आतंक पर भारत के रुख के समर्थन में आया आइसलैंड, राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने किया धन्यवाद
- आतंक के मुद्दे पर अपनाए जा रहे भारत के सख्त रुख को आइसलैंड का समर्थन
- आइसलैंड ने आतंक के खिलाफ वैश्विक लड़ाई में साथ देने का वादा किया
- दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक सहयोग और एक-दूसरे के नागरिकों को वीजा आदि में छूट देने को लेकर एमओयू
- आइसलैंड वासी पढ़ेंगे हिंदी भाषा
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भारत की तरफ से आतंक के मुद्दे पर अपनाए जा रहे सख्त रुख को आइसलैंड का भी समर्थन मिल गया है। जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में सीआरपीएफ काफिले पर आतंकी हमले के बाद भारत की तरफ से उठाए गए कड़े कदमों का समर्थन करने वाले आइसलैंड ने फिर से आतंक के खिलाफ वैश्विक लड़ाई में साथ देने का वादा किया। मंगलवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और आइसलैंड के राष्ट्रपति गुओनी जॉनेसन ने द्विपक्षीय वार्ता में आतंकवाद को मानवता के लिए खतरा बताते हुए इससे मिलकर लड़ने की प्रतिबद्धता जताई।
दोनों राष्ट्रपतियों के बीच वार्ता में यह भी तय हुआ कि भारत को सतत मत्स्यपालन करने के लिए आइसलैंड अपनी तकनीकों के जरिए मदद देगा। इसके अलावा दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक सहयोग और एक-दूसरे के नागरिकों को वीजा आदि में छूट देने को लेकर भी एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए।
द्विपक्षीय वार्ता के बाद राष्ट्रपति कोविंद ने कहा कि दोनों पक्ष अपनी वैश्विक साझेदारी को मजबूत करने के इच्छुक हैं और इसे नई गति देने के तरीकों पर चर्चा की गई। उन्होंने कहा, भारत सतत मत्स्यपालन, सामुद्री अर्थव्यवस्था, शिपिंग, हरित प्रगति, ऊर्जा, निर्माण और कृषि के क्षेत्र में आइसलैंड की क्षमताओं का लाभ लेना चाहता है। राष्ट्रपति ने कहा, बदले में भारतीय दवा, आईटी, बायोटेकनोलॉजी, ऑटोमोबाइल और नवाचार कंपनियां आइसलैंड के उद्योगपतियों के साथ गठबंधन करेंगी।
आइसलैंड वासी पढ़ेंगे हिंदी भाषा
राष्ट्रपति कोविंद ने आइसलैंड के राष्ट्रपति को आर्कटिक काउंसिल के अध्यक्ष की कुर्सी संभालने के लिए बधाई दी। साथ ही उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता के भारतीय दावे को लंबे समय से आइसलैंड की तरफ से दिए जा रहे समर्थन का धन्यवाद भी किया। राष्ट्रपति ने यह भी घोषणा की कि यूनिवर्सिटी ऑफ आइसलैंड में भारत के सहयोग से हिंदी चेयर शुरू करने की सभी औपचारिकताएं पूरी हो गई हैं और जल्द ही वहां आइसलैंड वासियों के लिए हिंदी भाषा का अध्यापन शुरू हो जाएगा।