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अब ओली और प्रचंड के बीच गहरा सकती है पार्टी के वर्चस्व की जंग
Mon, 25 Jan 2021 04:42 AM IST
Jeet Kumar
एजेंसी, काठमांडो।
एजेंसी, काठमांडो।
Published by: Jeet Kumar
Updated Mon, 25 Jan 2021 04:42 AM IST
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Nepal PM KP Sharma Oli
- फोटो : Social Media
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नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी से निकाले जाने के बाद प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के राजनीतिक भविष्य पर सवाल खडे़ हो गए हैं। जानकारों का मानना है कि ओली के पास अब यही विकल्प है कि वह पार्टी के पुष्प कमल दहल प्रचंड के धडे़ का फैसला मानने से साफ इनकार कर सकते हैं। वह यह दलील दे सकते हैं कि पार्टी में उनके धडे़ के लोग नहीं थे।
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पार्टी के संविधान के जानकारों का मानना है कि ओली के इस दावे को प्रचंड गुट इतनी आसानी से खारिज नहीं कर सकता है। माना यह भी जा रहा है कि इस साल अप्रैल में नेपाल में चुनाव हो सकते हैं, जिससे ओली का राजनीतिक भविष्य तय होगा।
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नेपाल की संसद भंग होने के चलते ओली कार्यवाहक प्रधानमंत्री का दायित्व निभा रहे हैं। ऐसे में पार्टी से बाहर होने का भी कोई ज्यादा असर नहीं होगा। ऐसे में पार्टी से निकाले जाने के बावजूद ओली अगला चुनाव होने तक आसानी से नेपाल के पीएम की कुर्सी को संभालेंगे।
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जानकारों का यह भी कहना है कि प्रचंड के आगे झुकने से इनकार करते हुए ओली अपने धडे़ की बैठक कर प्रचंड को पार्टी से निकालने का प्रस्ताव पारित करा दें।
पार्टी की कमान को लेकर सुप्रीम कोर्ट जा सकते हैं दोनों धडे़
नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी दो भागों में बंट चुकी है। अब ओली और प्रचंड के दोनों ही धड़े आगामी चुनाव को देखते हुए पार्टी और चुनाव चिन्ह पर अपना दावा ठोक सकते हैं। इस मामले के सुप्रीम कोर्ट में जाने के आसार बढ़ गए हैं। चुनाव आयोग की सलाह पर नेपाली सुप्रीम कोर्ट किसी एक के पक्ष में अपना फैसला सुना सकता है।