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President: मॉरीशस यूनिवर्सिटी ने राष्ट्रपति मुर्मू को डॉक्टरेट की मानद डिग्री दी, बोलीं- शिक्षा से बदलाव संभव
Tue, 12 Mar 2024 02:41 PM IST
नितिन गौतम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पोर्ट लुइस
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पोर्ट लुइस
Published by: नितिन गौतम
Updated Tue, 12 Mar 2024 02:41 PM IST
सार
राष्ट्रपति ने कहा कि मॉरीशस आने के बाद से ही मुझे जो प्यार और सम्मान मिल रहा है, मैं उससे बेहद खुश हूं। इससे भारत और मॉरीशस के लोगों को संबंधों की ताकत का पता चलता है।
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मानद डिग्री से सम्मानित हुईं राष्ट्रपति मुर्मू
- फोटो : एएनआई
विस्तार
मॉरीशस की यूनिवर्सिटी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को डॉक्टरेट की मानद उपाधि से सम्मानित किया है। राष्ट्रपति को यूनिवर्सिटी की तरफ से मंगलवार को डॉक्टरेट ऑफ सिविल लॉ की डिग्री से सम्मानित किया गया। राष्ट्रपति मुर्मू तीन दिन के मॉरीशस दौरे पर हैं और मंगलवार को वे मॉरीशस के राष्ट्रीय दिवस समारोह में शिरकत करेंगी।
'युवा प्रेरित होंगे'
राष्ट्रपति ने यूनिवर्सिटी में मानद डिग्री से सम्मानित किए जाने के बाद अपने संबोधन में कहा कि 'मॉरीशस के युवाओं को भारत के साथ संपर्क में रहना चाहिए और अपने भूतकाल को पोषित करते हुए अपने उज्जवल भविष्य में निवेश करना चाहिए। राष्ट्रपति ने मॉरिशस के लोगों को उनके राष्ट्रीय दिवस की शुभकामनाएं भी दीं। राष्ट्रपति ने कहा कि वह इस सम्मानित यूनिवर्सिटी से डॉक्टरेट ऑफ सिविल लॉ की मानद डिग्री पाकर सम्मानित महसूस कर रही हूं। मुझे उम्मीद है कि इससे युवा लोग प्रेरित होंगे और खासकर युवा महिलाएं अपने सपनों को पूरा करने के लिए जुनूनी बनेंगी। मॉरीशस आने के बाद से ही मुझे जो प्यार और सम्मान मिल रहा है, मैं उससे बेहद खुश हूं। इससे भारत और मॉरीशस के लोगों को संबंधों की ताकत का पता चलता है।'
'शिक्षा से ही बदलाव संभव'
राष्ट्रपति ने कहा कि दोनों देशों को रिश्तों को आकार देने में शिक्षा की अहम भूमिका है। साल 1901 में महात्मा गांधी ने भारतीयों को शिक्षित होने के लिए प्रेरित किया था। इससे मॉरीशस में राजनीतिक और सामाजिक सशक्तिकरण हुआ और बड़े बदलाव आए। साथ ही मॉरिशस के दूरदर्शी नेताओं सर शिवसागर रामगुलाम और सर अनिरुद्ध जगन्नाथ का भी योगदान है। उनके नेतृत्व में वाइब्रेंट, बहुलतावादी और समृद्ध मॉरीशस का निर्माण हुआ। राष्ट्रपति ने कहा कि शिक्षा की ताकत को उन्होंने खुद महसूस किया है और यह एकमात्र ऐसा औजार है, जिससे मदद से जिंदगी को पूरी तरह से बदला जा सकता है।
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हर साल 400 मॉरिशस के लोग भारत में इंडियन टेक्नीकल एंड इकॉनोमिक कॉपरेशन प्रोग्राम के तहत प्रशिक्षित किए जाते हैं। जन्हें उच्च शिक्षा के लिए भारत में स्कॉलरशिप भी मिलती है। यह हमारे लिए गर्व की बात है कि उनमें से कई लोग मॉरीशस नौकरशाही में उच्च पदों पर आसीन हैं। राष्ट्रपति ने मॉरीशस के युवाओं से दोनों देशों के संबंधों और विस्तृत आर्थिक अवसरों का लाभ उठाने की अपील की। उन्होंने कहा कि भारत, मॉरीशस को करीबी सहयोगी और पड़ोसी के तौर पर देखता है।
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'युवा प्रेरित होंगे'
राष्ट्रपति ने यूनिवर्सिटी में मानद डिग्री से सम्मानित किए जाने के बाद अपने संबोधन में कहा कि 'मॉरीशस के युवाओं को भारत के साथ संपर्क में रहना चाहिए और अपने भूतकाल को पोषित करते हुए अपने उज्जवल भविष्य में निवेश करना चाहिए। राष्ट्रपति ने मॉरिशस के लोगों को उनके राष्ट्रीय दिवस की शुभकामनाएं भी दीं। राष्ट्रपति ने कहा कि वह इस सम्मानित यूनिवर्सिटी से डॉक्टरेट ऑफ सिविल लॉ की मानद डिग्री पाकर सम्मानित महसूस कर रही हूं। मुझे उम्मीद है कि इससे युवा लोग प्रेरित होंगे और खासकर युवा महिलाएं अपने सपनों को पूरा करने के लिए जुनूनी बनेंगी। मॉरीशस आने के बाद से ही मुझे जो प्यार और सम्मान मिल रहा है, मैं उससे बेहद खुश हूं। इससे भारत और मॉरीशस के लोगों को संबंधों की ताकत का पता चलता है।'
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'शिक्षा से ही बदलाव संभव'
राष्ट्रपति ने कहा कि दोनों देशों को रिश्तों को आकार देने में शिक्षा की अहम भूमिका है। साल 1901 में महात्मा गांधी ने भारतीयों को शिक्षित होने के लिए प्रेरित किया था। इससे मॉरीशस में राजनीतिक और सामाजिक सशक्तिकरण हुआ और बड़े बदलाव आए। साथ ही मॉरिशस के दूरदर्शी नेताओं सर शिवसागर रामगुलाम और सर अनिरुद्ध जगन्नाथ का भी योगदान है। उनके नेतृत्व में वाइब्रेंट, बहुलतावादी और समृद्ध मॉरीशस का निर्माण हुआ। राष्ट्रपति ने कहा कि शिक्षा की ताकत को उन्होंने खुद महसूस किया है और यह एकमात्र ऐसा औजार है, जिससे मदद से जिंदगी को पूरी तरह से बदला जा सकता है।
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हर साल 400 मॉरिशस के लोग भारत में इंडियन टेक्नीकल एंड इकॉनोमिक कॉपरेशन प्रोग्राम के तहत प्रशिक्षित किए जाते हैं। जन्हें उच्च शिक्षा के लिए भारत में स्कॉलरशिप भी मिलती है। यह हमारे लिए गर्व की बात है कि उनमें से कई लोग मॉरीशस नौकरशाही में उच्च पदों पर आसीन हैं। राष्ट्रपति ने मॉरीशस के युवाओं से दोनों देशों के संबंधों और विस्तृत आर्थिक अवसरों का लाभ उठाने की अपील की। उन्होंने कहा कि भारत, मॉरीशस को करीबी सहयोगी और पड़ोसी के तौर पर देखता है।