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Gaza War: युद्ध खत्म करने के लिए इस्राइल और फलस्तीन के लिए दो-राष्ट्र समाधान की जरूरत, पोप फ्रांसिस का बयान

Thu, 02 Nov 2023 02:30 AM IST
गुलाम अहमद वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वेटिकन सिटी
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वेटिकन सिटी Published by: गुलाम अहमद Updated Thu, 02 Nov 2023 02:30 AM IST
सार

एक साक्षात्कार में पोप फ्रांसिस ने कहा कि इस्राइल और फलस्तीन दो लोगों की तरह हैं, जिन्हें एक साथ रहना है। इसके लिए बुद्धिमान समाधान है- दो देश (इस्राइल और फलस्तीन)। 

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Pope Francis says two-state solution needed for Israel-Palestine amid Gaza War
पोप फ्रांसिस - फोटो : social media

विस्तार

गाजा में भीषण युद्ध के बीच पोप फ्रांसिस ने इस्राइल और फलस्तीन के बीच दो-राष्ट्र समाधान की वकालत की है। पोप फ्रांसिस ने बुधवार को कहा कि वर्तमान युद्ध को समाप्त करने के लिए इस्राइल और फलस्तीन के लिए दो-राष्ट्र समाधान की जरूरत है। साथ ही उन्होंने यरूशलम के लिए विशेष दर्जे की मांग की। उनका कहना है कि युद्ध में हमेशा हार होती है।

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इटली के न्यूज चैनल आरएआई के साथ साक्षात्कार में पोप फ्रांसिस ने कहा कि इस्राइल और फलस्तीन दो लोगों की तरह हैं, जिन्हें एक साथ रहना है। इसके लिए बुद्धिमान समाधान है- दो देश (इस्राइल और फलस्तीन)। उन्होंने कहा, ओस्लो समझौता अच्छी तरह से परिभाषित दो देश और एक विशेष दर्जे वाले यरूशलम की वकालत करता है। पोप फ्रांसिस ने उम्मीद जताई कि सात अक्तूबर को इस्राइल पर फलस्तीनी आतंकी संगठन हमास के हमले के बाद शुरू हुए युद्ध के क्षेत्र में विस्तार होने टाला जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि वह यहूदी विरोधी भावना में वृद्धि को लेकर चिंतित हैं।
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क्या है ओस्लो समझौता
वर्ष 1993 में, तत्कालीन इस्राइली प्रधानमंत्री यित्ज़ाक राबिन और फलस्तीन लिबरेशन ऑर्गनाइजेशन के नेता यासिर अराफात ने नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में हुई एक बैठक में फलस्तीनी स्वायत्तता देश की स्थापना के लिए हाथ मिलाया था, जिसे ओस्लो समझौता के नाम से जाना जाता है। इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन, इस्राइली प्रधानमंत्री एहुद बराक और यासिर अराफात ने 2000 में कैंप डेविड शिखर सम्मेलन में भाग लिया, लेकिन अंतिम शांति समझौता नहीं हो सका था।
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इस्राइल ने वर्ष 1967 में अरब देशों के साथ युद्ध में जीत के बाद फलस्तीन के पूर्वी यरूशलम पर कब्जा कर लिया और 1980 में पूरे शहर को अपनी संयुक्त राजधानी घोषित कर दिया। इस्राइल ने हमेशा उन सुझावों को खारिज किया है कि ईसाइयों, मुसलमानों और यहूदियों के पवित्र शहर यरूशलम को एक विशेष या अंतरराराष्ट्रीय दर्जा दिया सकता है।

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