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इस्राइल: बहुमत का इंतजाम नहीं कर पाए नेतन्याहू, अब किसकी बनेगी सरकार?
Wed, 05 May 2021 05:50 PM IST
Harendra Chaudhary
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, यरुशलम
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, यरुशलम
Published by: Harendra Chaudhary
Updated Wed, 05 May 2021 05:50 PM IST
सार
विश्लेषकों का कहना है कि अगर लेपिड को राष्ट्रपति से आमंत्रण मिलता है, तब भी नया गठबंधन बनाने की कोशिश में मुख्य किरदार नफताली बेनेट ही रहेंगे। बेनेट पूर्व रक्षा मंत्री हैं और दक्षिणपंथी यामिना पार्टी के नेता हैं...
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इस्रायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू
- फोटो : PTI (फाइल फोटो)
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विस्तार
इस्राइल में नई सरकार के गठन के लिए तय समयसीमा मंगलवार आधी रात गुजर गई। उस समय तक प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू नई सरकार बनाने के लिए बहुमत का इंतजाम नहीं कर पाए। समयसीमा खत्म होने के साथ ही नेतन्याहू की लिकुड पार्टी ने एलान किया कि उसने सरकार गठन का आमंत्रण राष्ट्रपति रेउवेन रिवलिन को लौटा दिया है। अब गेंद एक बार फिर राष्ट्रपति के पाले में है। लेकिन वे अगला आमंत्रण जिस किसी नेता को दें, वह बहुमत जुटा पाएगा, इसकी संभावना भी फिलहाल कम है।
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पिछले 23 मार्च को हुए आम चुनाव में किसी पार्टी को बहुमत नहीं मिला था। लिकुड पार्टी पहले नंबर पर रही थी। दूसरे नंबर पर येश अतीड पार्टी आई थी। अधिक संभावना यही है कि येश अतीड पार्टी के नेता यायर लैपिड को सरकार बनाने की कोशिश करने के लिए अब आमंत्रित किया जाएगा। लेपिड टीवी न्यूज एंकर का करियर छोड़ कर 2012 में राजनीति में आए थे। उसके बाद वे एक बार देश के वित्त मंत्री रह चुके हैं।
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विश्लेषकों का कहना है कि अगर लेपिड को राष्ट्रपति से आमंत्रण मिलता है, तब भी नया गठबंधन बनाने की कोशिश में मुख्य किरदार नफताली बेनेट ही रहेंगे। बेनेट पूर्व रक्षा मंत्री हैं। वे दक्षिणपंथी यामिना पार्टी के नेता हैं। मार्च में हुए चुनाव में 120 सदस्यीय नेसेट (संसद) में यामिना पार्टी को सिर्फ सात सीटें मिली थीं। लेकिन बेनेट की हैसियत का अंदाजा इससे ही लगता है कि नेतन्याहू और लेपिड दोनों उन्हें प्रधानमंत्री पद देने की पेशकश कर चुके हैं। दोनों ने उनसे कहा था कि वे आधे-आधे संसदीय कार्यकाल के लिए सरकार का नेतृत्व करने का समझौता करें और पहले नेता का पद वे ही संभालें।
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बेनेट ने कहा है कि उनकी प्राथमिकता देश में दक्षिणपंथी सरकार के गठन की है। लेकिन साथ ही उन्होंने अलग-अलग विचारों की पार्टियों को मिला कर साझा सरकार बनाने की संभावना से इनकार नहीं किया है। इस्राइल के राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि अगर बेनेट मन बना लें, तो नई सरकार हफ्ते भर के भीतर बन सकती है।
अमेरिकी टीवी चैनल सीएनएन ने पर्यवेक्षकों के हवाले से कहा है कि बेनेट नेतन्याहू के नेतृत्व में अगली सरकार बनने के पक्षधर नहीं थे। इसीलिए उन्होंने नेतन्याहू को मिले आमंत्रण की समयसीमा खत्म तक खामोश रहने का फैसला किया। वे जनता में ये धारणा बनने देना चाहते थे कि नेतन्याहू बहुमत जुटाने में नाकाम रहे। गौरतलब है कि नेतन्याहू दक्षिणपंथी नेता हैं। इसलिए बेनेट यह नहीं चाहते थे कि नेतन्याहू के नेतृत्व में सरकार ना बनने का दोष उनके माथे पर आए।
नेतन्याहू ने आखिरी वक्त पर बेनेट की इस दुविधा का फायदा उठाने की कोशिश की। उन्होंने एक वीडियो जारी कर बेनेट से ये एलान करने को कहा कि वे किसी भी हाल में यायर लेपिड की सरकार का समर्थन नहीं करेंगे। नेतन्याहू ने कहा- मैं दक्षिणपंथी हूं। आप (बेनेट) साबित कीजिए कि अभी भी आप दक्षिणपंथी हैं। लेकिन बेनेट पर इसका कोई असर नहीं हुआ।
बार-बार किसी पार्टी को बहुमत ना मिलने के कारण मार्च में दो साल के अंदर इस्राइल में चौथी बार आम चुनाव हुआ था। लेकिन उसमें भी गतिरोध बना रहा। इस बीच प्रधानमंत्री नेतन्याहू पर पिछले मई घूसखोरी, धोखाधड़ी और विश्वासघात के आरोप में मुकदमा चल रहा है। वे देश में सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहने वाले नेता हैं। फिलहाल उनका सितारा अस्त होता लग रहा है। लेकिन ऐसे हालात से वापसी में वे माहिर रहे हैं। इसलिए अभी भी इस्राइल के सियासी मंच पर असमंजस बना हुआ है।