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प्लास्टिक फेस शील्ड कोरोना को फैलने से रोकने में बहुत मददगार नहीं, जापान के सुपर कंप्यूटर का दावा

Thu, 24 Sep 2020 10:30 AM IST
अमर शर्मा वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Published by: अमर शर्मा Updated Thu, 24 Sep 2020 10:30 AM IST
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Plastic face shield not very helpful in preventing corona from spreading, claims Japan supercomputer covid face shield effectiveness coronavirus face shield vs mask
फेस शील्ड की तस्वीर (फाइल) - फोटो : PTI

कोरोना वायरस का प्रकोप दुनियाभर में फैला हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक कोरोना की वैक्सीन नहीं आ जाती है, तब तक इस महामारी से बचाव के लिए सोशल डिस्टेंसिंग, मास्क, फेस शील्ड, सैनेटाइजर का इस्तेमाल ही कारगर है। कोविड-19 से बचाव के लिए लोग बाहर आने-जाने और दफ्तर में काम करने के दौरान प्लास्टिक फेस शील्ड का इस्तेमाल करते दिख रहे हैं। लेकिन जापान में दुनिया के सबसे तेज सुपरकंप्यूटर की मदद से हाल में की गई एक रिसर्च में इस बात का खुलासा हुआ है कि प्लास्टिक फेस शील्ड कोरोना वायरस के फैलने से रोकने में बहुत कारगर साबित नहीं होते। 

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शोध के मुताबिक बात करने, गाने या छींकने जैसी गतिविधियों के कारण हवा में उड़ने वाले नम सूक्ष्म कणों को फैलने से रोकने में प्लास्टिक फेस शील्ड बहुत मददगार नहीं है। कोरोना जैसे वायरस इन्हीं नम सूक्ष्म कणों के जरिए फैलते हैं। इसलिए प्लास्टिक फेस शील्ड कोरोना वायरस के फैलाव को रोकने में भी बहुत कारगर नहीं हैं। 
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जापान के कोबे में स्थित रिकेन सेंटर फॉर कंप्यूटेशनल साइंस नामक रिसर्च इंस्टीट्यूट में सुपर कंप्यूटर पर कोरोना से बचाव के उपाय खोजने के लिए यह शोध किया गया। प्रमुख शोधकर्ता मकोटो सुबोकोरा के अनुसार शोध से यह भी मामूल हुआ है कि मुंह से निकलने वाले सूक्ष्म कणों को रोकने में प्लास्टिक फेस शील्ड की तुलना में फेस मास्क ज्यादा प्रभावशाली हैं। फेस मास्क चाहे घर पर बने हुए हों या बाजार से खरीदे हुए, संक्रमण को फैलने से रोकने में ज्यादा असरदार हैं। 
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सुपर कंप्यूटर फुगाकू ने कोविड-19 के दौरान प्रयोग की जानेवाली प्लास्टिक फेस शील्ड का सिमुलेशन किया है, जिसमें 100 फीसदी एयरबॉर्न ड्रोपलेट्स 5 माइक्रोमीटर से छोटी नजर आईं जो प्लासिटक विजर्स के जरिए भी बच सकती हैं। इससे यह पता चलता है कि ट्रांसपेरेंट फेस शील्ड के प्रयोग से भी कोरोना के संक्रमण के प्रभाव को कम नहीं किया जा सकता। बता दें कि एक मीटर के दस लाख वें हिस्से में एक माइक्रोमीटर होता है। एक सरकारी समर्थित शोध संस्थान के अनुसार, 50 से अधिक माइक्रोमीटर वाले लगभग आधे बड़ी बूंद भी हवा में तैरने में सक्षम थे। 

गौरतलब है कि फुगाकू सुपर कंप्यूटर की स्पीड बहुत ज्यादा है। यह एक सेकेंड में 415 क्वाड्रिलियन की गणना कर सकता है। इसने ये भी पता लगा लिया है कि सांस से कैसे पानी की बूंदें (वॉटर ड्रॉपलेट्स) फैलती हैं। रिपोर्ट के मुताबिक यह सुपर कंप्यूटर कोविड-19 की वैक्सीन की खोज में भी इस्तेमाल किया जा रहा है। 

इससे पहले ब्रिटेन और स्विट्जरलैंड में भी प्लास्टिक फेस शील्ड को लेकर ऐसी ही चिंताएं जाहिर की जा चुकी हैं। ब्रिटेन के स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने दावा किया कि प्लास्टिक शील्ड में बड़ा फासला होता है, जिसके चलते वायरस मुंह में घुस सकता है। द न्यू एंड इमर्जिंग रेस्पिरेटरी वायरस थ्रेटस एडवाइजरी ग्रुप (नर्वटैग) की बैठक में फेस शील्ड को लेकर कई चिंताएं भी जाहिर की जा चुकी हैं। 


बता दें, इससे पहले स्विट्जरलैंड के अधिकारियों ने भी एल्प्स के एक रिजॉर्ट में सामने आए कोरोना संक्रमितों में वायरस के प्रसार की वजह खंगालने के बाद यह दावा किया था कि फेस शील्ड को मास्क के विकल्प के रूप में बिलकुल नहीं अपनाया जा सकता। 

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