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रूस के चुनाव में समतल नहीं थी मुकाबले की जमीन: पुतिन की पार्टी की गिरी लोकप्रियता

Mon, 20 Sep 2021 06:49 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, मास्को
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, मास्को Published by: Harendra Chaudhary Updated Mon, 20 Sep 2021 06:49 PM IST
सार

पर्यवेक्षकों का कहना है कि पुतिन प्रशासन ने शुरुआत से ही इस चुनाव में मुकाबले की जमीन गैर-बराबर कर दी थी। पुतिन के कई प्रमुख विरोधियों को चुनाव नहीं लड़ने दिया गया। 17 से 19 सितंबर तक चले मतदान में बड़े पैमाने पर चुनावी धांधली की शिकायतें मिलीं...

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President Vladimir Putin United Russia party lost nearly 12 percent of its vote in Russian parliament Duma election
व्लादिमीर पुतिन - फोटो : Social media

विस्तार

रूस के संसदीय चुनाव की मतगणना शुरू होते ही राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की यूनाइटेड रशिया पार्टी ने बढ़त बना ली। अब ये साफ है कि उसे उतना नुकसान नहीं होगा, जितना चुनाव पूर्व जनमत सर्वेक्षणों में संभावना जताई गई थी। ज्यादातर सर्वेक्षणों में यूनाइटेड रशिया पार्टी को 30 फीसदी के आसपास वोट मिलने की संभावना बताई गई थी। लेकिन पार्टी को लगभग 42 फीसदी वोट मिलने के संकेत हैं। लेकिन इससे भी यह जाहिर है कि उसकी गिरी लोकप्रियता में गिरावट आई है। 2016 में हुए ड्यूमा (रूसी संसद) के पिछले चुनाव में यूनाइटेड रशिया पार्टी को 54 फीसदी से कुछ ज्यादा वोट मिले थे।

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पर्यवेक्षकों का कहना है कि पुतिन प्रशासन ने शुरुआत से ही इस चुनाव में मुकाबले की जमीन गैर-बराबर कर दी थी। पुतिन के कई प्रमुख विरोधियों को चुनाव नहीं लड़ने दिया गया। 17 से 19 सितंबर तक चले मतदान में बड़े पैमाने पर चुनावी धांधली की शिकायतें मिलीं। अखबार द मास्को टाइम्स के मुताबिक चार हजार से अधिक जगहों पर मतपेटियों में अनुचित ढंग से मतपत्र भरने की खबरें आईं। लेकिन चुनाव आयोग ने इनमें से कुछ को जांच कराने के लिए स्वीकार किया।
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द मास्को टाइम्स के मुताबिक चुनाव से पहले पुतिन विरोधी नेता अलेक्सी नवालनी के कई समर्थकों को गिरफ्तार कर लिया गया। विपक्षी कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ रशियन फेडरेशन के कुछ प्रमुख उम्मीदवारों को चुनाव लड़ने से रोक दिया गया। पर्यवेक्षकों का कहना है कि इन कार्रवाइयों से चुनाव में विपक्ष समर्थक मतदाताओं की दिलचस्पी घट गई। इसी वजह से मतदान प्रतिशत बेहद कम सिर्फ लगभग 45 फीसदी रहा।
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लेकिन इसके बीच यूनाइटेड रशिया पार्टी के वोट में लगभग 12 फीसदी की गिरावट आई है। जबकि प्रमुख विपक्षी कम्युनिस्ट पार्टी के वोट में 10 फीसदी से ज्यादा बढ़ोतरी हुई है। 2016 में कम्युनिस्ट पार्टी को सिर्फ 13.3 फीसदी वोट मिले थे। इस बार मतगणना में उसे 24 प्रतिशत से अधिक वोट मिल रहे हैँ।

रूस में ड्यूमा का चुनाव प्रत्यक्ष और आनुपातिक प्रणाली के मेल से होता है। इसके तहत 450 सदस्यों वाली ड्यूमा के आधे सदस्य सीधे निर्वाचन क्षेत्रों से चुने जाते हैँ। जबकि आधी सीटें पार्टियों को मिले वोट प्रतिशत के आधार पर आवंटित की जाती हैँ। इस प्रक्रिया के पूरी होने में समय लगता है। इसलिए अभी ये साफ नहीं है कि अंत किस पार्टी को कितनी सीटें मिलेंगी। 2016 में यूनाइटेड रशिया को 334 सीटें मिली थीँ। पर्यवेक्षकों के मुताबिक इस बार ये संख्या वहां तक पहुंच पाएगी, ये संभावना कम है।

ड्यूमा में उन दलों को नुमाइंदगी मिलती है, जिन्हें कुल पड़े वोटों में कम से कम पांच फीसदी हासिल हुए हों। रूसी मीडिया में छपी रिपोर्टों के मुताबिक मतगणना के शुरुआती रूझानों से यह साफ हुआ है कि यूनाइटेड रशिया और कम्युनिस्ट पार्टी के अलावा एलडीपीआर, न्यू पीपुल पार्टी, और जस्ट रशिया पार्टी इस बार नुमाइंदगी पाने में सफल रहेंगी।

अलेक्सी नवालनी ने इस बार पुतिन विरोधी मतदाताओं से ‘स्मार्ट वोटिंग’ की रणनीति अपनाने की अपील की थी। इसके तहत उन्होंने आह्वान किया था कि पुतिन विरोधी मतदाता अपने क्षेत्र में उस पार्टी को वोट दें, जो यूनाइटेड रशिया को टक्कर देती दिखे। पर्यवेक्षकों के मुताबिक चुनाव नतीजों से लगता है कि ये रणनीति आंशिक रूप से ही सफल हुई है। 

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