फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   pm modi xi jinping meeting china india relations trust restoration

ड्रैगन के बदले सुर: पीएम मोदी-जिनपिंग मुलाकात के बाद भरोसा बहाली की बात, सीमा से कारोबार तक क्या बदलेगा?

Mon, 14 Sep 2026 12:54 AM IST
राकेश कुमार अमर उजाला नेटवर्क, बीजिंग।
अमर उजाला नेटवर्क, बीजिंग। Published by: राकेश कुमार Updated Mon, 14 Sep 2026 12:54 AM IST
सार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात के बाद बीजिंग के रुख में भारत के साथ रिश्ते धीरे-धीरे सामान्य करने के संकेत दिख रहे हैं। चीनी सरकारी मीडिया ने सीमा पर तनाव नियंत्रित रखने, कारोबार और निवेश बढ़ाने तथा बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग को रिश्ते सुधारने का रास्ता बताया है। विशेषज्ञों के मुताबिक सीमा विवाद का तत्काल समाधान भले मुश्किल हो, लेकिन संस्थागत संवाद, सीधी उड़ानों और कारोबारी संपर्क की बहाली से भरोसा बढ़ाया जा सकता है। 

विज्ञापन
pm modi xi jinping meeting china india relations trust restoration
पीएम मोदी और जिनपिंग - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात और ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने के बाद चीन के संकेत बताते हैं कि बीजिंग भारत के साथ संबंधों को धीरे-धीरे सामान्य और स्थिर करने की दिशा में आगे बढ़ना चाहता है। चीनी सरकारी मीडिया ग्लोबल टाइम्स के विश्लेषण में सीमा पर तनाव नियंत्रित रखने, आर्थिक संपर्क बढ़ाने और बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग को रिश्तों को मजबूत करने के प्रमुख रास्तों के रूप में रेखांकित किया गया है।
विज्ञापन


पेकिंग विश्वविद्यालय के दक्षिण एशिया अध्ययन केंद्र के कार्यकारी उपनिदेशक वांग श्यू के मुताबिक राजनीतिक भरोसा केवल शीर्ष नेताओं की मुलाकात से नहीं, बल्कि ठोस कदमों से बनता है। उन्होंने सीमा मुद्दे के प्रबंधन के लिए संस्थागत तंत्र मजबूत करने, लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने तथा व्यापार और निवेश को सुरक्षा के नजरिये से देखने से बचने की जरूरत बताई।
विज्ञापन


सीमा विवाद को रिश्तों पर हावी नहीं होने देने की कोशिश
भारत और चीन के बीच सबसे संवेदनशील मुद्दा सीमा विवाद है। 2024 में कजान और 2025 में तियानजिन के बाद नई दिल्ली में मोदी-जिनपिंग मुलाकात को चीन संबंधों में स्थिरता की अगली कड़ी के तौर पर देख रहा है। सीमा प्रबंधन में प्रगति, सीमा व्यापार और सीधी उड़ानों की बहाली को इसी प्रक्रिया के सकारात्मक संकेतों के रूप में पेश किया गया है।बीजिंग का जोर फिलहाल सीमा विवाद के तत्काल समाधान से ज्यादा उसे प्रभावी ढंग से प्रबंधित करने पर दिखाई देता है, ताकि सीमा का तनाव व्यापार, निवेश और लोगों के बीच संपर्क को प्रभावित न करे। चीनी विशेषज्ञों के अनुसार संस्थागत संवाद मजबूत होने से गलतफहमी और अप्रत्याशित तनाव का जोखिम कम किया जा सकता है। इससे दोनों देशों के लिए दूसरे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की गुंजाइश बनेगी।
विज्ञापन
विज्ञापन


कारोबार में फिर बढ़ सकती है रफ्तार
आर्थिक रिश्तों को गति देना चीन के लिए महत्वपूर्ण क्षेत्र हो सकता है। ग्लोबल टाइम्स से बातचीत में भारतीय थिंक टैंक ब्यूरो ऑफ रिसर्च ऑन इंडस्ट्री एंड इकोनॉमिक फंडामेंटल्स के सीईओ मोहम्मद साकिब ने कहा कि चीन भारत के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदारों में है और दोनों देशों के बीच सहयोग की काफी संभावनाएं हैं। उनके मुताबिक चीन की हार्डवेयर क्षमता और भारत की सॉफ्टवेयर ताकत तथा युवा प्रतिभा एक-दूसरे की पूरक हैं।सीधी उड़ानों की बहाली और चीनी कंपनियों से जुड़े कुछ निवेश प्रतिबंधों में ढील के बाद कारोबारी संपर्क बढ़ने की संभावना बनी है। हालांकि इसकी गति दोनों देशों के बीच सुरक्षा संबंधी चिंताओं और रणनीतिक प्रतिस्पर्धा से भी प्रभावित होगी। बीजिंग की ओर से व्यापार और निवेश को अत्यधिक सुरक्षा-केंद्रित नजरिये से न देखने की अपील इसी चुनौती को कम करने की कोशिश मानी जा सकती है।

ब्रिक्स बनेगा कूटनीतिक सहयोग का मंच
भारत-चीन सहयोग का दायरा ब्रिक्स से आगे शंघाई सहयोग संगठन और जी-20 तक बढ़ सकता है। चीनी विशेषज्ञों के मुताबिक दोनों देश वैश्विक शासन सुधार, जलवायु परिवर्तन और विकास वित्त जैसे मुद्दों पर समन्वय बढ़ा सकते हैं। ऐसे मंच उन क्षेत्रों में सहयोग का अवसर देते हैं, जहां दोनों देशों के हित समान हैं।चीन अगले वर्ष ब्रिक्स की अध्यक्षता करेगा और 19वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा। ऐसे में भारत के साथ स्थिर संबंध बीजिंग के लिए महत्वपूर्ण होंगे। नई दिल्ली में जिनपिंग का मतभेदों को संवाद के जरिये सुलझाने और एक-दूसरे की मूल चिंताओं का सम्मान करने पर जोर इसी दिशा से जुड़ा है।


फिलहाल बीजिंग की नीति तनाव घटाने, संपर्क बहाल करने और सहयोग का दायरा धीरे-धीरे बढ़ाने की दिखाई देती है। सीमा पर स्थिरता बनी रहती है और व्यापारिक रिश्तों में सुधार आगे बढ़ता है तो भारत-चीन संबंधों में प्रतिस्पर्धा के साथ सहयोग का नया संतुलन बन सकता है। ब्रिक्स इस प्रक्रिया के लिए दोनों देशों को संवाद और साझा हितों पर काम करने का अहम मंच दे सकता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed