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LGBTQ+: ‘समलैंगिक संघों को आशीर्वाद देने के कुछ तरीके हो सकते हैं’, पोप फ्रांसिस ने कार्डिनलों को दिया सुझाव

Tue, 03 Oct 2023 07:50 AM IST
जलज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वेटिकन सिटी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वेटिकन सिटी Published by: जलज मिश्रा Updated Tue, 03 Oct 2023 07:50 AM IST
सार

वेटिकन ने सोमवार को एक बयान जारी किया। बयान में फ्रांसिस ने सुझाव दिया कि समलैंगिक संघों को दिए जाने वाले  आशीर्वाद का अध्ययन किया जा सकता है। अगर वे आशीर्वाद को शादी से भ्रमित न करें।

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Pope Francis suggests blessings for same sex unions possible
पोप फ्रांसिस - फोटो : social media

विस्तार

वेटिकन सिटी में एक बड़ी धर्मसभा का आयोजन होने वाला है। धर्मसभा से पहले पोप फ्रांसिस ने पांच कार्डिनलों द्वारा पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए सुझाव दिया। पोप ने कहा कि समलैंगिक संघों को आशीर्वाद देने के कुछ तरीके हो सकते हैं। दरअसल, एक दिन पहले पांच रूढ़िवादी कार्डिनलों ने पोप से समलैंगिकता और महिलाओं की भूमिका को लेकर कैथोलिक शिक्षा की पुष्टि करने का अनुरोध किया था।
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आशीर्वाद को शादी से भ्रमित न करें
वेटिकन ने सोमवार को एक बयान जारी किया। बयान में फ्रांसिस ने सुझाव दिया कि समलैंगिक संघों को दिए जाने वाले  आशीर्वाद का अध्ययन किया जा सकता है। अगर वे आशीर्वाद को शादी से भ्रमित न करें। एलजीबीटीक्यू+कैथोलिकों का समर्थन करने वाली न्यू वेज मिनिस्ट्री ने कहा कि एलजीबीटीक्यू+कैथोलिकों के लिए चर्च खोलना महत्वपूर्ण है। वेटिकन सिटी का कहना है कि स्त्री-पुरुष विवाह न टूटने वाला एक संबंध है। इसी वजह से समलैंगिक विवाहों को अपनाया नहीं जा सका है।
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पुजारी न्यायाधीश नहीं बन सकते
पोप फ्रांसिस ने एक नए पत्र में कहा कि पुरुष और स्त्री का मिलन विवाह है। समलैंगिक संघों और आशीर्वादों के बारे में उनका कहना है कि देहाती दान के लिए धैर्य और समझ की आवश्यकता होती है। पुजारी न्यायाधीश नहीं बन सकते। साल 2021 में कांग्रेगेशन ने स्पष्ट रूप से कहा था कि चर्च समलैंगिक संघों को आशीर्वाद नहीं दे सकता। क्योंकि भगवान पाप को आशीर्वाद नहीं देते। 
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चर्च के कुछ संस्कारों में भाग नहीं ले सकते
हाल ही में एक संवाददाता सम्मेलन में पोप फ्रांसिस से सवाल किया गया था कि पुर्तगाल की यात्रा के दौरान उन्होंने एक कार्यक्रम में कहा था कि चर्च सभी के लिए खुले हैं, सभी के लिए, लेकिन क्या ये असंगत नहीं है कि महिलाओं और समलैंगिकों को अन्य के मुकाबले कई अधिकार नहीं मिले हैं? इसके जवाब में पोप फ्रांसिस ने कहा कि 'चर्च सभी के लिए खुले हैं, लेकिन चर्च के अंदर के जीवन को नियंत्रित करने के लिए कुछ नियम हैं और इनका पालन करना जरूरी है। पोप फ्रांसिस ने कहा कि 'नियमों के मुताबिक ये लोग चर्च के कुछ संस्कारों में भाग नहीं ले सकते। इसका मतलब ये नहीं है कि उन पर प्रतिबंध है। पोप फ्रांसिस ने कहा कि चर्च के भीतर हर व्यक्ति को अपने तरीके से भगवान का सामना करना होता है।' बता दें कि चर्च में महिलाओं को पुजारी बनने की इजाजत नहीं है। साथ ही समलैंगिक जोड़े को चर्च में विवाह करने की इजाजत नहीं है।


पोप फ्रांसिस ने किए हैं कई सुधार
बता दें कि पोप फ्रांसिस लगातार एलजीबीटी  समुदाय के लिए चर्चों को ज्यादा स्वागतयोग्य बनाने के प्रयास कर रहे हैं। अपने बीते 10 साल के कार्यकाल के दौरान पोप फ्रांसिस ने कई सुधार किए हैं, जिनमें महिलाओं को चर्च में ज्यादा भूमिका देना, खासकर वेटिकन सिटी में उच्च पदों पर महिलाओं की नियुक्ति जैसे कदम शामिल हैं। 
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