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ब्रिक्स: भारत के दौरे पर आएंगे रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, 11 सितंबर को पीएम मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक

Tue, 08 Sep 2026 03:12 PM IST
राहुल कुमार वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, मॉस्को
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, मॉस्को Published by: राहुल कुमार Updated Tue, 08 Sep 2026 03:12 PM IST
सार

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए भारत दौरे पर आएंगे। 11 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स सम्मेलन से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति पुतिन के बीच द्विपक्षीय वार्ता प्रस्तावित है। जानें दोनों देशों के बीच किन मुद्दों पर हो सकते है समझौता...

 

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President Vladimir Putin is scheduled to hold bilateral talks with PM Modi on Friday
व्लादिमीर पुतिन और पीएम मोदी - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच 11 सितंबर को द्विपक्षीय बैठक होने वाली है। क्रेमलिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की शुक्रवार को होने वाली द्विपक्षीय बैठक की पुष्टि करते हुए भारत को रूस का "रणनीतिक साझेदार" बताया है।

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रूसी राष्ट्रपति के दिल्ली पहुंचने से पहले क्रेमलिन के प्रवक्ता और राष्ट्रपति पुतिन के प्रेस सचिव दिमित्री पेस्कोव ने मंगलवार को मीडिया से वर्चुअल बातचीत की। उनके बयानों में भारत-रूस रिश्तों की गर्माहट के साथ-साथ बदलती वैश्विक व्यवस्था की झलक भी दिखाई दी। पेस्कोव ने कहा, दोनों देशों के बीच आपसी संपर्क बहुत अहम होंगे, खासकर प्रधानमंत्री मोदी के साथ बैठक। जैसा कि आप जानते हैं, भारत और रूस के नेताओं के बीच बहुत करीबी संबंध हैं। उनके संबंध बहुत व्यावहारिक हैं और वे एक-दूसरे के साथ इतने ईमानदार हैं कि वैश्विक एजेंडे और हमारे आपसी संबंधों से जुड़े सबसे संवेदनशील मुद्दों पर बहुत खुले और रचनात्मक तरीके से चर्चा कर सकते हैं।

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ब्रिक्स कोई संगठन नहीं है; यह एक क्लब है- पेस्कोव

ब्रिक्स की अहमियत पर पेस्कोव ने प्रकाश डालते हुए कहा, मैं आपको याद दिलाना चाहता हूं कि ब्रिक्स कोई संगठन नहीं है; यह एक क्लब है। हमारे पास कोई चार्टर, नियम या स्थायी कार्यालय नहीं है। बल्कि, यह उन देशों का एक क्लब है जो इस बात पर एक जैसी सोच रखते हैं कि दुनिया में काम कैसे होने चाहिए और अलग-अलग क्षेत्रों में सहयोग कैसे किया जाना चाहिए।

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उन्होंने ब्रिक्स के तीन प्रमुख स्तंभों का जिक्र करते हुए कहा, रूस ब्रिक्स सहयोग के तीन मुख्य स्तंभों - राजनीति और सुरक्षा; अर्थव्यवस्था और वित्त; और सांस्कृतिक व मानवीय संपर्क - के और विकास में योगदान देने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। बेशक, हमारी अपनी कई पहल हैं जिन्हें हम इस समूह के भीतर बढ़ावा दे रहे हैं। हम ब्रिक्स के भीतर सहयोग के अलग-अलग तरीकों में ज्यादा से ज्यादा देशों को शामिल करने के विचार का समर्थन करते हैं।

पार्टनर कंट्री के कॉन्सेप्ट की प्रशंसा करते हुए पेस्कोव बोले, 2024 में, पार्टनर देशों की एक नई श्रेणी - 'ब्रिक्स पार्टनर कंट्री' श्रेणी - बनाई गई थी, और अब यह बहुत अच्छी तरह से विकसित हो रही है। बेलारूस, बोलीविया, वियतनाम, कजाकिस्तान, क्यूबा, नाइजीरिया, मलेशिया, थाईलैंड, युगांडा और उज्बेकिस्तान को पार्टनर का दर्जा दिया गया है। इन देशों के प्रतिनिधियों को धीरे-धीरे अलग-अलग वर्किंग ग्रुप और फॉर्मेट में शामिल किया जा रहा है, और हम इसे एक बहुत ही सकारात्मक विकास मानते हैं।

उन्होंने बताया कि रियो डी जनेरियो में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान, रूसी प्रतिनिधिमंडल ने संयुक्त राष्ट्र में सुधार और प्रमुख अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के कामकाज को बेहतर बनाने से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर एक्सपर्ट लेवल पर बातचीत शुरू करने की पहल की। बोले, "हम इस पहल को बहुत महत्वपूर्ण मानते हैं, और ब्रिक्स के भीतर कई देशों ने इसका समर्थन किया।"


