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पाकिस्तान: अब मार्शल आर्ट से 'मुंहतोड़' जवाब देंगी हजारा महिलाएं, दशकों से झेल रही थीं प्रताड़ना

Sat, 10 Apr 2021 08:58 AM IST
Tanuja Yadav वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद Published by: Tanuja Yadav Updated Sat, 10 Apr 2021 08:58 AM IST
सार

  • पाकिस्तान में हजारा महिलाएं सीख रहीं मार्शल आर्ट्स
  • इन महिलाओं ने दशकों से सांप्रदायिक हिंसा का सामना किया
  • अपनी और अपने परिवार की रक्षा के लिए सीख रही हैं मार्शल आर्ट्स

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pakistani Hazara women are strike back with martial arts here you know more about this
पाकिस्तानी हजारा महिलाएं सीख रहीं मार्शल आर्ट्स - फोटो : social media

विस्तार

पाकिस्तान में हाशिए पर रहने वाले हजारा समुदाय की हजारों महिलाएं मार्शल आर्ट्स के टिप्स सीख रही हैं। बता दें कि हजारा समुदाय, मुख्य तौर पर शिया मुस्लिम होते हैं और इन्हें दशकों से दक्षिण-पश्चिमी शहर क्वेटा में सांप्रदायिक हिंसा का सामना करना पड़ा है। 

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इन महिलाओं को भीड़-भाड़ वाले बाजारों और सार्वजनिक परिवहन जैसे जगहों पर पुरुषों की ओर से नियमित उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है। मार्शल आर्ट्स सीख रही एक 20 वर्षीय महिला ने बताया कि कराटे सीखने से हम बम का विस्फोट होना तो नहीं रोक सकते लेकिन आत्मरक्षा से हमने आत्म विश्वास जरूर जीता है। 
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महिला ने बताया कि यहां हर कोई जानता है कि मैं बाहर मार्शल आर्ट्स सीखने जाती हूं, जब मैं बाहर होती हूं तो किसी में हिम्मत नहीं होती कि मुझे कुछ कह सके। बलूचिस्तान वूशू कूंग फू एसोसिएशन के अध्यक्ष इशाक अली का कहना है कि बलूचिस्तान प्रांत के 25 क्लब में 4,000 लोग नियमित मार्शल आर्ट्स का प्रशिक्षण ले रहे हैं। 
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इन क्लब में मार्शल आर्ट्स सीखाने वाले लोगों का कहना है कि उनके छात्रों में ज्यादातर हजारा महिलाओं की संख्या है। इनमें से कई महिलाएं बाहर जाती हैं और प्रतिस्पर्धा में हिस्सा लेती हैं। बता दें कि पाकिस्तान में महिलाओं का इस तरह के स्पोर्ट्स खेलना आज भी एक मुश्किल काम है। 

पाकिस्तान के एक मार्शल आर्ट्स शिक्षक फीदा हुसैन काजमी ने बताया कि हमारे समाज में महिलाएं इस तरह की एक्सरसाइज नहीं करती हैं लेकिन अपनी और अपने परिवार की रक्षा के लिए हजारा महिलाएं बाहर आ रही हैं और मार्शल आर्ट्स सीख रही हैं। 


काजमी ने बताया कि उन्होंने एक साल में सैकड़ों महिलाओं को प्रशिक्षित किया है। उन्होंने लाहौर में एक चीनी गुरू से मार्शल आर्ट्स सीखा था। काजमी की उम्र 41 साल है और वो हफ्ते में छह दिन दो घंटे के लिए प्रशिक्षण देते हैं। इसके लिए वो लोगों से पांच सौ रुपये महीना फीस लेते हैं लेकिन सैन्य हिंसा में अगर किसी महिला ने अपने किसी रिश्तेदार को खोया है तो उन्हें मुफ्त में प्रशिक्षण दिया जाता है। 

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