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Xi Jinping: चीन में लोगों ने की राष्ट्रपति जिनपिंग के इस्तीफे की मांग, देश भर में लोग कर रहे विरोध प्रदर्शन

Fri, 23 Dec 2022 02:31 AM IST
Jeet Kumar एएनआई, बीजिंग
एएनआई, बीजिंग Published by: Jeet Kumar Updated Fri, 23 Dec 2022 02:31 AM IST
सार

सड़कों पर उतरे लोगों ने "पद छोड़ो, शी जिनपिंग! पद छोड़ो, कम्युनिस्ट पार्टी!" जैसे नारे लगाए हैं साथ ही कहा कि "हम आजीवन शासक नहीं चाहते। हम ऐसा राजा नहीं चाहते"।

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People in China demand resignation of Xi Jinping, end to Communist Party rule
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

शी जिनपिंग पहले चीनी राष्ट्रपति बन गए हैं, जिनसे चीनी लोग अपना पद छोड़ने के लिए कह रहे हैं। ऐसा पहली बार नहीं जब जिनपिंग लोगों का गुस्सा झेल रहे हैं। इससे पहले भी कई मुद्दों पर चीन की जनता शी जिनपिंग के खिलाफ सड़कों पर उतरी है। अब शी जिनपिंग के सख्त कोविड उपायों के विरोध में लोग उनके इस्तीफे की मांग को लेकर देश भर में विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं।

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सड़कों पर उतरे लोगों ने लगाए नारे
इतना ही नहीं लोगों ने चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) के एकदलीय शासन को खत्म करने की मांग भी उठाई है। सड़कों पर उतरे लोगों ने "पद छोड़ो, शी जिनपिंग! पद छोड़ो, कम्युनिस्ट पार्टी!" जैसे नारे लगाए हैं साथ ही कहा कि हम आजीवन शासक नहीं चाहते। हम ऐसा राजा नहीं चाहते,। माना जा रहा है कि सीसीपी लोगों पर अपनी पकड़ सही ने बना नहीं पा रही है और लोगों के गुस्से का मुख्य कारण कोविड-19 महामारी से ठीक से न निपटना है।
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लॉकडाउन ने लोगों की आजीविका को नुकसान पहुंचाया
लोगों ने जोर देकर कहा है कि शी के नेतृत्व वाली सरकार की शून्य-कोविड नीति के तहत लागू किए गए एंटी-वायरस उपाय महामारी को रोकने में विफल रहे हैं और उनकी स्वतंत्रता, स्वास्थ्य और आजीविका को नुकसान पहुंचाया है। विशेष रूप से, चीन कड़े प्रतिबंधों का पालन करता रहा है, जिसमें लॉकडाउन और यात्रा प्रतिबंध शामिल हैं।
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राजनीतिक तख्तापलट हो सकता है
वर्तमान स्थिति को देखते हुए, शी जिनपिंग के इस्तीफे की लोगों की मांग असाधारण है और इससे राजनीतिक तख्तापलट हो सकता है। रिपोर्टों में दावा किया गया है कि चीन में चल रही स्थिति के परिणामस्वरूप सीसीपी के शीर्ष नेताओं और शी जिनपिंग के प्रतिद्वंद्वियों द्वारा राजनीतिक तख्तापलट हो सकता है।

छात्र बीजिंग में जिनपिंग के खिलाफ सड़कों पर उतरे
छात्रों ने बीजिंग में सिंघुआ विश्वविद्यालय में शी और सीसीपी सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया और लोकतंत्र और कानून का शासन, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता जैसे नारे लगाए। शंघाई, वुहान, उरुमकी, चेंगदू और ग्वांगझू सहित पूरे चीन में इसी तरह के विरोध प्रदर्शन देखे गए हैं, यहां बड़ी संख्या में युवा शी जिनपिंग के खिलाफ सड़कों पर उतर आए।

एक हफ्ते में चरम पर होगा संक्रमण
चीन भले ही मान रहा है कि उसके देश में कोरोना की लहर नहीं है लेकिन अधिकारी यहां बढ़ते मामलों के तहत स्वास्थ्य प्रणाली में अतिरिक्त तनाव की भविष्यवाणी कर रहे हैं। वे मानते हैं कि एक हफ्ते में देश के भीतर संक्रमण अपने चरम पर पहुंचेगा। जबकि एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चीन में हर रोज 5,000 से ज्यादा लोग कोविड से मर रहे हैं। इस बीच, संक्रमण को नियंत्रित न कर पाने के खिलाफ देश के कुछ हिस्सों में प्रदर्शन भी शुरू हो चुके हैं। ये प्रदर्शनकारी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। 

