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Pakistan: सरकार को व्यापारियों की चेतावनी- भारत से आयात करें खाद्य सामग्री, वरना और बुरे होंगे हालात

Mon, 26 Sep 2022 07:48 PM IST
निर्मल कांत वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद Published by: निर्मल कांत Updated Mon, 26 Sep 2022 07:48 PM IST
सार

बयान में आगे कहा गया है कि रूस-यूक्रेन युद्ध से जिस अनाज पर सबसे ज्यादा असर पड़ा है, वह गेहूं है, जिसकी कीमतों में रिकॉर्ड उछाल आया है और अब विनाशकारी बाढ़ से लाखों एकड़ में खड़ी गेहूं की फसल पूरी तरह से बर्बाद हो गई है। 

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Paks businessmen and economists ask govt to import food from neighbouring countries including India
भारत-पाकिस्तान व्यापार (सांकेतिक) - फोटो : Pakistan Tribune

विस्तार

आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान की हालिया बाढ़ ने और मुश्किलें बढ़ा दीं हैं। बाढ़ से हजारों एकड़ में खड़ी फसल बर्बाद हो गई। इसके चलते देश को भविष्य में बड़े खाद्य संकट का भी सामना करना पड़ सकता है। इसके मद्देजनर पाकिस्तान के प्रमुख व्यापारियों और अर्थशास्त्रियों ने सरकार से भारत से आयात करने का आग्रह किया है। 

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पीबीआईएफ (पाकिस्तान बिजनेसमैन एंड इंटेलेक्चुअल फोरम) ने एक बयान जारी कर कहा कि सरकार को देश के कृषि उत्पादन की स्थिति में सुधार और सामान्य स्थिति में लौटने तक सभी करों (टैक्स) को समाप्त करना चाहिए। 
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इस संगठन के अध्यक्ष जाहिद हुसैन ने कहा, हम सरकार से सभी चारों पड़ोसी देशों से आयात की अनुमति देने का अनुरोध करते हैं। उन्होंने कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध ने वैश्विक कृषि को बहुत नुकसान पहुंचाया है और सभी कृषि वस्तुओं की कीमतें आसमान छू रहीं हैं। 
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बयान में आगे कहा गया है कि रूस-यूक्रेन युद्ध से जिस अनाज पर सबसे ज्यादा असर पड़ा है, वह गेहूं है, जिसकी कीमतों में रिकॉर्ड उछाल आया है और अब विनाशकारी बाढ़ से लाखों एकड़ में खड़ी गेहूं की फसल पूरी तरह से बर्बाद हो गई है। 

इसमे कहा गया है कि भारत त्वरित और सस्ते खाद्य आयात के लिए सबसे अच्छा विकल्प था लेकिन सरकार द्वारा इसकी अनुमति नहीं दी गई क्योंकि मुख्य विपक्षी पार्टी इसे राजनीतिक लाभ के लिए एक हथियार के रूप में इस्तेमाल कर सकती थी। बयान में यह भी कहा गया है कि भारत से सीधे व्यापार के अभाव में भारतीय व पाकिस्तानी बिजनेसमैन संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के जरिए अतिरिक्त पैसा देकर व्यापार करने पर मजबूर हैं। 

बयान में कहा गया है कि सरकार को लोगों के कल्याण को प्राथमिकता देनी चाहिए और दूर के देशों से कृषि उत्पादों के आयात के बजाय पड़ोसी देशों को प्राथमिकता देनी चाहिए। इसके अलावा अगर 17 अरब डॉलर (4000 अरब रुपये) पाकिस्तानी किसानों को ब्याज मुक्त ऋण के रूप में दिए जाते हैं तो कृषि उत्पादन में क्रांति हो सकती है। वरना स्थिति 2050 तक और भी खराब हो सकती है। पाकिस्तान की आबादी 38 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान  है।


इसमें कहा गया है कि विनाशकारी बाढ़ के कारण पाकिस्तान को चालीस बिलियन अमेरिकी डॉलर से ज्यादा का आर्थिक नुकसान हुआ है और ऐसी आशंका है कि फसलों का नुकसान होने से खाद्य संकट पैदा हो सकता है। सकारात्मक सोच रखने के बाजवूद सरकार भारत से आयात की अनुमति देने से हिचकिचा रही है।  

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