमजोर वर्ग के मरीजों की सेहत की रक्षा के लिए अपनी तरफ से बढ़-चढ़ कर भूमिका निभा रहे हैं। लेकिन जानकारों का कहना है कि ऐसे दावों को लोग अब आसानी से स्वीकार करेंगे, इसकी संभावना कम है।

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