{"_id":"60f700a48ebc3e6d657574e0","slug":"peru-castio-won-the-election-but-how-long-will-the-president-be-able-to-stay-results-were-stuck-for-six-weeks","type":"story","status":"publish","title_hn":"पेरूः कास्तियो चुनाव तो जीते, लेकिन कब तक रह पाएंगे राष्ट्रपति? छह हफ्ते से अटके हुए थे नतीजे","category":{"title":"World","title_hn":"दुनिया","slug":"world"}}
पेरूः कास्तियो चुनाव तो जीते, लेकिन कब तक रह पाएंगे राष्ट्रपति? छह हफ्ते से अटके हुए थे नतीजे
Tue, 20 Jul 2021 10:28 PM IST
सुरेंद्र जोशी
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लीमा
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लीमा
Published by: सुरेंद्र जोशी
Updated Tue, 20 Jul 2021 10:28 PM IST
सार
दक्षिण अमेरिकी देश पेरू के राष्ट्रपति चुनाव में प्रतिद्वंद्वी कीको फुजीमोरी द्वारा लगाए गए धांधली के आरोपों के कारण चुनाव के छह हफ्ते बाद नतीजे घोषित किए गए हैं।
विज्ञापन
पैड्रो कास्टिलो
- फोटो : twitter
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
मतदान के छह हफ्तों तक उलझाए गए पेच के बाद अब आखिरकार पेड्रो कास्तियो को दक्षिण अमेरिकी देश पेरू के राष्ट्रपति चुनाव में विजयी घोषित किया गया है। कास्तियो स्कूल शिक्षक रहे हैं। उन्होंने टीचर्स यूनियन में काम करते हुए अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की थी। अब उनकी प्रतिद्वंद्वी कीको फुजीमोरी ने अपनी हार मान ली है। इसके पहले जून में हुए चुनाव के समय से वे लगातार दावा कर रही थीं कि कास्तियो धांधली से जीते हैं।
विज्ञापन
28 जुलाई को लेंगे शपथ
पेरू के चुनाव अधिकारियों ने सोमवार को एलान किया कि चुनाव में गड़बड़ी के लगाए गए आरोप साबित नहीं हो सके। इसलिए कास्तियो को विजेता घोषित किया जाता है। अब कास्तियो 28 जुलाई को पेरू के राष्ट्रपति पद की शपथ लेंगे। इसके साथ ही पेरू में एक वामपंथी सरकार बनेगी। कास्तियो खुद को मार्क्सवादी बताते हैं और उन्होंने देश में नया प्रगतिशील संविधान बनाने का वादा करते हुए चुनाव लड़ा था।
विज्ञापन
दक्षिण अमेरिका में पेरू चौथा सबसे बड़ा देश
चुनाव आयोग की घोषणा के मुताबिक कास्तियो को 50.12 प्रतिशत वोट मिले। इस कड़ी टक्कर में वे पूर्व राष्ट्रपति अल्बर्तो फुजीमोरी की बेटी कीको फुजीमोरी से 44,263 वोटों से जीते। पेरू की आबादी तीन करोड़ 30 लाख है। आबादी के लिहाज से दक्षिण अमेरिका में पेरू चौथा सबसे बड़ा देश है। कास्तियो की जीत के साथ दक्षिण अमेरिका में वामपंथी दलों या नेताओं के विजयी होने का सिलसिला और आगे बढ़ा है। बीते ढाई साल में अर्टना, बोलिविया, वेनेजुएला और चिली में वामपंथी पार्टियों को सफलता मिली है।
विज्ञापन
11 जून को हुआ था मतदान
कास्तियो की जीत के साथ ही अर्थशास्त्री डिना बुलआर्ते के उपराष्ट्रपति बनने का रास्ता भी साफ हो गया है। पेरू में मतदान 11 जून को हुआ था। वोटों की गिनती में तभी कास्तियो आगे निकल गए थे। लेकिन फुजीमोरी ने हार मानने से इनकार कर दिया। उन्होंने देहाती इलाकों में गड़बड़ी के आरोप लगाए, जहां कास्तियो को भारी समर्थन मिला था। खबरों के मुताबिक बीते छह हफ्तों के दौरान चुनाव अधिकारियों ने लगभग हर बूथ पर पड़े वोटों की पूरी जांच की।
तीसरी बार फुजीमोरी पराजित हुईं
फुजीमोरी को चुनाव में देश के धनी मानी तबकों और कॉर्पोरेट सेक्टर का पूरा समर्थन मिला। ज्यादातर शहरों में वे आग रहीं। गांवों और गरीब इलाकों में कास्तियो को भारी समर्थन मिला। अब ये तीसरा मौका है, जब फुजीमोरी राष्ट्रपति चुनाव में पराजित हुई हैं। उनके पिता अल्बर्तो फुजीमोरी 1990 के दशक में राष्ट्रपति थे। तब उन पर तानाशाही के तौर तरीके अपनाने और भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे।
पांच साल से अस्थिरता झेल रहा पेरू
बीते छह हफ्तों में पेरू में राजनीतिक विवाद तेज होता गया। दोनों उम्मीदवारों के समर्थक लगातार सड़कों पर उतर कर प्रदर्शन करते रहे। चुनाव नतीजा घोषित होने के बाद पेरू के मौजूदा राष्ट्रपति फ्रांसिस्को सगास्ती ने दोनों पक्षों से एकजुटता दिखाने की अपील की है। पर्यवेक्षकों ने ध्यान दिलाया है कि पेरू पिछले पांच साल से राजनीतिक अस्थिरता का शिकार रहा है। पिछले चुनाव में मार्टिन विजकारा राष्ट्रपति चुने गए थे, लेकिन देश की संसद-कांग्रेस ने उन्हें कार्यकाल के बीच में ही हटा दिया। तब मैनुएल मेरिनो राष्ट्रपति बने। उनके इस्तीफा दे देने के बाद सागिस्तो ने पद संभाला था।
पर्यवेक्षकों का कहना है कि देश के धनी-मानी तबके और कॉर्पोरेट सेक्टर कास्तियो का धुर विरोधी है। ऐसे में उनके लिए काम करना आसान नहीं होगा। वे अपना कार्यकाल पूरा कर पाएंगे या नहीं, इसको लेकर भी कयास लगाए जा रहे हैं।