'अमेरिकी प्रतिबंध विधेयक अवैध'
भारत के रूसी ऊर्जा आयात पर अमेरिका की ओर से प्रतिबंध लगाने संबंधी प्रस्ताव पर पेस्कोव ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने अमेरिकी प्रतिबंध विधेयक को “अवैध” करार दिया। पेस्कोव ने ब्रिक्स को सिर्फ आर्थिक समूह के रूप में देखने से आगे बढ़ते हुए इसे बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि भारत ने अपनी ब्रिक्स अध्यक्षता में काफी निवेश किया है और संगठन की विचारधारा बहुध्रुवीय दुनिया की विचारधारा है। उनके अनुसार एकध्रुवीय दुनिया ढह रही है और अपनी प्रतिस्पर्धात्मकता खो रही है। उनके मुताबिक, दिल्ली में होने वाला ब्रिक्स सम्मेलन केवल सदस्य देशों की बैठक नहीं है। इसके पीछे दुनिया की उस नई व्यवस्था की बहस भी है जिसमें रूस, भारत, चीन और दूसरे उभरते देश वैश्विक निर्णय प्रक्रिया में अधिक प्रभाव की मांग कर रहे हैं।


पेस्कोव ने बताया कि रूस और ब्रिक्स देशों के बीच अब करीब 90 प्रतिशत भुगतान राष्ट्रीय मुद्राओं में हो रहा है। यह बयान ऐसे समय आया है जब डॉलर के प्रभुत्व और वैकल्पिक भुगतान प्रणालियों को लेकर ब्रिक्स देशों के बीच चर्चा तेज है। इसके साथ ही पेस्कोव ने भारत-रूस संबंधों को काफी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा, "कहानी केवल तेल और रक्षा तक सीमित नहीं है।" पेस्कोव ने भारत में नए परमाणु संयंत्र के विकास में आगे प्रगति की उम्मीद जताई। उन्होंने रूस में पढ़ने वाले भारतीय छात्रों का भी स्वागत किया।

नए परमाणु ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने पर हो सकती है बातचीत
रूसी राष्ट्रपति के प्रवक्ता पेस्कोव ने कहा कि, रूसी कच्चा तेल खरीदने वाले देशों पर 100% टैरिफ लगाने का प्रस्तावित अमेरिकी कदम अवैध और अस्वीकार्य है। इस दौरान उन्होंने कहा कि भारत के साथ नए परमाणु ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने को लेकर बातचीत का इंतजार कर रहे हैं।  ब्रिक्स सम्मेलन का बचाव करते हुए रूसी प्रतिनिधि ने कहा कि यह संगठन किसी देश के खिलाफ नहीं है। 

रूस यूक्रेन युद्ध पर चर्चा संभव
यह मुलाकात ऐसे समय हो रही है जब दुनिया बहुध्रुवीय व्यवस्था की ओर बढ़ने, पश्चिमी प्रतिबंधों और रूस-यूक्रेन युद्ध जैसे कई बड़े सवालों से जूझ रही है। ऐसा माना जा रहा है कि पीएम मोदी-राष्ट्रपति पुतिन बातचीत के दौरान यूक्रेन युद्ध और शांति की कोशिशें भी अहम मुद्दा हो सकती हैं। भारत ने शुरुआत से ही युद्ध के समाधान के लिए बातचीत और कूटनीति का रास्ता अपनाने पर जोर दिया है। भारत की इसी भूमिका को लेकर पूछे गए सवाल पर पेस्कोव ने कहा, "हम भारतीय प्रयासों का स्वागत करते हैं।”


एसयू-57 लड़ाकू विमानों पर हो सकता है समझौता
क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि भारत को रूस के अत्याधुनिक एसयू-57 लड़ाकू विमानों की बिक्री का मुद्दा दोनों देशों के बीच बातचीत के एजेंडे में शामिल है। उन्होंने संकेत दिया कि आगामी भारत-रूस वार्ता के दौरान एसयू-57 की संभावित बिक्री पर चर्चा हो सकती है।



क्रेमलिन प्रवक्ता दमित्री पेस्कोव ने दोनों देशों के बीच बढ़ते व्यापारिक संबंधों को रेखांकित किया। भारत और रूस के बीच ज्यादातर व्यापारिक भुगतान अब अपनी राष्ट्रीय मुद्राओं (रुपया और रूबल) में ही किया जा रहा है।

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