स्वास्थ्य डाटा फर्म एयरफिनिटी का अनुमान है कि चीन में रोजाना की मृतक संख्या पांच हजार के पार है जबकि कम्युनिस्ट शासन आधिकारिक आंकड़ों से बचते हुए दुनिया से सच छिपा रहा है। फर्म ने कहा कि फिलहाल संक्रमण के मामले बीजिंग और ग्वांगडोंग के दक्षिणी प्रांत में सबसे तेजी से बढ़ रहे हैं।

चीनी प्रशासन द्वारा गत एक दिन में सिर्फ 4,000 से कम नए लक्षण वाले स्थानीय संक्रमणों की सूचना देने व लगातार तीसरे दिन कोविड से कोई नई मौत न होने की गलत बयानी के बीच देश में नेशनल सेंटर फॉर इंफेक्शियस डिजीज के निदेशक झांग वेनहोंग ने सरकार समर्थित समाचार आउटलेट द पेपर में उद्धृत किया कि देश में एक सप्ताह के भीतर संक्रमण अपने चरम पर पहुंचने की पूरी आशंका है।

झांग ने कहा, यह लहर दो माह तक चलेगी, जिसके लिए हमें मानसिक रूप से तैयार रहना होगा। शंघाई के एक अस्पताल ने अनुमान लगाया है कि इस वाणिज्यिक हब के 2.5 करोड़ लोगों में से आधे अगले सप्ताह तक संक्रमित हो जाएंगे। विशेषज्ञों के मुताबिक चीन को अगले साल तक एक लाख से ज्यादा मौतों का सामना करना पड़ सकता है।

हम वायरस को खत्म करने में नाकाम रहे : विशेषज्ञ
चीन में स्वास्थ्य व्यवस्था पर जबरदस्त बोझ बढ़ जाने से अस्पतालों में बिस्तर और खून की कमी हो गई है। पीड़ितों के परिजन बिस्तरों और संबंधित ब्लड ग्रुप के साथ-साथ दवाओं के लिए फार्मेसियों के चक्कर काट रहे हैं। समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने एक दर्जन से ज्यादा साक्षात्कार किए जिनमें महामारी विज्ञानियों, स्थानीय निवासियों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बताया कि हम वायरस को खत्म करने पर फोकस करने में नाकाम रहे हैं। चीन में यह तनाव का बड़ा कारक है। देश में चिकित्सा की बुनियादी व्यवस्था लचर हो चुकी है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, चीन की समग्र टीकाकरण दर 90% से ऊपर है, लेकिन बूस्टर शॉट लेने वाले वयस्कों की दर घटकर 57.9% और 80 और उससे अधिक उम्र के लोगों के लिए 42.3% हो गई है।

श्मशान घाटों पर अंतिम संस्कार की प्रतीक्षा बढ़ी
चीन और चाइना कम्युनिस्ट पार्टी पर नजर रखने वाली वाली मानवाधिकार कार्यकर्ता जेनिफर जेंग ने कुछ वीडियो पोस्ट किए हैं। इनमें दिख रहा है कि कक्षाओं के भीतर पढ़ाई के वक्त भी बच्चों को ड्रिप चढ़ाई जा रही है, क्योंकि उनका संक्रमण टूट नहीं रहा है। एक वीडियो में श्मशान में लंबी कतार दिखाई दे रही है। बताया जा रहा है कि श्मशानों में अंतिम संस्कार के लिए 20 दिन की वेटिंग है। इसके लिए शवों को मुर्दाघरों में रखा जा रहा है। इन शवों की पहचान के लिए उन्हें मिले बिस्तरों के आधार पर नंबर अलॉट किए जा रहे हैं। इन्हीं नंबरों से उनकी अंत्येष्टि की जानकारी परिजनों को दी जाएगी।

अमेरिका बांट रहा मुफ्त मास्क, जापान में अलर्ट
अमेरिका और जापान में भी कोरोना वायरस ने जोर दिखाना शुरू कर दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग को अलर्ट किया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने नागरिकों को मुफ्त मास्क, निःशुल्क समेत मुफ्त वैक्सीन उपलब्ध कराई है। अमेरिका में एक दिन पहले ही कोरोना के करीब 50,000 नए मरीज मिले थे, जबकि 323 लोगों ने जान गंवाई। बाइडन ने इसे लेकर चिंता जताई है। उधर जापान में भी एहतियाती कदम उठाए जा रहे हैं। इसके तहत स्वास्थ्य टीमों को अलर्ट पर रखा गया है।

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