चीन में गरीबी मिट गई या नहीं, अब इस पर शुरू हुई बहस, जानकारों ने कहा- अभी करें और समीक्षा
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चीन ने गरीबी पर विजय पा ली है या नहीं, इस पर खुद चीन में विवाद खड़ा हो गया है। बीते हफ्ते चीन से ये खबर आई कि चीन में गरीबी को मिटा दिया गया है। तब ये बताया गया कि राष्ट्रपति बनने के बाद शी जिनपिंग ने 2020 तक गरीबी खत्म करने का लक्ष्य तय किया था। उसे एक महीना पहले हासिल कर लिया गया है। शी ने चीन में कम्युनिस्ट क्रांति की शताब्दी यानी 2049 तक चीन को सामान्य रूप में समृद्ध देश बनाने का लक्ष्य रखा है। गरीबी पर विजय को उस दिशा में पहली कामयाबी बताया गया।
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चीन ने गरीबी पर विजय पा ली है या नहीं, इस पर खुद चीन में विवाद खड़ा हो गया है। बीते हफ्ते चीन से ये खबर आई कि चीन में गरीबी को मिटा दिया गया है। तब ये बताया गया कि राष्ट्रपति बनने के बाद शी जिनपिंग ने 2020 तक गरीबी खत्म करने का लक्ष्य तय किया था। उसे एक महीना पहले हासिल कर लिया गया है। शी ने चीन में कम्युनिस्ट क्रांति की शताब्दी यानी 2049 तक चीन को सामान्य रूप में समृद्ध देश बनाने का लक्ष्य रखा है। गरीबी पर विजय को उस दिशा में पहली कामयाबी बताया गया।
चीन सरकार की परिभाषा के मुताबिक चीन में 2,300 युवान (350 डॉलर) से कम आमदनी पर जीवन गुजराने वाले व्यक्ति को गरीब समझा जाता है। पिछले हफ्ते ये घोषणा की गई कि इस सीमा से नीचे जीवन गुजारने वाले गिने-चुने लोगों को अब इससे ऊपर उठा दिया गया है।
जानकारों ने कहा- अभी समीक्षा करें
लेकिन अब चीन की सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी से जुड़े अखबारों में ही इस बारे में अलग रिपोर्टें छपी हैं। ग्लोबल टाइम्स ने विशेषज्ञों का हवाला देते हुए कहा है कि गरीबी हटाने में मिली सफलता की चीन को व्यापक समीक्षा करनी चाहिए। इसके बाद 2021 में उसे इस बारे में निष्कर्षों को अंतिम रूप से घोषित करना चाहिए। पहली खबर समाचार एजेंसी ने शिन्हुआ ने दी थी। लेकिन बाद में उसने भी एक रिपोर्ट प्रसारित की, जिससे संकेत मिला कि वह खुद अपनी पहली खबर का खंडन कर रही है। बाद वाली रिपोर्ट में कहा गया कि गरीबी मिटाने का काम अभी पूरी तरह संपन्न नहीं हुआ है।
विशेषज्ञों ने शिन्हुआ से कहा कि इस मामले में औचक निरीक्षण और जनगणना की जरूरत होगी, ताकि इस बात की कई बार पुष्टि हो सके कि सभी लोग गरीबी से उबर जाने की कसौटी पर खरे उतर रहे हैं। फिर यह एलान करना चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की सेंट्रल कमेटी का काम है कि गरीबी के खिलाफ जंग जीत ली गई है।
चार दशकों में गांवों से शहरों की तरफ बढ़े लोग
इस रिपोर्ट में एक विशेषज्ञ ने शिन्हुआ से कहा था कि इस सफलता के साथ ही हजार साल से अति गरीबी के खिलाफ चल रहे संघर्ष में आखिरकार जीत हासिल कर ली गई है। सरकारी टीवी चैनल सीजीटीएन ने की वेबसाइट पर भी ये खबर प्रमुखता से दी गई कि तय समय सीमा से एक महीना पहले ही चीन ने गरीबी को मिटा दिया है। इस खबर को आधार बनाकर चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियान ने कहा कि 2020 तक गरीबी खत्म करने के लक्ष्य को पा लिया गया है। उन्होंने कहा कि कड़ी मेहतन से पाई गई ये सफलता सुखदायी है।
ऐसा होना सचमुच बड़ी कामयाबी मानी जाएगी। लेकिन इस पर सरकारी तौर पर कोई उत्सव नहीं मनाया गया। उसके बाद खुद सरकारी मीडिया में इस बारे में अलग किस्म की रिपोर्टें छपी हैं। ज्यादातर जानकारों का मानना है कि सरकार देर-सबेर ये 2020 में गरीबी मिटाने का लक्ष्य हासिल हो जाने की घोषणा करेगी। कोरोना महामारी से लगे झटके के बीच ऐसा करना उसकी बड़ी कामयाबी होगी। दुनिया भर के जानकार करोड़ों लोगों को गरीबी रेखा से ऊपर लाने की चीन की सफलता की पहले ही तारीफ करते रहे हैं, हालांकि इसके लिए जो तरीके अपनाए गए उसकी आलोचना भी हुई है। एक आलोचना यह है कि चीन ने गरीबी रेखा की परिभाषा बहुत नीचे तय की हुई है। लेकिन चीन का कहना है कि बाहरी जानकार अमेरिका में डॉलर की क्रय शक्ति के हिसाब से ये परिभाषा तय करते हैं, जबकि उसने परचेजिंग पॉवर पैरिटी के आधार पर अपनी परिभाषा तय की हुई है।